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ऐसे तो हिमाचल से गायब हो जाएगी बर्फ !

Chandigarh Updated Wed, 22 Aug 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। बर्फीली वादियों में बढ़ रहा प्रदूषण का स्तर खतरनाक साबित हो सकता है। लगातार बढ़ रही वाहनों की संख्या के कारण प्रदूषण फैलने से पहाड़ी इलाकों में बर्फ का स्तर कम होने लगा है। ऐसे में संभव है कि आने वाले कुछ वर्षों में इसमें और गिरावट आए। पिछले 10 साल में यहां 400 सेंटीमीटर बर्फ कम हो गई है। साथ ही छोटे ग्लेशियर भी कम होते जा रहे हैं। यह खुलासा हुआ है हिमाचल की बर्फ और वहां के ग्लेशियर पर की जाने वाली स्टडी में। चंडीगढ़ सेक्टर-37 स्थित सासे की वैज्ञानिकों की एक टीम यह स्टडी कर रही है। इसके मुताबिक, आने वाले समय में बर्फ की स्थिति में कोई बदलाव आने की संभावना भी नहीं है।
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स्नो एवलांचे एंड स्टडी एस्टिबलिशमेंट के साइंटिस्ट (जी) और एसोसिएट डायरेक्टर डा. एमआर भूटियानी ने बताया कि मनाली, रोहतांग, द्रास, लेह और गुलमर्ग में बर्फ गिरने की स्थिति में 40 फीसदी तक गिरावट आई है। वर्ष 1991 में मनाली और रोहतांग के साथ सोलांग वैली में 12 मीटर तक बर्फ होती थी, लेकिन अब यहां आठ मीटर तक बर्फ रह गई है। कश्मीर में बर्फ की स्थिति में बदलाव आ चुका है। इन सब बदलाव से ज्यादा खतरनाक है तापमान का बढ़ना। सर्दी के समय में ग्लोबल तापमान 0.7 डिग्री सेल्सियस की दर से बढ़ रहा है, जबकि हिमालय का तापमान 1.7 डिग्री सेल्सियस की दर से प्रति वर्ष बढ़ता जा रहा है। सर्दी में तापमान में इतना ज्यादा अंतर आना चिंता का विषय है।

क्यों कम हो रही बर्फ
विज्ञानियों ने स्टडी में पाया कि हिमाचल जैसे पहाड़ी इलाकों में आने वाले सैलानियों द्वारा फैलाई जाने वाली गंदगी इसकी प्रमुख वजह है। भारी तादाद में जाने वाली कारों और व्हीकल से निकलने वाला धुआं भी इस परिवर्तन का प्रमुख कारण माना जा रहा है। इसके साथ ही कृषि भूमि का लगातार कम होना भी इसके कारण हैं।

यह बदलाव भी संभव
पिछले साल हिमाचल के कांगड़ा जिले में करीब 40 साल बाद हिमपात हुआ। वैज्ञानिक इसे भी पर्यावरण में आए बदलाव से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे एक्सट्रीम इवेंट और भी हो सकते हैं, क्योंकि लगातार जंगली इलाके और खेतीबाड़ी का रकबा कम होने की वजह से ऊर्जा का स्तर बढ़ने लगा है। इससे मौसम में अप्रत्याशित बदलाव संभव है।

ये हो सकते हैं उपाय
विज्ञानियों की मानें तो पहाड़ी इलाकों में पर्यटकों की तादाद और वाहनों की आवश्यकता धीरे-धीरे बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में प्रदूषण को खत्म करने के लिए इलेक्ट्रानिक रोप वे डेवलप करना बेहतर होगा। यही नहीं, बर्फीले स्थानों में बनाए जाने वाले फास्ट फूड सेंटरों को भी हटाना होगा।

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