रैगिंग से रोका तो किया लहूलुहान

Chandigarh Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। प्रतिष्ठित एसडी कालेज, सेक्टर-32 में सोमवार देर रात एक छात्र के साथ हुई रैगिंग के प्रयास ने कालेज प्रबंधन के साथ साथ चंडीगढ़ पुलिस के भी होश उड़ा दिए। छात्रों के साथ रैगिंग के प्रयास की खबर मिलने के बाद रात लगभग 12.15 बजे भारी संख्या में पुलिस कालेज पहुंच गई और हॉस्टल में रेड मारी। पुलिस अपने साथ उन पांच छात्रों को भी ले गई है जिन पर रैगिंग का प्रयास करने के आरोप लगे हैं। खबर लिखे जाने तक कालेज में अफरा तफरी का माहौल था।
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रात लगभग 10.40 पर कालेज के हॉस्टल में रहने वाले बीए के तीसरे वर्ष के कुछ विद्यार्थियों ने बीए के पहले वर्ष के छात्र आदित्य को उसके कमरे से नीचे बुलाया और शर्ट उतारकर डांस करने को कहा। आदित्य इससे पहले की रैगिंग का शिकार होता इसी हॉस्टल में रहने वाला उसका भाई मनोज भी मौके पर पहुंच गया। मनोज बीए के दूसरे वर्ष का छात्र है। जब उसने बताया कि आदित्य उसका छोटा भाई है और वह उसे परेशान न करें तो बीए के तीसरे वर्ष के छात्रों ने मनोज को पीटना शुरू कर दिया। बीच बचाव कर रहे आदित्य को भी इन छात्रों ने पीटा। इसके बाद मनोज और आदित्य के दोस्त उन्हें सेक्टर-32 स्थित जीएमसीएच ले गए। उसकी आईब्रो पर चोट थी और दो चार टांके लगाने पड़े और वापस भेज दिया गया।
मनोज और आदित्य ने अपनी शिकायत में बीए के तीसरे वर्ष के पांच छात्रों पर रैगिंग करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इन पांच छात्रों के साथ दो बाहरी छात्र भी थे। उनके अनुसार आरोपी छात्र सोपू से जुड़े हैं। सेक्टर 34 की पुलिस ने मनोज और आदित्य की शिकायत के बाद तीन छात्रों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया, जबकि दो भागने में सफल रहे।
कालेज में इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी न तो प्रिंसिपल मीना प्रभाकर मौके पर पहुंची और न ही कोई अन्य अधिकारी। मीना प्रभाकर का मोबाइल फोन भी बंद था जिससे उनसे संपर्क नहीं हो सका। उधर, हास्टल के वार्डन प्रवीण शर्मा ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और कालेज इसकी जांच कराएगा। उन्होंने कहा कि बिना जांच के वह कुछ भी कहने में असमर्थ हैं।

बाक्स
पंजाब यूनिवर्सिटी और इससे संबद्ध कालेजों में रैगिंग पर कड़ा प्रतिबंध है। लेकिन इसके बाद भी पिछले सालों में हर साल रैगिंग की कोई न कोई वारदात हो रही है। शहर में कालेज में रैगिंग की चाहे यह पिछले कुछ सालों में पहली घटना हो लेकिन पिछले तीन सालों में पीयू में रैगिंग की शिकायतें आई हैं। पीयू में रैगिंग का शिकार होने वाले छात्रों ने तो पीयू छोड़कर दूसरे संस्थानों में दाखिला ले लिया था।
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