पांच बूथों का अलाटमेंट रद होगा

Chandigarh Updated Tue, 07 Aug 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। यूटी प्रशासन ने बूथ घोटाले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी कर ली है। उम्मीद की जा रही है कि 15 अगस्त से पहले प्रशासन आरोपियों के खिलाफ जहां एफआईआर दर्ज करवाएगा, वहीं सेक्टर-41 स्थित कृष्णा मार्केट में पांच बूथों का आवंटन भी रद करेगा। साथ ही संपदा विभाग के कुछ अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है। इनमें संपदा विभाग के तहसीलदार से लेकर सुपरिंटेंडेंट और इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। ये सभी छह जून 2003 से लेकर 11 नवंबर 2008 तक हुई स्क्रीनिंग कमेटी की सात बैठकों से जुड़े थे। चंडीगढ़ के उपायुक्त बृजेंद्र सिंह अपने मूल राज्य हरियाणा लौटने से पहले बूथ घोटाले में शामिल आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। अमर उजाला ने भी बूथ घोटाले से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से उठाया था।
चंडीगढ़ के पूर्व एडीसी पीएस शेरगिल की प्राथमिक जांच के बाद चंडीगढ़ के उपायुक्त बृजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने तीन महीने पहले अपनी जांच पूरी कर ली थी। जांच के दौरान कुछ ऐसे पहलूू सामने आए जिस पर कानूनी राय जरूरी थी। इस समिति ने अपनी जांच में यह पाया था कि ट्राइसिटी में कामर्शियल प्रापर्टी होने के बावजूद पांच लोगों को सेक्टर-41 की कृष्णा मार्केट में बूथ अलाट किए गए थे। प्रशासन को गमाडा और हुडा से इस संबंध में सुबूत मिले हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इन पांच लोगों के पास पहले से ट्राइसिटी में कामर्शियल प्रापर्टी थी। यह बूथ अलाटमेंट पॉलिसी का उल्लंघन था। ऐसे में इन पांच बूथों का आवंटन रद होना तय है। ये बूथ 2002 से 2007 के बीच अलाट किए गए थे।
कानूनी राय लेगा संपदा विभाग
पूर्व एडीसी पीएस शेरगिल ने रिपोर्ट में उन लोगों के बूथ भी रद करने को कहा था जो कि सर्वे के दौरान वहां मौजूद नहीं थे। यही इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा पेंच था। इन लोगों के बूथ अगर रद कर दिए जाते हैं तो वे इसे आसानी से न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं। क्योंकि बूथ अलाटमेंट के लिए बनी पॉलिसी में कहीं भी सर्वे के दौरान खुद मौजूद होने की बात स्पष्ट नहीं है। इसी पेंच के कारण प्रशासन को आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने में देरी हो रही है। अब संपदा विभाग ने इस पर कानूनी राय मांगी है। इसी के आधार पर विभाग तय करेगा कि उन लोगों के बूथ भी रद किए जाएं या नहीं, जो सर्वे के दौरान खुद उपस्थित नहीं थे। हालांकि शेरगिल की रिपोर्ट के आधार पर संपदा विभाग ने 88 बूथ अलाटियों को इस साल जनवरी में नोटिस भेजे थे। उनके जवाब आने के बाद सुनवाई शुरू हुई थी। सेक्टर-41 की कृष्णा मार्केट और सेक्टर-22 की बिजवाड़ा मार्केट के दुकानदारों को 240 बूथ अलाट किए गए थे। इनमें से 88 बूथों का अलाटमेंट फर्जी निकला था।
2010 में प्रशासक ने दिए थे न्यायिक जांच के आदेश
चंडीगढ़ के प्रशासक शिवराज पाटिल ने मार्च 2010 में शिकायतें मिलने के बाद न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। जांच तत्कालीन एडीसी पीएस शेरगिल ने की। लगभग एल साल जांच करने के बाद शेरगिल ने फरवरी, 2011 में रिपोर्ट ऐसे समय पर सौंपी जब उनका मूल राज्य पंजाब वापस जाना तय था। शेरगिल ने इस पूरे घोटाले की सीबीआई जांच कराने को भी कहा था। रिपोर्ट सौंपने के तुरंत बाद वे रिलीव होकर पंजाब लौट गए। अब उपायुक्त भी बूथ घोटाले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई ऐसे समय में करने जा रहे हैं जब उनके हरियाणा वापस लौटने के आदेश आ चुके हैं। उम्मीद है कि 15 अगस्त के आसपास बृजेंद्र सिंह रिलीव हो जाएंगे और जाने से पहले वे आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
संसद तक गूंजा था घोटाला
चंडीगढ़ का बूथ घोटाला संसद तक गूंजा था। शेरगिल की रिपोर्ट में चंडीगढ़ के सांसद और केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल का नाम आने के बाद लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने इस मामले को लोकसभा में उठाया था।

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