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पांच मरले से ऊपर के मकानों पर टैक्स

Chandigarh Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। प्रशासन के दबाव पर नगर निगम ने लोगों की जेबों पर हाउस टैक्स का बोझ डालने की तैयारी कर ली है। इसके लिए हाउस टैक्स कमेटी ने रेट भी तय कर लिए हैं। अगले सप्ताह हाउस टैक्स कमेटी की बुलाई जाएगी। इसमें हाउस टैक्स लगाने के प्रस्ताव पर सहमति बनाई जाएगी।
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सूत्रों के अनुसार पांच मरले से ऊपर के सभी मकानों पर हाउस टैक्स लगाने का प्रस्ताव है। पांच मरले से लेकर एक कनाल तक की कोठी वालों से एक रुपया प्रति गज, जबकि एक से आठ कनाल की कोठी वालों पर दो रुपये प्रति गज के हिसाब से हाउस टैक्स चार्ज करने का प्रस्ताव है।

छोटे मकानों में रहने वाले लोगों को राहत देने की योजना है। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय मंत्री पवन बंसल ने पार्षदों संग बैठक में छोटे मकानों में रहने वाले लोगों को राहत देने को कहा है। हाउस टैक्स कमेटी के चेयरमैन सतप्रकाश अग्रवाल का कहना है कि अगले सप्ताह कमेटी की बैठक बुलाई जाएगी। इसमें सभी पहलुओं पर चरचा की जाएगी।

एमआईजी मकानों पर भी लगेगा टैक्स

हाउसिंग बोर्ड के मकानों के अलावा निजी सोसाइटी के फ्लैट वालों पर भी हाउस टैक्स लागू करने का प्रस्ताव है। एमआईजी मकानों पर 100 रुपये प्रति माह और एचआईजी के मकानों और फ्लैट पर 150 रुपये प्रति माह टैक्स लगाने की योजना है।

1500 से छह हजार तक का पड़ेगा बोझ

सेक्टर-22 के अवस्थी प्रापर्टीज के संचालक राजीव के अनुसार एक मरले में 25 गज होते हैं, जबकि एक कनाल की कोठी में 500 गज होते है। ऐसे में एक कनाल की कोठी पर हर साल छह हजार, जबकि पांच मरले की कोठी पर 1500 रुपये का हाउस टैक्स चार्ज किया जाएगा। शहर में पांच से लेकर दस मरले की कोठियों तक की तादाद काफी ज्यादा है।

प्रशासन के आगे झुका निगम

इस मामले में प्रशासन के सख्त रवैये के आगे नगर निगम को झुकना पड़ा। हाउस टैक्स के लिए निगम के इनकार करने के बाद प्रशासन अपने विशेष अधिकार का प्रयोग कर इसे लागू करने की तैयारी में है। निगम की हाउस टैक्स कमेटी का मानना है कि अगर प्रशासन ने अपने स्तर पर हाउस टैक्स लगाया तो हर वर्ग के मकानों पर इसे लागू करना पड़ेगा।

उस स्थिति में छोटे मकानों को राहत नहीं दी जा सकती है। 2007 में निगम प्रापर्टी टैक्स लगाने को भी तैयार नहीं हुआ था, लेकिन प्रशासन ने विशेष अधिकार का प्रयोग कर सभी कामर्शियल इमारतों पर इसे लागू कर दिया था। प्रशासक शिवराज पाटिल भी निजी तौर पर नगर निगम को हाउस टैक्स लगाने को कह चुके हैं।

तो निगम को होता करोड़ों का नुकसान

हाउस टैक्स लगाने का एक कारण करोड़ों के नुकसान का डर भी है। प्रशासन पिछले साल से लेकर अब तक निगम को पांच बार रिमाइंडर भेज चुका है। प्रशासन ने हाउस टैक्स न लगाने की सूरत में करोड़ों रुपये की ग्रांट रोकने की भी चेतावनी दी। इसके अलावा मेट्रो प्रोजेक्ट और स्लम फ्री सिटी बनाने के लिए पुनर्वास योजना के तहत मकान बनाने के लिए भी ग्रांट नहीं देने की बात कही। यह ग्रांट जवाहर लाल रिव्यूनल मिशन के तहत ही शहर को मिलती है। प्रशासन ने हाउस टैक्स लागू करने की शर्त पर ही ग्रांट देने की बात कही थी। अब निगम को यह ग्रांट मिल जाएगी।

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