दोबारा होगी अनुपमा मामले की जांच

Chandigarh Updated Sun, 29 Jul 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। अनुपमा की मौत मामले की जांच अब पीजीआई दोबारा कराएगी। इसके लिए सोमवार को एक नई कमेटी बनाई जाएगी। इस बार जांच में न केवल छात्रा के परिजनों को शामिल किया जाएगा, बल्कि जांच बाहरी एजेंसी या विशेषज्ञ से भी करवाई जा सकती है। शनिवार को यह बात पीजीआई निदेशक ने आधी-अधूरी जांच रिपोर्ट के चलते मीडिया के सवालों के जवाब में उलझने के बाद कही। शुक्रवार को चार सदस्यीय कमेटी ने दो दिन की जांच के बाद उन्हें अनुपमा की मौत के मामले में जांच रिपोर्ट सौंपी थी, जिसे वे मीडिया से साझा कर रहे थे। जांच में कई महत्वपूर्ण बातों का उल्लेख नहीं होने के कारण निदेशक मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दे पाए और बातों को गोलमोल करते रहे। अमर उजाला ने पहले ही पीजीआई की हवाहवाई कमेटी और उसकी जांच में बरती जा रही लापरवाही को उजागर कर दिया था।

बार-बार मरीजों के बोझ का दिया हवाला
पीजीआई निदेशक प्रो. योगेश चावला अपने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ शनिवार शाम पांच बजे के बाद जांच रिपोर्ट के साथ मीडिया के सामने पहुंचे। प्रो. चावला ने इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अनुपमा के मामले में सबसे बड़ी कमी मरीजों का बढ़ता बोझ है। कमेटी ने सिफारिश की है इसको कम किया जाए। उन्होंने कहा कि इस जांच में किसी भी एक डॉक्टर को पिन प्वाइंट करना मुश्किल था। ऐसे में कमेटी ने सुझाव दिया है कि अगर मरीजों का बोझ कम हो जाए तो यहां व्यवस्थाएं सुधर सकती हैं।


इन सवालों में उलझे प्रो. चावला
सवाल - अनुपमा के इलाज में हुई लापरवाही को कमेटी ने जांचा या नहीं।
जवाब - जांच जरूर की गई होगी।

सवाल - जिन नौ मरीजों का हवाला देकर अनुपमा की सर्जरी नहीं हुई, उनको भी तो समय पर ऑपरेट नहीं किया गया।
जवाब - इस पर प्रो. चावला गोलमोल जवाब देते रहे।

सवाल - अनुपमा के परिजनों से पूछताछ क्यों नहीं की गई।
जवाब - पीजीआई के उपनिदेशक के कान में फुसफुसाने के बाद प्रो. चावला ने कहा कि वह अनुपमा के परिजनों से भी बातचीत करेंगे।
निदेशक को भी सौंपी आधी-अधूरी जांच रिपोर्ट
अनुपमा की 17 से लेकर 20 जुलाई की एक-एक दिन की पूरी रिपोर्ट जब मीडिया प्रो. चावला को बता रही थी तो उनको कई बातों की जानकारी ही नहीं थी। प्रो. चावला को जांच कमेटी की ओर से इस बात की जानकारी नहीं दी गई थी कि अनुपमा के घावों को कब-कब भरा गया और उसकी ड्रेसिंग की गई या नहीं। उन्होंने इस बात को माना कि इसकी उनको कोई जानकारी नहीं दी गई और न ही जांच में इसका कोई उल्लेख है। आखिरकार मामले में फंसते देख प्रो. योगेश चावला ने कहा कि वह इन सभी बिंदुओं पर दोबारा जांच कराएंगे।


अमर उजाला ने पहले ही उजागर कर दिया था जांच का सच
अमर उजाला ने अनुपमा मामले में पहले ही बता दिया था पीजीआई ने ‘अपनों’ को बचा लिया है। पहले तो चार सदस्यीय कमेटी में ऐसे दो डाक्टरों को सदस्य बना दिया, जिसमें एक शहर में नहीं था, जबकि एक अगले दिन बाहर जा रहा था। इसके बाद पीजीआई ने उन सदस्यों को बदल दिया। अमर उजाला ने ही बताया कि 17 जुलाई को जिन नौ मरीजों की सर्जरी का पीजीआई ने दावा किया, उस दिन उन्हें भी आपरेट नहीं किया गया।

यह था मामला
सेक्टर 18 गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की 11वीं क्लास की छात्रा अनुपमा 17 जुलाई को घर जाने के लिए बस में चढ़ रही थी। इसी दौरान ड्राइवर ने बस दौड़ा दी और उसके नीचे आकर वह बुरी तरह घायल हो गई। बाद मेें पीजीआई में डाक्टरों ने समय पर सर्जरी नहीं की और न ही पट्टियां बदली। उसे आईसीयू भी नहीं मिला। इस वजह से इंफेक्शन फैलने के कारण 24 जुलाई को उसकी मौत हो गई।

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