60:40 फार्मूले पर प्रशासन देगा करारा जवाब!

Chandigarh Updated Fri, 20 Jul 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। यूटी में पंजाब और हरियाणा के कर्मचारियों का अनुपात 60:40 रखने की सीएम प्रकाश सिंह बादल की मांग और उस पर गृहमंत्रालय की सलाह के जवाब में चंडीगढ़ प्रशासन जोरदार जवाब देने की तैयारी कर ली है। प्रशासन जल्द ही केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम को पत्र लिखकर ये बताने जा रहा है कि यूटी में पंजाब और हरियाणा के कर्मचारियों को किसी खास अनुपात में रखने का कोई लिखित प्रोविजन ही नहीं है, तो वह इसे मानने को बाध्य कैसे हैं! प्रशासन के अफसर इन दिनों इस खत का मजमून तैयार करने में लगे हैं।
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पंजाब के सीएम प्रकाश सिंह बादल के पत्र के जवाब में जब केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम चंडीगढ़ में हरियाणा और पंजाब से डेपुटेशन पर आने वाले कर्मचारियों का अनुपात 60:40 रखने का भरोसा दिलाया, तो यूटी में कर्मचारियों की तैनाती के मामले ने तूल पकड़ लिया। इसके बाद स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल ने नार्थ जोनल काउंसिल की बैठक के बाद गृहमंत्री के सामने यूटी के कर्मचारियों के प्रमोशन का मसला उठा दिया। तभी से चंडीगढ़ में कर्मचारियों के अनुपात को लेकर चर्चा गरम है। लेकिन, प्रशासन का तर्क है कि न तो पंजाब पूनर्गठन कानून में इस अनुपात का कही उल्लेख है और न ही प्रशासन की ओर से कर्मचारियों की भरती के लिए लगभग चार दशक पहले तैयार की गई पॉलिसी में। यही वजह है कि अब प्रशासन की ओर से केंद्रीय गृहमंत्रालय को इस संबंध में पत्र भेजकर यह स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है कि जब लिखित में कहीं भी 60-40 अनुपात का उल्लेख ही नहीं है तो वह कैसे इसका पालन करे। प्रशासन के सूत्रों के अनुसार चंडीगढ़ बनने के समय कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए हरियाणा और पंजाब से कर्मचारियों को यूटी में एडजेस्ट करने का मुद्दा उठा था।
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‘यूटी की पोस्ट डेपुटेशन वालों को नहीं’
यूटी में कर्मचारियों के डेपुटेशन मामले में कैट का एक फैसला भी अहम है। इसमें कहा गया है कि चंडीगढ़ यूटी की पोस्ट डेपुटेशन वालों के लिए नहीं है। जब यूटी प्रशासन ने चीफ इंजीनियर के लिए पंजाब और हरियाणा से डेपुटेशन पर अफसरों का पैनल मांगा तो चड्ढा कैट चले गए। इसके बाद प्रशासन को चड्ढा को चीफ इंजीनियर लगना पड़ा। इतना ही नहीं पूर्व चीफ इंजीनियर एसके जेटली के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। जेटली को एसडीओ से एक्सईन इसलिए प्रमोट नहीं किया जा रहा था, क्योंकि यह पोस्ट डेपुटेशन वालों के लिए तय की गई थी। जेटली कोर्ट गए और उन्हें यूटी में प्रमोशन भी मिली।

लोकसभा में भी उठा था मुद्दा
लगभग दो दशक पहले लोकसभा में भी यूटी में पंजाब-हरियाणा के कर्मचारियों को 60-40 के अनुपात में तैनात करने का मुद्दा उठा था। तत्कालीन गृहमंत्री एसबी चह्वाण ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि पंजाब पूनर्गठन कानून में पंजाब और हरियाणा से चंडीगढ़ में प्रतिनियुक्ति पर आने वाले कर्मचारियों के अनुपात का उल्लेख नहीं है।
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तीन सदस्यों की कमेटी बनी थीं
1 नवंबर, 1966 को चंडीगढ़ गठन के वक्त पंजाब और हरियाणा से डेपुटेशन पर कर्मचारियों को तव्वजो देने के मामले में कमेटी का गठन किया गया था। इसमें पंजाब के ज्वाइंट सेक्रेटरी बीएल कक्कड़, हरियाणा के ज्वाइंट सेक्रेटरी एलसी गुप्ता और केंद्रीय गृह मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी एएफ कुट्टू शामिल थे। लेकिन, विवादों में रही कमेटी को रद कर दिया गया। इसके बाद डेपुटेशन मामले पर कोई नियम नहीं बन सका।

तीन विभागों में कोई कर्मचारी डेपुटेशन पर नहीं लिया
चंडीगढ़ स्थापना के समय सिर्फ आर्किटेक्ट विभाग, पीजीआई और प्रिंटिंग एंड स्टेशनरी विभाग में डेपुटेशन पर कर्मचारियों की जरूरत नहीं पड़ी, जबकि अन्य विभागों के लिए पंजाब हरियाणा से कर्मचारियों को एजडेस्ट किया गया।
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