तड़पते मरीज को पीजीआई ने बाहर निकाला!

Chandigarh Updated Thu, 19 Jul 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। पीजीआई ने सड़क हादसे की शिकार एक महिला को उपचार पूरा किए बिना उस हालत में मनीमाजरा अस्पताल रेफर कर दिया, जब वह न तो ठीक से उठ पा रही थी और न ही बोल पा रही थी। उसके सिर पर गंभीर चोट लगी थी और जबड़े टूटे हुए थे। गले में सक्शन पाइप और यूरिन डिस्चार्ज के लिए नली लगी थी। इसके बावजूद यहां के डाक्टरों ने उसे ऐसे अस्पताल में भेज दिया, जहां न तो न्यूरो सर्जरी के डॉक्टर हैं और न ही प्लास्टिक सर्जरी के। लाचार परिजन एडवांस ट्रामा सेंटर के भीतर मंगलवार से मरीज को लिए पड़े रहे और बुधवार को मनीमाजरा के सरकारी अस्पताल में मरीज को दाखिल करा दिया। साथ ही पीजीआई से इस मामले की शिकायत की।
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डेढ़ हफ्ता पहले दोबारा भर्ती हुई थी महिला
पीड़ित महिला मनीमाजरा निवासी मीना देवी के पुत्र सुरेंदर ने बताया कि पिछले महीने सेक्टर-26 में एक्सीडेंट होने के बाद उनकी मां को पीजीआई में दाखिल किया गया था। न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने एडवांस ट्रामा सेंटर के आईसीयू में दाखिल कर उनका इलाज किया और 15 दिन बाद घर भेज दिया। हालत बिगड़ने पर डेढ़ सप्ताह पहले उन्हें दोबारा दाखिल किया गया।
जबड़े की सर्जरी तक नहीं की
मरीज के बेटी पूनम और सुरेंदर ने बताया कि उनकी मां को मंगलवार दोपहर पीजीआई से वापस जाने को कह दिया गया, जबकि उनकी हालत अब भी खराब है। वह न तो बोल सकती हैं और न ही उठ सकती हैं। उन्हें सांस लेने के लिए गले में सक्शन पाइप डाला गया है और यूरिन पास होने के लिए भी पाइप डाला गया है। उन्होेंने बताया कि एक्सीडेंट में टूटे जबड़े की अब तक सर्जरी नहीं हो सकी है। जब उन्होंने अपनी मां को डिस्चार्ज नहीं करने की बात कही तो डाक्टरों ने मंगलवार शाम से ही उनकी दवा बंद कर दी।
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कोट्स.............
न्यूरो सर्जरी विभाग की ओर से मरीज का पूरी तरह इलाज किया जा चुका है। उसे प्लास्टिक सर्जरी विभाग में जबड़े के इलाज के लिए अटैच किया गया था और वहां मंगलवार को जाना था, लेकिन मरीज नहीं पहुंचा। इसलिए आगे का इलाज नहीं हो सका।
- मंजू वाडवलकर, प्रवक्ता, पीजीआई
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मैं प्लास्टिक सर्जरी विभाग में गया था, लेकिन वहां के डॉक्टरों ने मरीज को देखने से ही इनकार कर दिया। डाक्टरों ने कहा कि जब तक न्यूरो सर्जरी के डाक्टर उनसे नहीं कहते हैं, तब तक इलाज नहीं होगा।
- सुरेंदर सिंह, मरीज का बेटा
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सेवा को लेकर जश्न और मरीजों की अनदेखी
मरीजों की सेवा के 50 साल पूरे होने का जश्न मना रहे पीजीआई में एक सप्ताह के भीतर दो ऐसे मामले आए, जिनमें मरीज को पूरा उपचार दिए बिना ही वापस जाने को कह दिया गया। पिछले सप्ताह पटियाला के एक परिवार ने आरोप लगाया था कि उनके पौने चार साल के बच्चे को एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर में आधा-अधूरा इलाज करके वापस भेजने की तैयारी कर ली गई थी। इसे लेकर जब परिजनों ने हंगामा मचाया और निदेशक से मिले, तब जाकर बच्चे को अस्पताल में रहने की इजाजत दी गई।
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