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ढलती उम्र में भी स्टेम सेल लौटाएगा आंखों की रोशनी

Chandigarh Updated Tue, 17 Jul 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। पीजीआई ने लोगों की ढलती उम्र में खत्म होने वाली आंखों की रोशनी को भी वापस लाने का एक नायाब तरीका ढूंढ निकाला है। अब जिंदगी के अंतिम पड़ाव में भी आंखों की रोशनी लौटाई जा सकेगी और यह संभव होगा स्टेम सेल के माध्यम से। अभी तक रेटिना में आने वाली दिक्कतों से कम होने वाली रोशनी को लौटाने का प्रयोग स्टेम सेल से नहीं हुआ था। पीजीआई ने सफल प्री क्लीनिकल ट्रायल करके अब मरीजों पर इसका प्रयोग करने की तैयारी की है। न्यूरोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. अक्षय आनंद और एडवांस आई सेंटर के प्रमुख प्रो. आमोद गुप्ता ने इस बाबत शोध किया है।
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चूहों पर किया सफल ट्रायल
न्यूरोलॉजी विभाग के डा. अक्षय आनंद ने बताया कि आंखों में तस्वीर बनाने वाले मैक्युला में ब्लड वैसल्स के लीक होने की वजह से उसमें रोशनी खत्म होने लगती है और ऐज रिलेटेड मैक्यूलर डिजीज में सेंट्रल विजन पूरी तरह खत्म हो जाता है। इस बीमारी को स्टेम सेल से खत्म करने के लिए पीजीआई पांच साल से काम कर रहा था। प्री क्लीनिक ट्रायल के दौरान चूहों पर स्टेम सेल का सफल ट्रायल किया जा चुका है। पीजीआई की इस रिसर्च को अमेरिका के सबसे प्रमुख जर्नल स्टेम सेल डेवलपमेंट में भी प्रकाशित किया जा चुका है।


ऐसे किया शोध
पीजीआई में पांच साल तक चले शोध के दौरान चूहों पर लेजर विधि से उनकी आंखों के मैक्युला को डैमेज कर उनकी रोशनी खत्म की गई। फिर आंख और नसों के माध्यम से अलग-अलग तरीके से स्टेम सेल को पैबस्त किया गया। शोध के दौरान पाया गया कि चूहों में स्टेम सेल की वजह से खोई हुई रोशनी वापस आ गई।

कार्निया में हो चुका है स्टेम सेल का प्रयोग
आंखों की बाहरी परत कार्निया में होने वाले डैमेज को कंट्रोल करने के लिए पीजीआई में पहले से स्टेम सेल का प्रयोग होता रहा है, लेकिन रेटिना में अभी तक इसका प्रयोग नहीं हुआ था। अगले कुछ समय में पीजीआई मेें मरीजों पर इसका भी प्रयोग शुरू हो जाएगा।

क्या है यह बीमारी
आंखों की रोशनी जाने से संबंधित प्रमुख बीमारियों में से एज रिलेटेड मैक्यूलर डिजीज भी एक है। इससे मरीज को दिखना बंद हो जाता है। इसमें सबसे पहले सेंट्रल विजन खत्म होता है और रेटिना के मैक्युला में रक्त कोशिकाओं में भी लीकेज हो जाती है। इस वजह से तस्वीर बनाने वाले मैक्युला पर इसका असर पड़ना शुरू हो जाता है। नतीजतन, रोशनी चली जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी अन्य प्रमुख वजह जेनेटिक डिसआर्डर और हाई कोलेस्ट्राल भी हो सकती हैं।

कैसे होता था इलाज
अभी तक इस बीमारी को दूर करने के लिए ब्लड वैसल्स की लीकेज को लेजर विधि से बंद कर दिया जाता था, जबकि एक अन्य तरीके से ब्लड वैसल्स के मॉलीक्यूल को बनाने वाली एंटी बॉडीज को शरीर में इंजेक्शन के माध्यम से दिया जाता था।

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