शिकायत करने में आगे, पैनल भेजने में पीछे

Chandigarh Updated Sun, 15 Jul 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। यूटी प्रशासन में अपने अफसरों को 60 फीसदी पद और महत्वपूर्ण विभाग देने की लगातार शिकायत करने वाला पंजाब, दरअसल यहां तैनाती के लिए अफसरों का पैनल देने में हमेशा पीछे रहता है। इसका नतीजा होता है कि चंडीगढ़ प्रशासन के कई पद खाली पड़े रहते हैं और उन विभागों को काम दूसरे राज्यों के अफसरों को अतिरिक्त रूप से दे दिया जाता है।
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पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने नार्दर्न जोनल काउंसिल की बैठक में चंडीगढ़ प्रशासन में अफसरों के 60:40 अनुपात को भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताकर गृहमंत्री तक को प्रभावित कर लिया। लेकिन, पंजाब सरकार की ओर से चंडीगढ़ प्रशासन में प्रतिनियुक्ति पर अधिकारियों को भेजने में जिस तरह से लेटलतीफी की जाती है, उससे चंडीगढ़ प्रशासन चाह कर भी इस अनुपात को मेंटेन नहीं कर पा रहा है। पंजाब सरकार की इस देरी के कारण ही कुछ महीनों पर पंजाब के एक आईएएस का पद काफी दिनों तक यूटी काडर की अधिकारी के पास रहा।
सबसे बड़ी दिक्कत तो यह है कि पंजाब से जो अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर आते भी हैं, वे कुछ समय बाद ही अपने मूल राज्य में लौटने की इच्छा जाहिर कर देते हैं, जिससे प्रशासन को दोबारा से पैनल आने का इंतजार करना पड़ता है।
चंडीगढ़ प्रशासन ने संयुक्त वित्त सचिव और पीसीएस अधिकारी एसएस खारा को लगभग दो महीने पहले रिलीव किया गया था। खारा ने प्रशासन में ज्वाइन करने के कुछ दिनों बाद ही मूल राज्य जाने की इच्छा जता दी थी। चंडीगढ़ प्रशासन ने खारा की जगह पीसीएस अधिकारी का पैनल पंजाब सरकार से मांगा है। लेकिन, अभी तक पैनल नहीं आया है। खारा के पास जो विभाग से उन्हें अलग अलग अधिकारियों के बीच बांटा गया है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। पीसीएस अधिकारी पंजाब लौट जाते हैं और उनकी जगह दूसरे अधिकारी का पैनल ही नहीं भेजा जाता है।
नगर निगम के संयुक्त आयुक्त राजीव गुप्ता ने कुछ महीनों पहले ही ज्वाइन किया है और उनके ज्वाइन करने के बाद ही पंजाब सरकार ने उन्हें वापस बुला लिया था। हालांकि प्रशासन ने उन्हें रिलीव नहीं किया है और स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी जगह पीसीएस अधिकारियों का पैनल नहीं आएगा तब तक उन्हें रिलीव नहीं किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ में पीसीएस के 12 और एचसीएस के 9 पद स्वीकृत हैं। इनमें से पीसीएस के तीन पद अभी खाली हैं। प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि पंजाब सरकार की ओर से पीसीएस अधिकारियों का पैनल न भेजे जाने के कारण ही तीन पीसीएस के पद खाली हैं। ऐसे में 60:40 अनुपात को मेंटेन नहीं किया जा सकता है।
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