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सब बेकसूर तो गलती किसकी?

Chandigarh Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। सेक्टर-16 के जनरल अस्पताल में लक्ष्मी की डिलीवरी वार्ड में बेड पर होने के मामले में अस्पताल प्रबंधन ने सबको क्लीन चिट दे दी। जांच करने वाली डॉक्टर ने अस्पताल प्रशासन को सौंपी रिपोर्ट में किसी को इस मामले में दोषी नहीं ठहराया। हालांकि परिजन इस जांच से संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने इसकी जांच बाहरी अस्पताल के डॉक्टरों के पैनल से करवाने की मांग की।
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जिस गाइनी विभाग में ऐसा संवेदनहीन मामला हुआ उसी विभाग की प्रमुख डॉ. नीरा को प्रशासन ने मामले की जांच का जिम्मा सौंपा था। सूत्रों के मुताबिक डॉ. नीरा ने अस्पताल प्रशासन को शुक्रवार को रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट में स्टाफ नर्स से लेकर डॉक्टर और वहां तैनात अन्य किसी भी कर्मचारी को दोषी नहीं पाया गया है। रिपेार्ट के मुताबिक पीड़ित से लेकर वहां मौजूद नर्स और डॉक्टर से बात की गई, जिसमें सामने आया कि महिला का उचित उपचार किया गया है। महिला को डिलीवरी के बाद ओटी ले जाया गया और उपचार व साफ सफाई की गई। हालांकि महिला के पति शैलेश का कहना है कि उन्हें अस्पताल प्रशासन की इस जांच पर ही भरोेसा नहीं है।

प्रशासन ने लिया दूसरे अस्पताल से मशविरा
सूत्रों के मुताबिक इस मामले में यूटी प्रशासन के एक आला अधिकारी ने जीएमसीएच के एक वरिष्ठ डॉक्टर से राय ली है। प्रशासन इस मामले में चिकित्सकीय पहलू पर अधिक जानकारी चाहता है, ताकि इसकी सच्चाई सामने आ सके।
यह था मामला
बुधवार तड़के मनीमाजरा निवासी लक्ष्मी की डिलीवरी अस्पताल में बेड पर हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि दो दिन तक सरकारी अस्पताल में धक्के खाने के बाद भी डॉक्टरों और स्टाफ ने गौर नहीं किया। यही नहीं परिजनों ने आरोप लगाया था कि मृत बच्चे को पांच घंटे तक उसकी मां के बेड के नीचे ही पड़ा रहने दिया गया।
इतनी खामियां फिर भी क्लीन चिट
- मरीज अस्पताल पहुंची, लेकिन ओटी की बजाए बेड पर ही डिलीवरी हो गई। महिला को डिलीवरी से पहले लेबर पेन के चलते ओटी तक ले जाया गया था, लेकिन वहां पर पहले से एक मरीज के मौजूद होने पर वापस आना पड़ा था। क्या वहां मौजूद स्टाफ महिला को लेबर पेन होने के बाद आब्जर्व नहीं कर रहा था?
- लेबर पेन के बाद जब मरीज बेड पर वापस आ गई तो उसे डॉक्टर या नर्स ने क्यों नहीं लेबर रूम तक चलने को कहा?
- अस्पताल प्रशासन के मुताबिक वार्ड में डॉक्टर से लेकर नर्स तक मौजूद थे। बावजूद इसके बेड पर ही डिलीवरी होने की जानकारी नर्स को सिक्योरिटी गार्ड अनीता ने दी।
- डिलीवरी के बाद मृत बच्चे को मॉर्चरी में क्यों नहीं रखा गया? क्यों मां के बेड के नीचे बच्चे का शव घ्ंाटों रखकर उसकी भावनाओं को तड़पाया गया?
- अगर गर्भ में ही बच्चे की मौत का पता सोमवार को चल गया था, तो जनरल अस्पताल में उसे मंगलवार को क्यों दाखिल किया गया?

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