ठेके की नर्स पर फोड़ा लापरवाही का ठीकरा

Chandigarh Updated Fri, 13 Jul 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। मृत नवजात बच्चे का शव मॉर्चरी में न रखकर मां के बेड के नीचे पड़ा रहने देने के मामले में जनरल अस्पताल प्रशासन ने वीरवार को ठेके पर काम करने वाली एक नर्स को नौकरी से निकाल दिया। प्रशासन की शुरुआत जांच के अनुसार गाइनी वार्ड में तैनात नर्स गुरकीरत ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी न तो किसी डॉक्टर को दी और न ही नर्सिंग इंचार्ज को। यही नहीं जब लक्ष्मी की बेड पर डिलीवरी हुई तो उक्त नर्स ने उसे लेबर रूम तक ले जाने की जहमत नहीं उठाई। इस पूरे मामले की जांच गाइनी विभाग की हेड डॉ. नीरा कर रही हैं। वे अगले दो दिन में अस्पताल प्रशासन को अपनी रिपोर्ट सौंप देंगी।
वीरवार को डॉ. नीरा ने विभाग में तैनात नर्सों और डॉक्टरों से पूछताछ की। हालांकि पीड़ित परिजनों से उन्होंने अभी तक पूछताछ नहीं की है। पीड़ित महिला के पति शैलेश ने बताया कि उनकी पत्नी से मिलने डॉक्टर आए थे, लेकिन वह बयान देने की स्थिति में नहीं है। इसलिए उन्होंने लिखित रूप में पूरी जानकारी डॉक्टरों को दी है।
नर्स के खिलाफ पहले भी थी शिकायतें
जिस नर्स को लक्ष्मी के मामले में अस्पताल प्रशासन ने निकाल दिया उसके खिलाफ पहले भी मरीजों और स्टाफ ने शिकायत की थी। प्रबंधन का कहना है कि उक्त नर्स मरीजों के साथ सही व्यवहार नहीं करती है।
यह था मामला
मनीमाजरा की लक्ष्मी के गर्भ में ही आठ माह के बच्चे की मौत हो गई थी। जनरल अस्पताल के डॉक्टर इसके बावजूद भी उसे दो दिन तक डिलीवरी के लिए दौड़ाते रहे। मंगलवार दोपहर बाद उसे दाखिल तो किया गया, लेकिन डिलीवरी नहीं कराई। बुधवार तड़के तीन बजे लक्ष्मी ने गाइनी वार्ड के बेड नंबर 11 पर मृत बच्चे को जन्म दिया। उस समय वहां न तो कोई डॉक्टर था और न ही कोई नर्स। डिलीवरी के बाद नर्सों ने मरीज की साफ सफाई नहीं की और न ही मृत बच्चे को हटाया। महिला की सास को ही लक्ष्मी का ‘प्राथमिक उपचार’ करना पड़ा और सुबह आठ बजे तक (पांच घंटे) बच्चे का शव लक्ष्मी के बेड के नीचे पड़ा रहा।
सूत्रों के मुताबिक घटना के समय नर्स गुरकीरत, एक गार्ड और सफाई करने वाली एक अन्य महिला वार्ड में थी। हालांकि इसके बाद वार्ड में नर्सिंग की छात्राओं समेत कई नर्सों की ड्यूटी लगा दी गई।
डीएमएस ने ली नर्सों की क्लास
उपचिकित्सा अधीक्षक डॉ. जी दीवान ने ट्रेनी नर्सों की जमकर क्लास ली। उन्होंने सबको सही ढंग से काम करने और मानवीय दृष्टिकोण से मरीजों की देखरेख करने की नसीहत दी।
इन सवालों के जवाब भी चाहिए
- जब डॉक्टर ने दवा दी तो साफ है कि उसे मरीज की हालत की जानकारी थी। फिर सिर्फ ठेके पर काम करने वाली नर्स पर ही क्यों कार्रवाई हुई?
- मनीमाजरा के सरकारी अस्पताल से महिला को जनरल अस्पताल क्यों रेफर किया गया, जबकि इस अस्पताल में गाइनी का पूरा विभाग है और डिलीवरी तक होती है?
- दो दिन तक जनरल अस्पताल में बार बार वही जांच क्यों करवाई गईं, जो मनीमाजरा के सरकारी अस्पताल में पहले से हो चुकी थी।
- मरीज को दो दिन से सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटती रही। ऐसे में क्या मनीमाजरा और जनरल अस्पताल के डॉक्टर जिम्मेदार नहीं हैं?

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