दलीलें नहीं, सुखना को पानी दें

Chandigarh Updated Wed, 11 Jul 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। हाईकोर्ट के सख्त रुख से सूखती सुखना लेक के फिर पानी से लबालब होने की उम्मीद जग गई। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने झील के लिए आसपास के सभी प्राकृतिक जल बहावाें से पानी का रास्ता खोलने के लिए निर्देश दिए हैं। अदालत ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन की जिम्मेदारी तय करते हुए तीन सौ मजदूराें को एकसाथ काम पर लगाने को कहा है।
मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान कार्यवाहक चीफ जस्टिस जसबीर सिंह और जस्टिस आरके जैन पर आधारित खंडपीठ ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को सौ-सौ मजदूर काम पर लगाने के निर्देश दिए हैं। चार जेसीबी मशीनें भी काम में लगाई जाएंगी, जिसमें दो पंजाब और दो हरियाणा सरकार मुहैया करवाएगी। खंडपीठ ने अगली सुनवाई में एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करने के भी निर्देश दिए हैं। सुनवाई 20 जुलाई को होगी।
मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ का रवैया तल्ख दिखा। कार्यवाहक चीफ जस्टिस ने कहा कि सुखना के लिए प्रशासन और दोनों राज्य आजतक एक्सपर्ट कमेटी की बैठकाें की दुहाई देते रहे। दूसरी तरफ कांसल नदी और फॉरेस्ट एरिया से झील के लिए जाने वाले अन्य प्राकृतिक बहाव अतिक्रमण के कारण बंद होते रहे। आज स्थिति यह है कि महज कुछ मीटर में ही पानी शेष बचा है। मामले की सुनवाई के दौरान यूटी के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल संजय कौशल ने एक्सपर्ट कमेटी की बैठक और सुखना से गाद निकालने के काम का ब्यौरा हाईकोर्ट में पेश करना चाहा, लेकिन खंडपीठ ने कोई दलील सुनने से इनकार कर दिया। इसके अलावा एमिकस क्यूरी तनु बेदी की दलीलाें और सुझावाें को भी कोर्ट नहीं सुना। खंडपीठ ने कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि अब समय दलीलाें को सुनने का नहीं रह गया है। सुखना पूरी तरह सूखने के कगार पर है और प्राकृतिक जल बहावाें को बरसात के रहते नहीं खोला गया, तो आगामी मौसम में सुखना का आस्तित्व खत्म हो जाएगा। उन्होंने दोंनो राज्यों और यूटी प्रशासन को तत्काल कांसल नदी की सभी रुकावटें खोलने के लिए मजदूरों की तत्काल तैनाती के निर्देश जारी कर दिए। हाईकोर्ट ने कहा कि उन सभी पानी के स्रोतों को खोलने के लिए मशीनाें का सहारा लिया जाए, जो निर्माण कार्यों के भारी डंपिंग की वजह से बंद पड़े हैं।
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कांसल नदी समेत 5000 हेक्टेयर फोरेस्ट एरिया से है प्राकृतिक जलबहाव
हाईकोर्ट के निर्देशाें के बाद गठित टेकिभनकल कमेटी ने हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट दी है कि सुखना झील के लिए कांसल नदी के अलावा पांच हजार हेक्टेयर फॉरेस्ट एरिया में सैकड़ों जल बहाव हैं, जहां से सुखना झील के लिए पानी बहता है। कई स्रोत डंपिंग के कारण बंद हुए हैं, जिन्हें खोलना जरूरी है। सनद रहे कि हाईकोर्ट ने सुखना के अस्तित्व के खतरे में आने के बाद खुद संज्ञान लिया था। इसके बाद दोनों राज्याें और यूटी प्रशासन को नोटिस जारी जवाब-तलब किया था। मामले में हाईकोर्ट द्वारा गठित एमिकस क्यूरी तनु बेदी भी रिपोर्ट पेश कर चुकी हैं। सूखती सुखना के दर्द को अमर उजाला ने भी प्रमुखता से उठाया है।

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