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दागी डाक्टरों पर कार्रवाई के लिए कमेटी बनी

Chandigarh Updated Mon, 02 Jul 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। आमिर खान के सत्यमेव जयते कार्यक्रम में कुछ डाक्टरों के नैतिक मूल्यों को तार-तार करते दिखाने के बाद मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने दागियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की पुख्ता तैयारी कर ली है। एमसीआई पुराने कानूनों को दरकिनार करते हुए दागी डॉक्टरों पर कार्रवाई के लिए नई गाइडलाइंस बना रहा है। इसके लिए काउंसिल ने बाकायदा चार सदस्यों की कमेटी का गठन भी कर दिया है, जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट काउंसिल के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरपर्सन को सौंपेगी। इस बात की जानकारी चेयरपर्सन प्रो. केके तलवार ने अमर उजाला को दी।
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प्रो. तलवार ने बताया कि जल्द ही ऐसे डॉक्टरों को कड़ी सजा मिलेगी, जो मेडिकल एथिक्स का पालन नहीं करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया इसके तहत ऐसी भी योजना है कि जो डॉक्टर मेडिकल पेशे की पवित्रता के खिलाफ पकड़ा गया उसकी काउंसिल की ओर से हमेशा के लिए सदस्यता तक रद की जा सकती है। ऐसे में प्रभावित डॉक्टर कभी भी मरीजों का इलाज नहीं कर सकेगा। वह कहते हैं कि डॉक्टरों के लिए काउंसिल में पहले से गाइडलाइंस बनी हैं, लेकिन उनको और प्रभावशाली बनाने के लिए काउंसिल की एथिक्स कमेटी को नए नियम बनाने की जिम्मेदारी साैंपी गई है। हालांकि प्रो. तलवार ने बताया कि काउंसिल ने यह कदम आमिर खान के सत्यमेव जयते से पहले लिया था, लेकिन इसमें तेजी इस कार्यक्रम के बाद आई।
सत्यमेव जयते के अपने एपिसोड के बारे प्रो. तलवार ने पहली बार अमर उजाला को बताया कि जब आमिर खान ने शो में उनके सामने सूचना के अधिकार के तहत ली गई तमाम जानकारियों को पेश किया तो वास्तव में वह भौचक्के रह गए। उनको इस तरह की पूरी जानकारी पहले नहीं थी। हालांकि शो से पहले प्रो. तलवार से जब सत्यमेव जयते की टीम ने संपर्क किया था उन्होंने यह जानने की कोशिश जरूर की थी कि पैटर्न क्या होगा। प्रो. तलवार ने बताया कि उनको आमिर की टीम से कोई जानकारी ही नहीं मिली। उन्होंने स्वीकार किया कि जो भी चिकित्सा जगत में दिक्कतें आ रही हैं उनको दूर करना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि अगर उनके साथ कहीं कोई अन्याय हो रहा हो तो वह एमसीआई से संपर्क कर सकते हैं।
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पीजी कोर्सेज में बढ़ीं सीटें
प्रो. तलवार ने बताया कि दो साल में मेडिकल में पीजी करने वाले छात्रोें की संख्या तकरीबन दो गुनी हो गई है। पहले जहां एक साल में 13 से 14 हजार छात्र पीजी करते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़ कर 23 हजार पहुंच गई है। प्रो. तलवार का कहना है कि जल्द ही यह संख्या और बढ़ेगी।
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पंजाब में मैक्स का पीपीपी फार्मूला बेहतर
मैक्स हॉस्पिटल की कार्डियोकॉन में पहुंचे प्रो. तलवार ने बताया कि पंजाब में मैक्स हॉस्पिटल ने मरीजों के बेहतर इलाज के लिए पंजाब सरकार के साथ मिलकर अच्छा काम करना शुरू किया है। वह कहते हैं कि इस माध्यम से मरीजों को एक तो सस्ता इलाज मिलता है। अच्छे डॉक्टरों और देश के प्रमुख विशेषज्ञों की देखरेख में मरीजों को इलाज मिलना बड़ी बात है। इस दौरान मैक्स हॉस्पिटल के महाप्रबंधक डॉ. आशुतोष सूद ने बताया कि उनकी कोशिश है कि वह पूरे पंजाब में मरीजों को कम कीमत पर बेहतर इलाज करें। इसके लिए पंजाब सरकार कीओर से मदद भी मिल रही है।

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तीन सौ बेड वाले अस्पताल बनेंगे मेडिकल कॉलेज
यूपी और उत्तराखंड के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को मिल सकेगा लाभ
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रपोजल को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी मंजूरी
एमसीआई के चेयरमैन प्रो. केके तलवार ने अमर उजाला से बातचीत में दी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। यूपी और उत्तराखंड समेत देश के कुछ प्रदेशों में चल रहे तीन सौ बेड के सरकारी या प्राइवेट अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज में बदला जा सकेगा। इसके लिए ऐसे अस्पताल के संचालकों या प्रदेश सरकार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया में आवेदन करना होगा। इस बात की जानकारी मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन प्रो. केके तलवार ने अमर उजाला को दी।
प्रो. तलवार रविवार को शहर में मैक्स हॉस्पिटल द्वारा आयोजित कार्डियोकॉन (सीएमई) में शिरकत करने पहुंचे थे। प्रो. तलवार ने बताया कि देश में हर साल साठ हजार मेडिकल स्नातक निकलने चाहिए, लेकिन इस वक्त यह संख्या तकरीबन चालीस हजार के करीब है। इसलिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की सिफारिश पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मेडिकल स्नातक की संख्या को और बढ़ाने के लिए इसको मंजूरी दे दी है। प्रो. तलवार ने बताया कि इस नई योजना के तहत उन अस्पतालों को शामिल किया गया है जहां पर तीन सौ मरीजों को दाखिल कर इलाज करने की क्षमता है। इसके तहत ऐसे अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज में बदलवाने के लिए एमसीआई या स्वास्थ्य मंत्रालय से संपर्क करना होगा। प्रो. तलवार ने स्पष्ट किया इसमें वही अस्पताल आवेदन कर सकेंगे जो अस्पताल परिसर या उसके दस किलोमीटर के दायरे में कॉलेज की बिल्डिंग को बनवा सकें। इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार तथा उत्तराखंड और उड़ीसा समेत कुछ अन्य राज्यों को चुना है। एमसीआई चेयरमैन प्रो. तलवार ने बताया कि जिन जिलों में पहले से दो मेडिकल कॉलेज होंगे वहां पर इस सुविध का लाभ तीन सौ बेड वाले अन्य अस्पतालों को नहीं मिल सकेगा।
वहीं एमसीआई एक महत्तवपूर्ण योजना बना रही है कि अब देश के सभी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी अनुदान दिया जाए, ताकि उन पर सरकार का जोर रहे और छात्रों को सस्ती चिकित्सा शिक्षा मिल सके। प्रो. तलवार ने बताया कि पीजीआई और एम्स जैसे प्रमुख चिकित्सा संस्थान में पीजी क्लॉसेज के लिए सालाना एक हजार रुपये फीस है जबकि दक्षिण भारत के कई मेडिकल कॉलेजों में उन्होंने पाया कि दस से पंद्रह लाख रुपये सालाना वसूला जा रहा है। इसको एक समान बनाने के लिए सरकार ऐसा कदम उठाने की योजना बना रही है।

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