पहले से ही तय था बाहर से होगा कुलपति

Chandigarh Updated Sun, 01 Jul 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। न किसी मंत्री की चली और न ही सीनेट के अलग-अलग गुटों का दबाव काम आया। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के अगले कुलपति को लेकर पिछले कुछ महीनों से हो रही राजनीति को देखते हुए ही कुलाधिपति की ओर से गठित सर्च कमेटी ने पहले से ही पीयू के बाहर के योग्य शिक्षक को कुलपति नियुक्त करने की सिफारिश करने का मन बना लिया था।
वीरवार शाम को कमेटी ने कुलाधिपति और देश के उप-राष्ट्रपति को जब अपनी रिपोर्ट सौंपी तो उसमें भी यही सिफारिश की गई कि पीयू के बाहर के शिक्षक को ही कुलपति नियुक्त किया जाए। ऐसा करके ही पीयू को बचाया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यहां तक कह दिया कि अगर पीयू के ही किसी शिक्षक को कुलपति बनाया जाता है तो वह सीनेट सदस्यों के हाथों में खेलेंगे और इससे पीयू को नुकसान होगा। ध्यान रहे कि इंटरव्यू के लिए पीयू के बाहर के तीन प्रोफेसर आए थे।
पीयू के अगले कुलपति के चयन के लिए जब सर्च कमेटी बनी थी तभी से सीनेट सदस्यों के अलग-अलग गुटों ने अपनी पसंद के उम्मीदवार को कुलपति नियुक्त कराने के लिए जोर-आजमाइश शुरू कर दी थी। इसके लिए उन्होंने कुछ केंद्रीय मंत्रियों तक का सहारा लिया, लेकिन इस दबाव का असर सिर्फ इतना रहा कि सर्च कमेटी ने इंटरव्यू के लिए इन सीनेट सदस्यों की पसंद के कुछ उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुला लिया।
पीयू से जिन छह शिक्षकों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था उनमें से दो सीनेट सदस्य भी हैं। इनमें से एक सदस्य सर्च कमेटी के एक सदस्य का करीबी बताया जाता है। इंटरव्यू के लिए बुलाए गए एक शिक्षक को सीनेट के एक गुट का समर्थन मिला था और एक केंद्रीय मंत्री भी उनके लिए लॉबिंग कर रहे थे। मौजूदा कुलपति प्रो.आरसी सोबती के कार्यकाल में पिछले कुछ महीनों से कुलाधिपति कार्यालय में कई ऐसी शिकायतें पहुंचीं थीं जिससे पीयू में बढ़ रही राजनीति की बात स्पष्ट हुई थी। यही वजह है कि कुलाधिपति ने सर्च कमेटी में सीनेट सदस्य आईएस चड्ढा को भी शामिल किया था।

भाग्य ने दिया कमेटी का साथ
पीयू के अगले कुलपति को लेकर काफी समय से राजनीति हो रही थी। मुझे भी इस राजनीति में घसीटा जा रहा था और बदनाम करने की कोशिश की जा रही थी। लेकिन, हमने सबको झूठा साबित कर दिया। मैं तो यही कहूंगा कि भाग्य ने हमारा साथ दिया और हमें कुलपति पद के लिए एक ऐसा योग्य व्यक्ति मिल गया जो पीयू से ही संबंधित था। हम ऐसे व्यक्ति की तलाश में थे जो पीयू को जानता हो। प्रो.ग्रोवर पीयू से पढ़े भी थे और पढ़ाया भी था। हमें खुशी है कि प्रो.ग्रोवर टीआईएफआर जैसे नामी संस्थान को छोड़कर पीयू आने के लिए तैयार हो गए हैं। कमेटी ने प्रो.ग्रोवर के अलावा जिन दो अन्य नामों को शार्टलिस्ट किया है, उसका खुलासा नहीं किया जा सकता है। कमेटी के लिए यह गर्व की बात है कि कुलाधिपति ने हमारी सिफारिश को माना और रिपोर्ट देने के कुछ घंटों बाद ही अगले कुलपति की नियुक्ति कर दी।
-आईएस चड्ढा, सदस्य सर्च कमेटी और सीनेट सदस्य

बाक्स....

संगीत को मिलेगा बढ़ावा
पीयू में संगीत को बढ़ावा मिल सकता है। पीयू के अगले कुलपति शास्त्रीय संगीत के शौकीन हैं। फेसबुक पर उनके किसी मित्र ने यह लिखा है कि प्रो.ग्रोवर को शास्त्रीय संगीत सुनना अच्छा लगता है। प्रो.ग्रोवर के ससुराल पक्ष में संगीत से जुड़े कई लोग हैं। उनकी पत्नी मुंबई में संगीत की प्रोफेसर हैं तो साली एमसीएम कालेज में संगीत विभाग की प्रमुख हैं।

चुनौतीपूर्ण होगा कार्यकाल
पीयू के अगले कुलपति प्रो.अरुण ग्रोवर के लिए तीन साल का कार्यकाल चुनौती से भरा होगा। प्रो.ग्रोवर भी खुद मानते हैं कि उनके लिए यह पद चुनौती से भरा होगा। प्रो.ग्रोवर हालांकि पीयू से परिचित हैं लेकिन इसके बाद भी सीनेट और सिंडीकेट में जिस तरह से कुलपति को घेरने की कोशिश की जाती है, उसका सामना करना उनके लिए आसान नहीं होगा। नए कुलपति को सीनेट के दोनों गुटों को साथ लेकर चलना होगा। हालांकि नवंबर में नई सीनेट का गठन होना है और यह उसके बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि सीनेट की क्या रूपरेखा होगी।
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