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सीएचबी की ‘उदारता’ का फायदा वायलेशन हटाने के बाद ही मिलेगा

Chandigarh Updated Sun, 01 Jul 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने घरों में जिन 52 जरूरी परिवर्तनों की मंजूरी दी है, उसका फायदा महज दस फीसदी मकान मालिकों को मिल सकेगा। इसके अलावा इन परिवर्तनाें की मंजूरी के लिए छह माह की समयसीमा को भी सीएचबी फेडरेशन ने बहुत कम मानते हुए बोर्ड के फैसले को झुनझुना करार दिया है। इसलिए मकान मालिकों के फेडरेशन रविवार को किए जा रहे प्रदर्शनों को जारी रखने का ऐलान कर दिया है।
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दरअसल सीएचबी ने शुक्रवार रात की बैठक में जो नीड बेस्ट चेंजेज की अनुमति दी है, जल्द ही वे हाउसिंग बोर्ड की वेबसाइट पर दिखाई देंगे। फासवेक ने छह माह की समय सीमा तय करने को मकानमालिकों के साथ धोखा करार दिया है। शहर में इस समय 48 हजार हाउसिंग बोर्ड के मकान है जिनमे लाखों लोग परिवार के साथ रहते है।
क्या है पेच
हाउसिंग बोर्ड ने मकानों में 52 बदलाव करने की मंजूरी तो दी है, लेकिन इस मंजूरी के लिए आवेदक को नक्शा बोर्ड से पास करवाना होगा। अगर किसी ने इन संशोधनों से ज्यादा बदलाव किए हैं, जिन्हें बोर्ड ने वायलेशन करार दिया हुआ है तो उनके नक्शे पास नहीं किए जाएंगे। आवेदक जब वायलेशन हटा लेगा तो बोर्ड जरूरी चेंज करने की मंजूरी देगा। ये दिक्कत इसलिए आनी है क्योंकि हजारों मकान ऐसे हैं जिनमें पहले से ही इन 52 बदलावों से काफी ज्यादा चेंज मालिकों ने कर लिए हैं।
मौजूद स्थिति के अनुसार करें रेगुलराइज
सीएचबी फेडरेशन के चेयरमैन प्रोफेसर निर्मल दत्त का कहना है कि इन नीड बेस्ड चेजेंज के लिए मंजूरी देने से शहर के सिर्फ 10 प्रतिशत मकानों को ही राहत मिलेगी। उनका कहना है कि बोर्ड से यह मांग की जा रही है कि जिस स्थिति में भी लोगों ने इस समय बदलाव कर लिए हैं, उन सभी बदलावों को मंजूरी दी जाए तभी लोगों को राहत मिलेगी। निर्मल दत्त का कहना है कि रविवार शाम को वह अपनी मांगों को लेकर सेक्टर-56 में प्रदर्शन करने जा रहे है। फे डरेशन के प्रेस सचिव रजत मल्होत्रा का कहना है कि इन नीड बेसिस चेजिंज बदलाव से लोगों का लक्ष्य पूरा नहीं होता है। उनका कहना है कि इस समय हाउसिंग बोर्ड में रहने वाले लोग ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उस समय लोग राहत महसूस करते जब हाउसिंग बोर्ड द्वारा वायलेशन के जो नोटिस भेजे गए हैं, उन्हें वापस लेने के बारे में कोई निर्णय जाता।

किस तरह बरामदे में बनेगा कमरा
फासवेक के चेयरमैन पीसी सांघी का कहना है कि नीड बेस्ड चेंजेज के लिए बोर्ड द्वारा छह माह का कार्यकाल ही तय किया गया है, यह समय काफी कम है। उनका कहना है कि पिछले बरामदे में 10 फूट जगह छोड़कर कमरा बनाने की मंजूरी है, जबकि बरामदे में जगह ही काफी सीमित होती है।
फासवेक के पूर्व महासचिव हितेश पुरी का कहना है कि यह समय कम से कम एक साल होना चाहिए।

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