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फिजिक्स विभाग में झूमे प्रोफेसर

Chandigarh Updated Sat, 30 Jun 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। अक्सर अपने कमरे या लैब में व्यस्त रहने वाले प्रोफेसर कभी फोन पर बधाई ले रहे थे, तो कभी बधाई दे रहे थे। शुक्रवार को पीयू के फिजिक्स विभाग के होनहार स्टूडेंट और प्रोफेसर ने इसी यूनिवर्सिटी का वीसी बनकर सभी का मान बढ़ा दिया, इस बात की खुशी में फिजिक्स प्रोफेसर झूम रहे थे। पीयू के 12वें वीसी चुने गए प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर का पीयू के फिजिक्स विभाग से गहरा नाता रहा है। 1968 से 72 तक बीएससी और एमएससी के अलावा उन्होंने यहां पर 1991-94 तक प्रोफेसर के तौर पर पढ़ाया भी है। दोपहर बाद जैसे ही उनके वीसी बनने के खबर पहुंची तो हर कोई उनके साथ बिताए लम्हों को याद करने लगा।
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मेरा यार बन गया वीसी
फिजिक्स विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. मनमोहन गुप्ता की खुशी देखते ही बनती थी। उन्होंने बताया कि उसने बीएससी और एमएससी प्रो. अरुण के साथ ही पीयू के इसी विभाग से की है। उनका दोस्त बहुत ही मिलनसार व्यक्ति हैं। कई बार प्रो. मनमोहन और प्रो. अरुण पीयू के हॉस्टल में इकट्ठे पढ़ते थे। प्रो. अरुण के साथ पीजी रिसर्च प्रोजेक्ट करने वाले और फिजिक्स विभाग के डा. नवदीप गोयल बीते दिनों को याद करते हुए कहते हैं कि ग्रोवर सर के साथ बीते दिन हमेशा ही यादगार रहे हैं।

गुरु का वीसी बनना सम्मान की बात
प्रो. अरुण ग्रोवर के पीयू में रहते हुए डा. एमएल वर्मा ने उनके अधीन पीएचडी की थी। एसडी कालेज में कार्यरत डा. वर्मा ने कहा कि उनके गुरु का पीयू वीसी बनना उनके लिए बहुत ही सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि प्रो. ग्रोवर के पढ़ाने का तरीका बहुत ही खास था। प्रो. अरुण की लैब को संभाल रहे प्रो. केपी सिंह ने कहा कि पूरे फिजिक्स विभाग के लिए आज का दिन यादगार बन गया है।

शिष्य ने बढ़ा दिया मेरा मान
2000 से 2006 तक पीयू के कुलपति रहे प्रो. केएन पाठक के लिए शुक्रवार का दिन यादगार बन गया। उनका स्टूडेंट ही आज पीयू का नया कुलपति बना है। प्रो. पाठक ने कहा कि प्रो. अरुण एक बहुत ही मेहनती स्टूडेंट और अनुशासित शिक्षक रहे हैं। प्रो. पाठक ने कहा कि उन्हें बीएससी करते हुए ही अरुण की प्रतिभा का ज्ञान हो गया था। उन्होंने ही तत्कालीन वीसी आरपी भांभा को प्रो. अरुण को सीधे विभाग में प्रोफेसर नियुक्त करने की सिफारिश की थी। प्रो. ग्रोवर के एक अन्य शिक्षक प्रो. सत्यप्रकाश तिवारी ने कहा कि उन्हें इस बात का गर्व है कि उन्होंने उन्होंने अरुण को पढ़ाया है। कुछ दिन पहले ही अरुण उनसे मिलने विभाग आए थे।

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