कालका-शिमला रेल मार्ग पर हिमालय क्वीन के सभी कोच हुए सोलर सिस्टम से लैस

Chandigarh Updated Sat, 23 Jun 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। अंबाला रेल मंडल के इंजीनियरिंग विभाग ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जो अब तक रेलवे में पूरे देश में कहीं नहीं हुआ। रेलवे ने कालका से शिमला तक चलने वाली हिमालयन क्वीन एक्सप्रेस के सभी डिब्बों में जनरेटर और बैटरी से चलने वाली सुविधाओं को सोलर ऊर्जा पर कर दिया है। इससे ट्रेन का वजन करीब चार हजार किलो कम हो गया है। अब पहाड़ों पर चढ़ाई के दौरान इंजन में लगने वाले डीजल की काफी बचत होगी। अंबाला मंडल के डिवीजनल इलेक्ट्रिकल इंजीनियर/जनरल आरके गुप्ता ने बताया कि वर्ल्ड हेरिटेज रेल रूट को और ईको फ्रेंडली बनाकर नया तोहफा दिया गया है। पूरे देश में हिमालयन क्वीन ऐसी पहली ट्रेन है, जिसके सभी कोच सोलर सिस्टम से ऑपरेट होंगे।
रेल के डिब्बों में पहले बिजली की व्यवस्था के लिए हर कोच के नीचे जेनसेट लगा होता था। एक बैटरी के अलावा रेग्युलेटर और अल्टरनेटर लगाया गया था। अब सोलर सिस्टम से लैस होने के साथ ही इन सभी उपकरणों को निकालकर प्रत्येक डिब्बे से तकरीबन 535 किलो का बोझ कम कर दिया गया। गुप्ता का कहना है कि इन डिब्बों में अब मोबाइल चार्जर प्वाइंट से लेकर लैपटॉप चार्जिंग स्टेशन और एलईडी लाइटों की व्यवस्था सोलर सिस्टम से की गई है। इंजीनियर गुप्ता का दावा है कि वह अब जल्द ही इस रूट पर कुछ और ट्रेनों को सोलर सिस्टम से लैस करेंगे।

कितना अनोखा है यह प्रयोग
- पहाड़ पर चढ़ाई के दौरान ट्रेन का लगभग चार हजार किलो वजन कम करना सराहनीय है।
- ऐसा करके सालाना तकरीबन अस्सी हजार रुपये का डीजल बचाया जा सकेगा।
-रेलवे ट्रैक की एक उम्र को क्रास टन किलोमीटर में नापा जाता है। जब इस ट्रैक पर कम वजन वाली ट्रेन दौड़ेगी तो रेलवे लाइन की उम्र बढ़ जाएगी।
-वर्ल्ड हेरिटेज रेल रूट पर जनरेटर और बिजली से होने वाला प्रदूषण भी कम होगा।
-इस पूरे सेटअप को तैयार करने में महज सवा लाख रुपये का खर्चा आया है।
-यह सोलर सिस्टम एक बार चार्ज होने पर दो दिन तक बगैर चार्ज किए चल सकता है।

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