ग्रांट न मिलने के कारण नगर निगम के रुक सकते हैं कई प्रोजेक्ट

Chandigarh Updated Fri, 22 Jun 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। नगर निगम द्वारा हवा में तैयार किए गए सालाना बजट का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ेगा। इस वर्ष 380 करोड़ रुपये की ग्रांट कम पड़ने से या तो शहर के भावी प्रोजेक्ट और विकास कार्य प्रभावित होंगे या फिर नगर निगम के फिक्स डिपोजिट का दिवालिया निकल जाएगा। ऐसे में नगर निगम को पैसे-पैसे के लिए मोहताज होते हुए जबरदस्त वित्तीय संकट का सामना करना पड़ेगा। वहीं, लोगों को खस्ताहाल सड़क, पानी किल्लत और जर्जर इमारतों आदि से जूझना पड़ेगा।
सदन में 19 जून को हवा हवाई बजट पर हुई चर्चा के बाद से अब अधिकारी और पार्षद वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और रुकी हुई ग्रांट को प्रशासन से वापस लेने के लिए गंभीरता से विचार करने लग गए हैं। कांग्रेस पार्षदों द्वारा इसी सप्ताह के अंत में केंद्रीय मंत्री पवन बंसल को भी इस स्थिति से अवगत करवाया जाएगा। शनिवार को बंसल दिल्ली से शहर में आ रहे हैं।

360 करोड़ की ग्रांट मिलेगी
प्रशासन ने प्लान बजट में 156 और नान प्लान बजट में 204 करोड़ रुपये की ग्रांट देने की हामी भरी है, लेकिन अभी तक एक रुपया भी नहीं आया है। इस समय तक पहली तिमाही की 91 करोड़ रुपये की ग्रांट मिल जानी चाहिए। नगर निगम ने सदन में कुल 849 करोड़ रुपये का बजट पास किया था। निगम की खुद की आय लगभग 100 करोड़ रुपये है। इस तरह बाकी 389 करोड़ कहां से आएंगे इस बात पर संशय है। पिछले वर्ष भी निगम को महज 23 करोड़ का प्लान बजट मिला था। इस वजह से खर्चा चलाने के लिए निगम 500 करोड़ की एफडी में से 180 करोड़ निकलवा चुका है। इससे 10 करोड़ के ब्याज का नुकसान भी हो चुका है।




इन विकास कार्यों पर संकट के बादल

अटकेंगे पार्किंग स्थल और सड़कों का निर्माण
118.46 करोड़ रुपये की लागत से शहर की प्रमुख सड़कों की कारपेटिंग, नए पार्किंग स्थल, कम्युनिटी पार्किंग, मनीमाजरा की पाकेट नंबर-1 से 11 का विकास किया जाना है। इसके अलावा इसी राशि से पेवर ब्लाक, सब वे, अंडरपास, हाईवे, मनीमाजरा की मोटर मार्केट की अपग्रेेडेशन का काम भी होगा। इस राशि में से 20 करोड़ वी-3 रोड, 15 करोड़ वी-4, 10 करोड़ वी-5 और 15 करोड़ की राशि वी-6 रोड के लिए तय की गई है। बजट कम पड़ने के कारण कई सड़कों की खस्ता हालत नहीं सुधर पाएगी।

कई सेक्टरों की नहीं बुझेगी प्यास
50 करोड़ की राशि कजौली वाटर वर्कर्स के पांचवें, छठे, सातवें और आठवें फेज की स्कीम मेंलिए रखे गए हैं। इससे शहर में पानी की किल्लत दूर होनी है। फंड की कमी के कारण यह प्रोजेक्ट भी अटक सकता है। बजट में 10 करोड़ रुपये की राशि नए ट्यूबवेल और नई पाइप लाइन डालने के लिए निर्धारित की गई है, जिस पर भी संशय है।


सालिड वेस्ट मैनेजमेंट पर भी संकट
52.15 करोड़ रुपये की राशि सालिड वेस्ट मैनेजमेंट और नया स्लाटर हाउस बनाने पर खर्च करने का दावा किया गया था। जब तक स्लाटर हाउस नहीं बनेगा तब मीट बायलाज लागू नहीं हो सकते।

स्कूलों और डिस्पेंसरियों का सुधार लटका
23.90 करोड़ रुपये प्राइमरी स्वास्थ्य और 22.51 करोड़ रुपये प्राइमरी शिक्षा के लिए तय किए गए हैं, जिनमें नए स्कूल और डिस्पेंसरियों में नई सुविधाओं का इजाफा होना है। कई इमारतों की हालत काफी जर्जर है।

ग्रांट मिलेगी तभी निखरेगा शहर
20.30 करोड़ रुपये की लागत से लैंड स्केपिंग और ब्यूटीफिकेशन का काम होना है, जिससे शहर को सिटी ब्यूटीफुल बनाने में सहयोग मिलेगा। 24.40 करोड़ रुपये गांव और कालोनियों के विकास पर खर्च करने के लिए रखे गए हैं। 2.72 करोड़ रुपये फायर और इमरजेंसी सर्विस के लिए बजट में रखे गए है। अगर समय पर ग्रांट नहीं मिलती है तो इन सभी कामों के होने पर भी संशय है।


वर्जन
ग्रांट न मिलना काफी गंभीर विषय है। एक तरफ तो करोड़ों की पिछली ग्रांट रुकी हुई है और वहीं प्रशासन से जितना बजट मिलने की उम्मीद है, उससे सभी काम पूरे होने पर संशय है। कोई न कोई हल निकालना पड़ेगा।
- प्रदीप छाबड़ा, सदस्य, वित्त एवं अनुबंध कमेटी।

एफडी से राशि निकालने से ब्याज का भी नुकसान हो रहा है। एफडी का प्रयोग आपातकालीन स्थिति और बड़े प्रोजेक्टों के लिए होना चाहिए।
- सतीश कैंथ, डिप्टी मेयर।

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