एफडी तोड़कर खर्च चला रहा निगम

Chandigarh Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। प्रशासन ने नगर निगम का करोड़ों रुपये का बजट तो पास कर दिया, लेकिन तीन माह बीतने के बावजूद अब तक इसकी पहली किस्त भी नहीं मिली है। योजना के अनुसार पहली किस्त में 91 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलनी थी, लेकिन समय पर फंड नहीं मिलने के कारण वित्तीय संकट से बचने के लिए मजबूरन एफडी तोड़कर काम चलाना पड़ रहा है। पिछले साल भी निगम को सिर्फ 23 करोड़ रुपये का ही प्लान बजट मिला था। इस वजह से अब तक एफडी से 180 करोड़ रुपये निकलवाए जा चुके हैं। यदि जल्द पर्याप्त ग्रांट नहीं मिली तो निगम का यह फिक्स डिपाजिट जल्द खत्म हो जाएगा और फिर कई तरह के प्लान और नॉन प्लान खर्चों के लिए निगम पूरी तरह आश्रित होकर रह जाएगा।


500 करोड़ की थी एफडी
साल 2012-13 के लिए प्रशासन ने प्लान बजट में 156.60 और नॉन प्लान बजट में 204 करोड़ का फंड पास किया है। अप्रैल से लेकर जून तक पहली किस्त के तौर पर 91 करोड़ रुपये मिलना था, लेकिन अब तक फूटी कौड़ी नहीं मिली। नगर निगम के पास 500 करोड़ रुपये की एफडी थी और इसमें काफी राशि प्रापर्टी बेचकर एकत्र हुई थी, लेकिन समय पर फंड नहीं मिलने के कारण अब एफडी ही तोड़नी पड़ रही है।

एफडी तोड़ने से 10 करोड़ के ब्याज का नुकसान
500 करोड़ की एफडी से नगर निगम को हर साल 40 करोड़ रुपये का ब्याज मिलता है। इससे नगर निगम के कर्मचारियों के वेतन का भुगतान हो जाता है। पिछले साल प्रशासन ने नगर निगम को बजट देने में कंजूसी बरती थी, जिससे नगर निगम अब तक करीब 180 करोड़ रुपये एफडी से निकलवा चुका है और इससे करीब 10 करोड़ रुपये के ब्याज का नुकसान हुआ है। प्रापर्टी टैक्स के रूप में मिलने वाली ग्रांट भी प्रशासन ने रोक दी है, जोकि 43 करोड़ रुपये है। इसके अलावा दिल्ली फाइनेंस कमीशन से मिलने वाली ग्रांट का 251.43 करोड़ भी हाउस टैक्स न लगाए जाने की वजह से रोक रखा है।

पूरी कर दी जाएगी एफडी
नगर निगम के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार, अभी तक बजट की पहली किस्त भी नहीं आई है। अगर एफडी से राशि नहीं निकलवाई जाए तो खर्चा चलाना मुश्किल हो जाएगा। जब बजट आएगा तो एफडी में रुपये जमा करवा दिए जाएंगे। जानकारी के अनुसार, एफडी से राशि निकलवाने का सिलसिला पिछले साल पूर्व मेयर रविंद्र सिंह पाली के कार्यकाल में शुरू हुआ था, लेकिन बजट नहीं मिलने और राशि निकलवाने की जानकारी उस समय के किसी पार्षद को नहीं है। पिछले साल चुनाव होने के कारण भी खूब रुपये खर्च हुए। अब ग्रांट नहीं आने के कारण कई प्रोजेक्टस को लेकर निगम अपनी प्लानिंग नहीं बना पा रहा है।


ऐसे तो खत्म हो जाएगी पूरी एफडी
काफी लंबे प्रयास के बाद 500 करोड़ रुपये एकत्र किए गए थे। अगर ऐसा ही चलता रहा तो दो तीन सालों में यह पूरी राशि खत्म हो जाएगी। अब प्रशासन पर बजट भेजने के लिए दबाव बनाया जाएगा।
- सुभाष चावला, वित्त एवं अनुबंध कमेटी के सदस्य

ग्रांट पर प्रशासन का ध्यान नहीं
प्रशासन करोड़ों रुपये की ग्रांट का हवाला देते हुए शहर में हाउस टैक्स लगाने का दबाव बना रहा है, लेकिन नगर निगम की करोड़ों रुपये की ग्रांट रुकी है, इस पर ध्यान नहीं है।
- सतप्रकाश अग्रवाल, चेयरमैन, हाउस टैक्स कमेटी।

जल्द मिलेंगे अधिकारियों से
इस मामले को लेकर जल्द ही प्रशासन के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। शहर में केंद्र सरकार द्वारा भरपूर बजट दिया जा रहा है ताकि समुचित विकास कार्य हो सके।
- पवन बंसल, केंद्रीय मंत्री

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