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पंजाबियों के दिलों में बसते हैं मेहदी हसन

Chandigarh Updated Thu, 14 Jun 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। उर्दू गजल सम्राट मेहदी हसन के निधन के साथ ही पंजाबियों कीउस लोकप्रिय गायिकी का अंत हो गया जिससे प्रेरणा पाकर जगजीत सिंह जैसे गजल गायक देश को मिले। अपने शुरुआती दौर में मेहदी हसन ने फकीर बुल्ले शाह और ख्वाजा गुलाम फरीद की सूफियाना गजलों को गाकर पंजाबियों के दिलों में ऐसी जगह बनाई थी, जो आज तलक कायम है।
मेहदी हसन भले ही बाद में कराची में रहने लगे हों, लेकिन उनका पहला शौक उर्दू मिक्स पंजाबी में गजल गाना ही था। ‘आपणी कहानी यारो किस नूं सुनावां’ और ‘कुंद मुखड़े तों लाओ यार’ जैसी गजलें गाकर साठ के दशक में सीमा के दोनों ओर के पंजाब में उनकी जगह हर दिल में बन गई थी।
उन्हीं दिनों में मेहदी हसन से प्रेरणा पाकर जगजीत सिंह का गजल गायकी में प्रवेश हुआ था। जगजीत सिंह ने खुद भी कई बार मेहदी हसन को अपने गुरु समान बताया था।
मेहदी हसन जब बहुत बीमार पड़े, तो जगजीत सिंह ने उनकी मदद के लिए पाकिस्तान में जाकर एक कंसर्ट भी किया था। आधुनिक गजल गायकी के बड़े नाम तलत अजीज ने भी मेहदी हसन की गायकी की परंपरा को आगे
बढ़ाया था।

पंजाबी सभ्याचार में मेहदी का बड़ा योगदान
मैं मेहदी हसन को पंजाबी सभ्याचार के सबसे करीब का गजल गायक मानता हूं। उन्होंने गजल गायकी का जो स्टाइल लिया, वह पंजाबी भाषा और संस्कृति के बहुत करीब था। मुझे उनसे बहुत प्रेरणा मिली और आज भी मैं उनकी गजलें अक्सर सुनता हूं।
-पद्मश्री डॉ. सुरजीत पातर, पंजाबी के प्रख्यात कवि
गज़ल में शुरु की पवित्रता की इंतहा
मेरे लिए मेहदी हसन की गायकी पवित्रता की इंतहा थी। पंजाब की पीढ़ी ने उन्हीं से गजल की प्रेरणा ली। जगजीत सिंह के निधन के बाद मेहदी हसन का जाना मेरे लिए दूसरा बड़ा झटका है।
-हंसराज हंस, सूफी गायक


-योगेश नारायण दीक्षित

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