छत्तीसगढ़ सरकार का एलान- भगवान राम की माता कौशल्या का बनाया जाएगा भव्य मंदिर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Updated Sun, 02 Aug 2020 03:27 PM IST
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छत्तीसगढ़ में बनेगा माता कौशल्या का भव्य मंदिर
छत्तीसगढ़ में बनेगा माता कौशल्या का भव्य मंदिर - फोटो : Twitter

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अयोध्या में एक तरफ जहां राम मंदिर निर्माण के लिए पांच अगस्त को भूमि पूजन की तैयारियां जोरों पर हैं। वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने घोषणा की है कि रायपुर के पास भगवान राम की माता कौशल्या का भव्य मंदिर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि माता कौशल्या के पौराणिक मंदिर को भी संरक्षित किया जाएगा और श्रद्धालुओं के लिए उचित व्यवस्था की जाएगी। 
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भूपेश बघेल ने ट्वीट कर कहा, 'प्रभु श्री राम के ननिहाल चंदखुरी का सौंदर्य अब पौराणिक कथाओं के नगरों जैसा ही आकर्षक होगा। राजधानी रायपुर के निकट स्थित इस गांव के प्राचीन कौशल्या मंदिर के मूल स्वरूप को यथावत रखते हुए, पूरे परिसर के सौंदर्यीकरण की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। जय सिया राम।'
 


बता दें कि छत्तीसगढ़ सरकार राम वन गमन पथ के महत्वपूर्ण स्थानों को पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित कर रही है और माता कौशल्या के जन्स्थान चंदखुरी पर मंदिर बनाने को लेकर विचार कर रही है। मुख्यमंत्री बघेल ने दावा किया है कि छत्तीसगढ़ श्रीराम का ननिहाल है और वनवास के दौरान यहां उन्होंने काफी समय बिताया।

उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'हमारी महत्वाकांक्षी राम वन गमन पथ विकास परियोजना में शामिल चंदखुरी में यह पूरा कार्य 15 करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से किया जाएगा। योजना के मुताबिक चंदखुरी में मंदिर के सौंदर्यीकरण तथा परिसर विकास का कार्य दो चरणों में कार्य पूरा किया जाएगा। योजना के मुताबिक चंदखुरी को पर्यटन-तीर्थ के रूप में विकसित किया जाना है, इसलिए वहां स्थित प्राचीन कौशल्या माता मंदिर के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ नागरिक सुविधाओं का विकास भी किया जाएगा। बीते 22 दिसंबर को चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए भूमि-पूजन किया गया था। इसके साथ ही राम वन गमन पथ पर पड़ने वाले महत्वपूर्ण स्थलों के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की परियोजना की भी शुरुआत कर दी गई थी।'

बघेल ने अधिकारियों को तालाब पर एक पुल और सभी सुविधाओं से युक्त धर्मशाला और शौचालय आदि का निर्माण करने को कहा। राम वन गमन से जुड़े नौ स्थानों को विकसित किया जा रहा है। माना जाता है कि श्रीराम ने दक्षिण भारत जाने के लिए इन रास्तों का इस्तेमाल किया था।

इन स्थानों में सितामढ़ी-हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (अंबिकापुर), शिवरीनारायण (जंजगिर-चंपा), तुरतुरिया (बलोदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गारीबंद), सिहावा-सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदालपुर (बस्तर), रामारम (सुकमा) शामिल हैं। पर्यटन विभाग इन स्थानों को 137.45 करोड़ रुपये में विकसित करने की योजना बना रहा है।
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