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छत्तीसगढ़ चुनाव: क्या सरगुजा में खिसकते जनाधार को रोक पाएगी भाजपा?

भाषा Updated Mon, 19 Nov 2018 02:23 PM IST
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छत्तीसगढ़ का उत्तरी क्षेत्र सरगुजा राज्य के पठारी क्षेत्रों में से एक है और क्षेत्र के राजघरानों ने यहां होने वाले चुनावों को प्रभावित किया है। इस क्षेत्र में भाजपा जहां धीरे धीरे जनाधार खोती गई वहीं कांग्रेस की सीटों में बढ़ोतरी हुई है। छत्तीसगढ़ में दूसरे और अंतिम चरण के लिए 20 नवंबर को मतदान होना है और राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है। राजनीतिक दलों के चुनाव प्रचार की गवाह सरगुजा क्षेत्र की 14 सीटें भी हैं, जहां के मतदाताओं के सामने जंगली हाथी की समस्या समेत कई समस्याएं हैं।
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राजघरानों से प्रभावित राजनीति 

कभी धुर नक्सली इलाका रहा यह क्षेत्र वन और खनिज संपदा से भरपूर है। सरगुजा क्षेत्र की राजनीति यहां के प्रसिद्ध राजघरानों से भी प्रभावित रही है। यहां के प्रसिद्ध राजघरानों में से एक सरगुजा का सिंहदेव राजघराना है, जिसके वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव कांग्रेस विधायक दल के नेता हैं। वहीं दूसरा प्रमुख राजघराना जशपुर जिले में जूदेव राजघराना है जिसके कुमार दिलीप सिंह जूदेव भाजपा के कद्दावर नेता थे। क्षेत्र में तीसरा राजघराना कोरिया जिले का सिंहदेव राजघराना है। जिले के बैकुंठपुर क्षेत्र से रामचंद्र सिंहदेव विधायक चुने जाते थे। रामचंद्र सिंहदेव छत्तीसगढ़ के पहले वित्त मंत्री थे। सिंहदेव अपनी सादगी के कारण जाने जाते थे।

वन और पहाड़ों से घिरे सरगुजा क्षेत्र में पांच जिले सरगुजा, जशपुर, कोरिया, बलरामपुर और सूरजपुर है। इस क्षेत्र में विधानसभा की 14 सीटें हैं। आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र में नौ विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है।राज्य में जब पहली बार वर्ष 2003 में विधानसभा के चुनाव हुए तब यह क्षेत्र नक्सल प्रभावित था और इस क्षेत्र के लोगों का आशीर्वाद भाजपा को मिला। भाजपा ने इस क्षेत्र में 14 में से 10 सीटें जीतीं जबकि कांग्रेस को यहां केवल चार सीटें ही मिलीं।

इस चुनाव में भाजपा ने राज्य की 90 सीटों में से 50 सीटों पर जीत हासिल कर सरकार बनाई थी और रमन सिंह पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। वहीं कांग्रेस को 37, बसपा को दो और राकांपा को एक सीट मिली थी।

राज्य में साल 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इतिहास दोहराया और सरगुजा क्षेत्र की नौ सीटों पर जीत हासिल की। इस बार भाजपा को इस क्षेत्र में एक सीट का नुकसान हुआ था लेकिन इस बार भी राज्य में भाजपा की सरकार बनी थी। सरगुजा क्षेत्र में कांग्रेस को पांच सीटें मिली थीं। साल 2013 के चुनाव में भाजपा का जनाधार दक्षिण क्षेत्र बस्तर की तरह ही उत्तर के पठारी इलाके में भी घटा और इस बार पार्टी की सीट सात रह गई। इस चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को बराबरी से टक्कर दी थी।
 
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