बिना डरे मगरमच्छों से भरी नदी को पार करती हैं सुनीता, सलाम है इनके जज्बे को

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छत्तीसगढ़ Updated Thu, 08 Mar 2018 11:56 AM IST
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वह हर दिन मगरमच्छों से भरी नदी को खुद नाव चलाकर पार करती है। पिछले सात सालों से छत्तीसगढ़ की सुनीता का बिना रुके डरे मगरमच्छों से भरी नदी को पार करना रूटीन बना हुआ है। सुनीता एएनएम हैं। सुनीता नवजातों और गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य की देखभाल करती हैं।
इन सात सालों में नदी पार करने के दौरान कई बार मगरमच्छों ने उसकी नाव पर हमला भी किया है लेकिन सुनीता का हौंसला डिग नहीं पाया है। वह नक्सली प्रभावित क्षेत्र दंतेवाड़ा के दूर दराज के गांवों में बेधड़क जाती हैं। ये छत्तीसगढ़ के वो इलाके हैं जहां स्वास्थ्य सेवाएं न के बराबर हैं।

ऐसे में वहां की गर्भवती महिलाओं की देखरेख सुनीता के ही हाथों में है। सुनीता कहती हैं मैं अपने काम को लेकर दृढं संकल्प हूं। मैं बिना डरे हर दिन इंद्रावती नदी को पार करती हूं यही नहीं मैं गांव वालों के इलाज के लिए घने जंगलों को भी पैदल ही पार करती हूं।

उन्होंने बताया कि इन सात सालों में कई बार ऐसा मौका आया है जब हमें लगा कि बस आज सब खत्म हो गया। कई बार जंगल पार करते हुए हमारा सामना खतरनाक जानवरों  से भी हुआ है। लेकिन जब हम काम करने निकले हैं तो हमें ऐसी चुनौतियों का सामना करना ही पड़ेगा।  मेरा यह मानना है कि मेरी जान से ज्यादा कीमती गांव वालों की जान है।

सुनीता बताती हैं कि जहां मेरी ड्यूटी लगी है वहां जाने के लिए सड़कें नहीं हैं। वहां पहुंचने का रास्ता नदी और जंगल से होकर ही गुजरता है और हम उन रास्तों को सड़क की तरह समझ कर ही पार करते हैं। नदी पार करने के बाद करीब 8 से 10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। 



 

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