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Janam Kundali

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कौन हैं जोगिंदर सिंह उगराहां, जिन्होंने संभाली पंजाब के सबसे बड़े किसान संगठन की बागडोर

कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब-हरियाणा के किसान दिल्ली के बार्डर पर डटे हुए हैं। पंजाब का सबसे बड़ा किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन उगराहां भी कंधे स...

30 नवंबर 2020

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Digital Edition

सिंघु बॉर्डर से लौटने लगे किसान, अब मनाने में जुटे नेता, दिल्ली बवाल से दुखी अन्नदाता

सिंघु बॉर्डर से किसान लौटने लगे हैं। सिंघु बॉर्डर से किसान लौटने लगे हैं।

दिल्ली बवाल के बाद फैसला : किसानों का एक फरवरी का संसद कूच स्थगित, 30 जनवरी को रखेंगे उपवास

गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड निकालने के दौरान दिल्ली में बवाल और लालकिला पर धार्मिक झंडा फहराने की घटना के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने एक फरवरी का संसद कूच स्थगित कर दिया है। अब किसान 30 जनवरी को उपवास रखेंगे और आंदोलन को इस तरह ही जारी रखेंगे। उधर, किसान नेताओं ने गणतंत्र दिवस की घटना पर खेद जताया है और उसके लिए कई नेताओं ने माफी भी मांगी। इसके लिए पंजाब की किसान मजदूर संघर्ष समिति व दीप सिद्धू को जिम्मेदार ठहराया तो सरकार व दिल्ली पुलिस पर भी आरोप लगाए गए। 

किसान नेता डॉ. दर्शनपाल, योगेंद्र यादव, राकेश टिकैत, बलबीर सिंह राजेवल, गुरनाम चढूनी, हन्नान मोला, शिवकुमार कक्का, जगजीत सिंह दल्लेवाल ने कहा कि उन सभी ने बैठक करके गणतंत्र दिवस की घटना पर चर्चा की। इस मामले में कई तरह के सुबूत किसानों के पास हैं जो सरकार और पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े करते हैं। इसके चलते किसानों ने तय किया है कि 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर वह उपवास रखकर घटना का प्रायश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि जल्द ही बैठक कर अगले आंदोलन की रणनीति की घोषणा की जाएगी।

दीप सिद्धू के सामाजिक बहिष्कार की अपील 
किसानों ने दीप सिद्धू के सामाजिक बहिष्कार की अपील की है। उन्होंने कहा कि सच्चाई जनता के सामने है और देश देख रहा है कि कौन क्या कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने आरोपियों को लाल किला तक का रास्ता दिया। किसानों ने कहा कि दिल्ली पुलिस को समय और ट्रैक्टरों की संख्या को लेकर कोई लिखित प्रस्ताव नहीं दिया गया था। 

किसान संगठनों ने एकजुटता का एलान करते हुए कहा कि वह अपने निर्णय पर अडिग हैं और इस तरह के षडयंत्र से आंदोलन किसी भी हाल में समाप्त नहीं होगा। इसके साथ ही किसानों के 32 संगठनों ने बैठक कर यह तय किया है कि जल्द ही अगली रणनीति घोषित होगी। वहीं मुकदमे पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि वह इस तरह के मुकदमे से नहीं डरते। वह हर मुकाबले के लिए तैयार हैं लेकिन सरकार व पुलिस ने किसानों के साथ धोखा किया।
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किसान आंदोलन में पड़ने लगी दरार, हरियाणा की खाप पंचायतें बोलीं- तिरंगे की जगह धार्मिक झंडा मंजूर नहीं

गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान जिस तरह बवाल हुआ और लाल किले पर धार्मिक झंडा फहराया गया, उससे आंदोलन में दरार पड़नी शुरू हो गई है। हरियाणा के खाप प्रतिनिधि और किसान नेताओं ने इस पर नाराजगी जता साफ कहा है कि तिरंगे की जगह धार्मिक झंडा किसी भी हालत में मंजूर नहीं है। वहीं इस घटनाक्रम से नाराज हरियाणा के काफी किसान जहां घर लौट गए हैं, वहीं खाप पंचायतें भी आंदोलन से सर्मथन वापसी का मन बना रही हैं।

हरियाणा के खाप प्रतिनिधियों ने जल्द ही सर्वखाप पंचायत कर किसान संगठनों को समर्थन पर फैसला लेने की बात कही है। खाप प्रतिनिधियों ने साफ कहा कि किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेंगे कि लाल किले पर तिरंगे की जगह कोई धार्मिक झंडा फहराया जाए। देश की एकता और अखंडता को तोड़ने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती है। वहीं हरियाणा के किसानों ने साफ कहा कि उन्हें पहले पता होता कि आंदोलन की आड़ में ऐसा बवाल हो सकता है तो वह आंदोलन में शामिल ही नहीं होते। 

खापों ने आंदोलन को केवल इसलिए समर्थन दिया था कि वह भाईचारे के साथ शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जाएगा। लेकिन जिस तरह से आंदोलन की आड़ में बवाल हुआ है और लाल किले पर धार्मिक झंडा फहराया गया। यह किसी भी हालत में मंजूर नहीं होगा और इस तरह आंदोलन में होता है तो समर्थन की बात ही नहीं बनती है।
- सुरेंद्र दहिया, प्रधान दहिया खाप।

जिस तरह से दिल्ली में बवाल हुआ है और लाल किले पर धार्मिक झंडा फहराया गया है। इसे देश किसी भी हालत में मंजूर नहीं करेगा और इसका संदेश भी काफी गलत गया है। इस तरह की घटना से किसान नेताओं पर किसानों का विश्वास कम हुआ है और वह घर वापसी कर रहे हैं।
- राजेश दहिया, अध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान आरक्षण संघर्ष समिति।
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दिल्ली बवाल के बाद बिखरे आंदोलन को समेटना किसान नेताओं के लिए बड़ी चुनौती

शांतिपूर्ण चल रहा किसानों का आंदोलन 26 जनवरी को हुए उत्पात के साये में घिर गया। घटनाक्रम के बाद आंदोलन बिखर गया है और हरियाणा में कई जगह किसानों से आपसी सहमति के बाद धरने-प्रदर्शन खत्म कर दिए हैं। पंजाब के किसान भी अपने ट्रैक्टर लेकर वापसी कर रहे हैं। इस स्थिति में अब किसान संगठनों के लिए अपने बिखरे आंदोलन को समेटना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों के किसान संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 27 नवंबर से कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत की थी। हरियाणा-दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का शांतिपूर्ण धरना जारी रहा। अब हिंसा के बाद जिन मुद्दों पर किसान आंदोलन खड़ा हुआ है, वे मुद्दे उत्पात और अलग विचारधारा की आंच में सुलग रहे हैं। 

किसान नेता भी इस बात से आहत हैं और इन उत्पातियों से पल्ला झाड़ रहे हैं। अब इस आंदोलन को दोबारा मजबूती से खड़ा करना इन नेताओं के लिए बड़ी चुनौती से कम नहीं है। इसका कारण यह है कि हिंसक घटनाओं के बाद दिल्ली पुलिस ने कई किसान नेताओं के खिलाफ न केवल एफआईआर दर्ज की है बल्कि अधिकांश नेता दिल्ली पुलिस के रडार पर हैं। 

अब भाजपा नेताओं ने भी शुरू की घेराबंदी
बवाल के बाद हरियाणा में भाजपा नेताओं ने किसान संगठनों और नेताओं की घेराबंदी शुरू कर दी है। भाजपाइयों का कहना है कि किसान नेता यह स्पष्ट करें कि आंदोलन का मुख्य एजेंडा क्या था। इस दौरान हरियाणा के कई जिलों में भाजपाइयों ने दिल्ली में हुई घटना के विरोध में बाइक पर तिरंगा यात्रा भी निकाली। कृषि मंत्री जेपी दलाल ने साफ कहा कि आंदोलन की आड़ में देशद्रोही ताकतों ने राष्ट्रध्वज का अपमान किया है, जो असहनीय है। 

केंद्रीय राज्यमंत्री रतनलाल कटारिया ने घटना को भारत के लोकतंत्र की मान मर्यादा को तार-तार करने की साजिश बताया। उनके अनुसार यह घटना दिल्ली को बंदी बनाने की कोशिश थी। उधर, मुख्यमंत्री मनोहर लाल प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित करते हुए किसी भी प्रकार का उपद्रव करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दे चुके हैं। 

शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर ने घटना को किसान आंदोलन की आड़ में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा अपनी साजिश को अंजाम देने की असफल कोशिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि घटना में देश से बाहर की ताकतों का भी हाथ है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़ ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज की जगह कोई और ध्वज फहराने का प्रयास करना देश के गौरव व गरिमा का अपमान है।
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किसान आंदोलन : राष्ट्रीय राजमार्ग व केजीपी-केएमपी चार दिन रहे जाम, 2000 करोड़ से ज्यादा का लगा फटका

किसान आंदोलन की फाइल फोटो।
किसान आंदोलन के कारण पहले ही उद्योग और व्यापार चौपट हो चुके थे, वहीं पिछले चार दिन तक नेशनल हाईवे के साथ ही केजीपी-केएमपी जाम रहने से हालात बदतर हो गए हैं। इन चार दिनों में करीब 2000 करोड़ रुपये का फटका उद्योग व व्यापार जगत को लगा है। औद्योगिक क्षेत्रों में माल नहीं आने-जाने से यह नुकसान हुआ है। 

जहां सोनीपत में आंदोलन के कारण पहले हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, वहीं अब केवल चार दिन में सोनीपत में अलग से करीब 1000 करोड़ रुपये का नुकसान तो आसपास के जिलों झज्जर, रोहतक, पानीपत समेत अन्य में भी भारी नुकसान हुआ है। इस तरह से उद्योगों की हालत खराब होती जा रही है।

कृषि कानून रद्द कराने के लिए किसानों ने नेशनल हाईवे 44 के सिंघु बॉर्डर पर पिछले 60 दिन से डेरा डाला है। इस तरह प्रदेश के बड़े व राष्ट्रीय राजधानी से सटे औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल कुंडली पूरी तरह से बंद है। इसके साथ ही नाथूपुर सबौली औद्योगिक क्षेत्र के भी सभी रास्ते बंद हैं तो राई, मुरथल व बड़ी औद्योगिक क्षेत्र की फैक्टरी आंशिक रूप से चल रही हैं। 

सोनीपत जिले में उद्योग को अभी तक करीब 150 करोड़ रुपये का नुकसान रोजाना हो रहा था। लेकिन पिछले चार दिन से नेशनल हाईवे 44 पूरी तरह से बंद रहा तो केजीपी-केएमपी भी चार दिन तक बंद रहा। इस तरह सोनीपत में वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया तो केजीपी-केएमपी से होकर अन्य राज्यों में जाने वाले प्रदेश के दूसरे जिलों के वाहनों के पहिये भी थम गए थे। जिससे इन चार दिन के अंदर ही करीब 2000 करोड़ रुपये का नुकसान सोनीपत के साथ ही आसपास के झज्जर, पानीपत, रोहतक के उद्योगों को हुआ है। क्योंकि इन जगहों पर चार दिन से कच्चा माल पहुंच नहीं रहा था तो सामान की सप्लाई भी बंद हो गई थी। 
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हरियाणा के पानीपत में घिनौनी वारदात, अस्पताल में बीमार युवती से दो वार्ड ब्वॉय ने किया दुष्कर्म

हरियाणा के पानीपत में एक निजी अस्पताल में ब्लड प्रेशर की शिकायत पर भर्ती कराई गई 19 वर्षीय एक युवती के साथ अस्पताल के ही दो वार्ड ब्वॉय ने मंगलवार की रात दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। बीमार युवती ने अपने परिजनों को इस बारे में बताया। जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। 

हंगामा होता देख दुष्कर्म के आरोपी दोनों वार्ड ब्वॉय मौके से फरार हो गए। पुलिस वारदात की सूचना पर मौके पर पहुंची और परिजनों की शिकायत के आधार पर दोनों वार्ड ब्वॉय के खिलाफ रिपोर्ट दर्जकर ली है। दोनों की अभी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

पिता ने पुलिस को बताया कि उसने 25 जनवरी को 19 साल की बेटी को इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया था। बेटी को ब्लड प्रेशर की समस्या थी और हालत ज्यादा बिगड़ने पर गांव से पानीपत इलाज कराने लाया था। यहां पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल में रात में दो वार्ड ब्वॉय की ड्यूटी थी। 

मंगलवार रात को दोनों वार्ड ब्वॉय ने बेटी के साथ दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। बेटी ने किसी तरह हिम्मत जुटाकर मां को दोनों वार्ड ब्वॉय की घिनौनी हरकत के बारे में बताया। इसकी शिकायत अस्पताल प्रबंधन से की, जिस पर उन्होंने कुछ भी नहीं किया।

अस्पताल में हंगामा होने पर आरोपी दोनों वार्ड ब्वॉय फरार हो गए। जिसके बाद परिजनों ने पुलिस को मामले की सूचना दी। पुलिस ने लिखित शिकायत लेने के बाद बुधवार को मामले में रिपोर्ट दर्जकर ली है। 

थाना मॉडल टाउन प्रभारी सुनील कुमार ने बताया कि परिजनों के बयान और शिकायत के आधार पर रिपोर्ट दर्जकर ली गई है। अस्पताल प्रबंधन से पूछताछ की जा रही है। दोनों आरोपी फरार है, उनकी तलाश में दबिश दी जा रही है, जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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केएमपी व केजीपी के टोल फिर चालू, करनाल में भी टोल प्लाजा खाली, हिसार में धरना जारी

केजीपी और केएमपी एक्सप्रेस वे पर स्थापित टोल 46 दिनों के बाद बुधवार को दोबारा शुरू हो गए हैं। केएमपी पर पुलिस की तरफ से दोपहर एक बजे टोल कर्मियों को बोलकर टोल शुरू करवाया गया। इस दौरान किसी प्रकार की परेशानी से निपटने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा। उधर, टोल पर्ची को लेकर लगातार टोल कर्मियों व वाहन चालकों के बीच कहासुनी होती रही। वहीं मुरथल के पास एनएच-44 पर अभी भी टोल वसूला नहीं जा रहा। 

खरखौदा क्षेत्र से होकर गुजरने वाले केएमपी एक्सप्रेस-वे को बुधवार दोपहर बिना तैयारी के शुरू कर दिया गया। ऐसे में न तो टोल कर्मियों ने अपने कंप्यूटर सिस्टम को टोल पर स्थापित किया था और न ही वाहन चालकों से वसूले जाने वाले टोल को लेकर दी जाने वाली रसीद की कोई व्यवस्था थी। जैसे ही वाहन चालक को टोल कर्मी पैसे लेकर पर्ची देता, हाथ से बनी पर्ची देखते हुए वाहन चालक विरोध पर उतर आते। 

कंप्यूटर नहीं होने के कारण टोल कर्मी हाथ से पर्ची बनाकर वाहन चालकों को थमा रहे थे, जिस पर पिपली टोल की मोहर लगी हुई थी। जबकि टोल पर पहुंचने वाले वाहन चालकों को एंट्री प्वाइंट पर भी कोई पर्ची नहीं दी गई थी, ऐसे में एक विवाद का कारण यह भी था कि वाहन चालक केएमपी पर कितना सफर तय करके आया है और उससे कितना टोल वसूलना है। हर वाहन चालक के साथ यह विवाद होने पर टोल पर वाहनों की लंबी कतार भी लग गई। 
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एनआईए करेगी शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह हत्याकांड की जांच, 200 आतंकियों से लिया था लोहा

शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह हत्याकांड की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) करेगी। बता दें कि बलविंदर सिंह ने पंजाब में आतंकवाद के दौर में आतंकियों का बहादुरी से मुकाबला किया था। तरनतारन के भिखीविंड में पिछले साल अक्तूबर में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

 बलविंदर सिंह शौर्य चक्र विजेता थे और उनके जीवन पर कई टेलीफिल्में भी बनी थीं। इससे पहले उन पर 42 बार हमले हुए थे। उनके परिवार ने हत्यांकाड की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। बलविंदर सिंह कस्बे में निजी स्कूल चलाते थे। वे कामरेड बलविंदर के नाम से मशहूर थे। स्कूल के ऊपर ही उनका आवास है। 

जब 200 आतंकियों को खदेड़ा
सितंबर 1990 में पंजवड़ ने 200 आतंकवादियों के साथ बलविंदर सिंह के घर में हमला किया था। इसमें रॉकेट लांचर का भी इस्तेमाल किया था। बलविंदर के घर में पक्के बंकर बने थे। आतंकवादियों ने बलविंदर के घर को चारों तरफ से घेर लिया था, उनके घर की तरफ जाने वाले सभी रास्ते भी ब्लॉक कर दिए गए थे ताकि पुलिस व अर्धसैनिक बल मदद को न आ सकें।  

पांच घंटे चली इस मुठभेड़ में पंजवड़ भाग खड़ा हुआ था और उसके कई गुर्गे मारे गए थे। घर में बनाए गए मोर्चे से परिवार के सभी सदस्यों ने स्टेनगन आदि हथियारों से आतंकवादियों का बहादुरी से मुकाबला किया था। इसके बाद बलविंदर सिंह का नाम सुर्खियों में आ गया था। इसके बाद 1993 में गृह मंत्रालय की सिफारिश पर तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने बलविंदर सिंह, उनके बड़े भाई रंजीत सिंह और उनकी पत्नियों को शौर्य चक्र से सम्मानित किया था। 

कांट्रैक्ट किलिंग थी बलविंदर की हत्या
शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह संधू की हत्या कांट्रैक्ट किलिंग थी। गैंगस्टर सुख भिखारीवाल ने गुरजीत सिंह और सुखदीप सिंह से शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह संधू की हत्या करने लिए तीन लाख रुपये में सौदा किया था। इसमें से एक लाख 20 हजार रुपये किसी करीबी के माध्यम से मुहैया करा दिए थे। भिखारीवाल ने हत्या करने के आरोपियों को बताया था कि बलविंदर सिंह मामूली आदमी है। दोनों आरोपियों ने शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह संधू को आम आदमी समझ हत्या कर दी।
 
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अमरिंदर सिंह ने कहा- चीन के खिलाफ सैन्य शक्ति बढ़ाने की जरूरत, बीजिंग से बातचीत का कोई लाभ नहीं

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बुधवार को कहा कि चीन के विस्तारवादी एजेंडे को देखते हुए भारत सरकार को अपने इस पड़ोसी दुश्मन के बारे में स्पष्ट नीति अपनानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बीजिंग के साथ केवल बातचीत करने का कोई लाभ नहीं होगा।

कैप्टन ने कहा कि उन्हें यह उम्मीद है कि 20 जनवरी को नाकु ला में हुई ताजा झड़प में भारत का हाथ ऊपर रहा है। फिर भी देश को जरूरत है कि अपनी सैन्य क्षमता में विस्तार करते हुए इसे मजबूती प्रदान करे। बता दें कि पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह पूर्व सैनिक और सैन्य इतिहासकार हैं। 
उन्होंने यह भी कहा कि गलवां घाटी के बाद हुई इस ताजा घटना ने यह दिखा दिया है कि चीन अपनी विस्तारवादी नीति से न पीछे हटा है और न ही उसकी ऐसी कोई इच्छा है। चीन से भारत वह वापस नहीं ले सका जो उसने जबरन हमसे छीन लिया है। उन्होंने कहा कि सरहद पर ऐसे खतरे के मद्देनजर मजबूत सेना की जरूरत को नकारा नहीं जा सकता। 

कैप्टन ने कहा कि चीन के साथ केवल बातचीत द्वारा बात आगे नहीं बढ़ेगी, हमें सैन्य शक्ति बढ़ाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चीन हमेशा ही विस्तारवादी एजेंडे की पैरवी करता रहा है। पड़ोसी मुल्क अपने रक्षा ढांचे के विकास से विस्तारवाद पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है। 

केंद्र को पता था, पंजाब विरोध करेगा तभी नहीं दी विशेषज्ञ कमेटी में जगह : कैप्टन 
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तीन कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार पर फिर निशाना साधते हुए कहा है कि कृषि कानून गलत हैं। कृषि राज्यों का विषय है, फिर भी अध्यादेश लाने से पहले हमसे नहीं पूछा गया। आम आदमी पार्टी के आरोपों को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आप की ओर से भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। 

सच्चाई यह है कि पंजाब को तो विशेषज्ञों की समिति में शामिल भी नहीं किया गया था, क्योंकि केंद्र को पता था कि पंजाब इन कानूनों का घोर विरोध करेगा। जब उनकी तरफ से केंद्र सरकार को निजी पत्र लिखा गया, उसके बाद ही पंजाब को आखिरकार समिति का हिस्सा बनाया गया। उसके बाद समिति में कृषि अध्यादेशों पर कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया, बल्कि नीति आयोग द्वारा पंजाब सरकार को भेजी गई ड्राफ्ट रिपोर्ट, जिसका उनकी सरकार ने एक-एक क्लॉज पर जवाब दिया, में भी अध्यादेशों की कोई बात नहीं की गई। 
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