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शिरोमणि अकाली दल में जान फूंकने निकले सुखबीर बादल, अपनाई ऐसी रणनीति...विरोधी होंगे पस्त

सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब) Updated Sat, 08 Dec 2018 12:41 PM IST
Sukhbir Badal
Sukhbir Badal - फोटो : File Photo
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शिरोमणि अकाली दल में जान फूंकने के लिए शिअद सुप्रीमो सुखबीर एक बार फिर से मैदान में निकल पड़े हैं। उन्होंने ऐसी रणनीति अपनाई है कि विरोधी पस्त हो जाएंगे। 2017 विधानसभा चुनाव में पार्टी से किनारा कर चुके नेताओं को सुखबीर पार्टी से दोबारा जोड़ने की रणनीति तैयार कर मैदान में हैं ताकि 2019 में पार्टी पंजाब में अपना प्रभाव दिखा सके। मौजूदा रिपोर्ट में अकाली दल पंजाब की सियासत में तीसरे नंबर पर है और पार्टी का कैडर व टकसाली नेता बिखरते जा रहे हैं। 2012 के चुनाव में अकाली दल को 34.59 प्रतिशत वोट मिले थे लेकिन 2017 में पार्टी को सिर्फ 25 फीसदी मतों से संतोष करना पड़ा। वहीं आम आदमी पार्टी को तकरीबन 23.6 फीसदी वोट मिले। कारण था कि पंजाब में अकाली दल के कई नेता सुखबीर-मजीठिया की लीडरशिप से नाराज होकर पार्टी को अलविदा कह गए। पार्टी को डेरा सच्चा सौदा द्वारा समर्थन देने के अलावा श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और गुरु की संगत पर वर्दीधारियों के कहर ने अकाली दल को जमीन पर गिरा दिया।
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सुखबीर बादल पार्टी के 21वें प्रधान हैं और इस समय पार्टी काफी मुश्किल दौर से निकल रही है। पार्टी के टकसाली नेता अपना अलग धड़ा बनाने जा रहे हैं। 14 दिसंबर, 1920 को शिरोमणि अकाली दल की स्थापना हुई थी। उसके बाद कई बार पार्टी में बिखराव हुआ, लेकिन पार्टी एकजुट भी हुई। सुखमुख सिंह झब्बाल अकाली दल के पहले और बाबा खड़क सिंह इसके दूसरे अध्यक्ष थे, लेकिन पार्टी के तीसरे अध्यक्ष मास्टर तारा सिंह के नेतृत्व में अकाली दल राजनीतिक तौर पर प्रसिद्ध हुआ। इसके बाद गोपाल सिंह कौमी, तारा सिंह ठेकेदार, तेजा सिंह, बाबू लाभ सिंह, ऊधम सिंह नागोके, ज्ञानी करतार सिंह, प्रीतम सिंह गुजरां, हुकम सिंह, फतेह सिंह, अच्छर सिंह, भूपिंदर सिंह, मोहन सिंह तुड़, जगदेव सिंह तलवंडी, हरचरण सिंह लौंगोवाल, सुरजीत सिंह बरनाला, सिमरनजीत सिंह मान, प्रकाश सिंह बादल और अब सुखबीर सिंह बादल पार्टी के 21वें अध्यक्ष हैं। इस समय जिस संकट के दौर से अकाली दल निकल रहा है, उतना कभी नहीं पैदा हुआ।  

पार्टी से शेर सिंह घुबाया, रमिंदर बुलारिया, परगट सिंह तो पार्टी का दामन 2017 से पहले ही छोड़ गए थे और टकसाली अकाली नेता रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा, रतन सिंह अजनाला और सेवा सिंह सेखवां पार्टी को अलविदा कह गए हैं जबकि सुखदेव सिंह ढींढसा जैसे दिग्गज अकाली दल से नाराज होकर घर बैठ गए हैं। 2019 के चुनाव सिर पर हैं और पार्टी सुप्रीमो सुखबीर बादल को चिंता सता रही है। सर्वेक्षण में अकाली दल को पंजाब में महज एक ही सीट मिलती दिख रही है, जिसके बाद सुखबीर बादल पार्टी को दोबारा खड़ा करने में जुट गए हैं। पार्टी की कोर टीम ने ऐसे नेताओं की सूची तैयार की है, जो पार्टी के लिए लंबे समय से कार्य कर रहे थे लेकिन अब घर बैठने को मजबूर हो गए हैं। पिछले दो दिन में सुखबीर ने एक दर्जन ऐसे नेताओं से मुलाकात की है, जो पार्टी से खफा होकर घर बैठे हुए हैं। पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, सुखबीर बादल का मिशन पंजाब में वर्करों का गिर चुका मनोबल उठाना है, जिसके लिए उन्होंने योजना तैयार कर ली है और उसी पर वर्क किया जा रहा है।

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