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शर्म की बात...आजादी के इतने वर्षों के बाद भी भ्रष्टाचार, युवाओं के लिए नहीं है रोजगार : भीमसेन

Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 29 Sep 2022 02:30 AM IST
Shame... corruption even after so many years of independence, there is no employment for youth: Bhimsen
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चंडीगढ़। सेक्टर-15 के लाला लाजपत राय भवन स्थित द्वारका दास लाइब्रेरी में बुधवार को शहीद-ए- आजम भगत सिंह की 115वीं जयंती मनाई गई। यह आयोजन सर्वेंट्स ऑफ द पीपल सोसायटी की ओर से हुआ। कार्यक्रम में सोसायटी के चेयरमैन भीमसेन यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि भगत सिंह के बलिदान देते हुए देश की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। अंग्रेजों से देश आजाद तो हो गया लेकिन क्या सही में देश आजाद हुआ। भारत की आजादी के समय विश्व के कई अन्य देश भी आजाद हुए लेकिन वे सभी तरक्की कर कहां से कहां पहुंच गए। शर्म की बात है कि आजादी के इतने वर्षों के बाद भी भ्रष्टाचार व्याप्त है। युवाओं को रोजगार नहीं है। इलाज की सुविधा नहीं है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे जिम्मेदारी लें कि ऐसा कोई काम न करें जिससे देश का नुकसान हो। उन्होंने कहा कि लाला लाजपत राय से भगत सिंह बहुत प्रभावित थे। इस दौरान मंच का संचालन लाइब्रेरियन अलका ने किया। उन्होंने बताया कि इस दौरान भगत सिंह की पढ़ी हुई 24 दुर्लभ और संरक्षित पुस्तकों और उनके ऊपर दूसरे लेखकों की लिखी किताबों की प्रदर्शनी लगाई गई। इनमें से 12 किताबें लाला लाजपत राय की गोपाल कृष्ण गोखले की लिखी चिट्ठी वाली रखीं गई हैं। भगत सिंह की जयंती पर वर्ष 2008 में सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शनी लगी थी। इसमें भगत सिंह की 12 किताबें भगत सिंह पढ़ी हुई थी और दो लाला लाजपत राय की लिखी थीं। इन किताबों का बीमा 75 लाख रुपये था। इनमें से लाला जी की लिखी किताब ‘लालाजी लेटर्स टू गोखले’ का बीमा 25 लाख रुपये था। इसी से समझा जा सकता है कि इन किताबों का क्या महत्व है।

क्या कहते हैं युवा
भगत सिंह सिर्फ नाम नहीं, एक विश्वास
भगत सिंह सिर्फ नाम नहीं, एक विश्वास है जो हमें देश के बारे में जीना सिखाता है। आज समस्याओं का समाधान आर्थिक है। आर्थिक समस्या के कारण ही सामाजिक समस्या विकराल हो गई है।
-नजामुददीन, विद्यार्थी
भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद चरम पर
अत्याचार फिर बढ़ गया है। भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद चरम पर है। पहले अंग्रेजों ने हम पर बंदिशें लगाई थीं, अब अपने लोगों की बंदिशें झेलनी पड़ रही हैं। भगत सिंह के विचारों को बढ़ावा देने की जरूरत है ताकि देश को खुशहाल बनाया जा सके।
-कमलदीप सिंह, विद्यार्थी
मानवता के महान पुजारी थे भगत सिंह
भगत सिंह एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचार हैं। विचारों को खत्म नहीं किया जा सकता है। भगत सिंह हमेशा प्रासंगिक रहेंगे। अभी जो परेशानियां हैं, उम्मीद है कि युवा खड़ा होगा और समस्याओं के समाधान में आगे बढ़ेगा।
-दीक्षांत ढांडा, विद्यार्थी

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