दो दशक बाद एसजीपीसी कार्यकारिणी पंथक कठघरे में खड़ी हुई, लापरवाही बरतने पर फटकार

अशोक नीर, अमृतसर Updated Sat, 19 Sep 2020 12:12 PM IST
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एसजीपीसी अमृतसर
एसजीपीसी अमृतसर - फोटो : अमर उजाला

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सार

  • भाई रंजीत सिंह व ज्ञानी पूर्ण सिंह ने तत्कालीन कार्यकारिणी के सदस्यों पर किए थे कठोर फैसले
  • बड़ी लापरवाही: जहां पावन स्वरूपों का प्रकाशन होता है, वहां के रिकॉर्ड की कभी जांच ही नहीं हुई

विस्तार

श्री अकाल तख्त साहिब में आयोजित पांच सिंह साहिबान की बैठक में लिए गए फैसलों से पंथक संगठन कितने सहमत होंगे, इसका पंथक राजनीति में क्या प्रभाव पड़ेगा, यह तो आने वाला वक्त बताएगा। लेकिन जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने श्री अकाल तख्त साहिब की ड्योढ़ी से खड़े होकर 2016 व वर्तमान में एसजीपीसी का संचालन करने वाले पदाधिकारियों व कार्यकारिणी के सदस्यों को पावन स्वरूपों के मामले में लापरवाही बरतने पर फटकार लगाई है।
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लगभग 20 वर्ष के बाद किसी जत्थेदार ने एसजीपीसी की कार्यकारिणी की कार्यप्रणाली को पंथक कठघरे में खड़ा किया है। इससे पहले पूर्व जत्थेदार भाई रंजीत सिंह ने एसजीपीसी के तत्कालीन अध्यक्ष जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा व तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को एकजुट रहने के आदेश दिए थे। इसके एक वर्ष बाद तत्कालीन जत्थेदार ज्ञानी पूर्ण सिंह ने एसजीपीसी की तत्कालीन अध्यक्ष बीबी जागीर कौर व कार्यकारिणी को सिख पंथ से निष्काषित करने के आदेश जारी किए थे।
शर्म की बात है कर्मचारी भेंटें अपनी जेब डालते रहे
पावन स्वरूपों के मामले में अकाल तख्त साहिब व पंथ से माफी मांगने के लिए खड़े हुए लौंगोवाल से जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि क्या यह शर्म की बात नहीं कि जिस गुरुद्वारा साहिब में पावन स्वरूपों को प्रकाशित किया जाता है, वहां के कर्मचारी, संगत और गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों की ओर से वसूली भेंटें अपनी जेब में डालते रहे। एसजीपीसी इन घपलों पर पूरी तरह से अनजान रही।

पब्लिकेशन विभाग के कर्मचारी घपले पर घपले करते गए। एसजीपीसी प्रबंधन ने कभी रिकॉर्ड को जांचने की कोशिश भी नहीं की। क्या यह एसजीपीसी की गलती नहीं है। पावन स्वरूपों को देखने का प्रयास ही नहीं किया गया।
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