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Budget: नाराज दिखे CM मान, बोले- कर्तव्य पथ से झांकी और अब बजट से पंजाब गायब, पंजाबियों का निरादर किया

अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Wed, 01 Feb 2023 11:30 PM IST
सार

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत बोले कि केंद्र ने राज्य की अनदेखी कर पंजाबियों का निरादर किया है। उन्होंने केंद्रीय बजट को दिशाहीन और पंजाब व किसान विरोधी बताया है। 

सीएम भगवंत मान
सीएम भगवंत मान - फोटो : twitter

विस्तार

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को पेश किए गए आम बजट को पंजाब विरोधी, लोक विरोधी, किसान विरोधी और दिशाहीन बजट करार दिया है। अपने ट्विटर हैंडल पर मुख्यमंत्री ने लिखा- पहले गणतंत्र दिवस समारोह से पंजाब हटाया गया और अब बजट से पंजाब गायब है। भले ही केंद्रीय वित्त मंत्री ने नए नर्सिंग कॉलेज खोले जाने का अस्पष्ट सा एलान किया है लेकिन इसकी भी कोई समय सीमा तय नहीं की गई।



उन्होंने देर शाम जारी एक बयान में यह भी कहा कि यह शर्मनाक बात है कि केंद्र सरकार ने अपनी संकुचित मानसिकता के चलते राज्य को पूरी तरह अनदेखा कर दिया, जिससे बहादुर और मेहनती पंजाबियों के बलिदानों का अपमान किया गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकर दुख हुआ कि पंजाब की सभी वाजिब मांगों को पूरी तरह भुला दिया गया और केंद्रीय बजट में राज्य को कहीं भी शामिल नहीं किया गया।


मुख्यमंत्री ने राज्य को नजरअंदाज कर 'आग से खेलने' के प्रति केंद्र को सचेत करते हुए कहा कि पंजाब के बिना भारत की कल्पना भी नहीं की जा सकती और केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा पंजाब और पंजाबियों के योगदान को अनदेखा करने की कोशिश को हरगिज बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सरहदी राज्य की सुरक्षा खतरे में डाली
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरहदी राज्य होने के कारण उन्होंने बीएसएफ और पंजाब पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए केंद्र से 1000 करोड़ रुपये की मांग की थी। यह फंड सरहद पार खासकर हाईटेक ड्रोनों के जरिये नशों और हथियारों की तस्करी को रोकने के लिए जरूरी है। केंद्र सरकार ने इस मांग को ठंडे बस्ते में डालकर सरहदी राज्य की सुरक्षा को पूरी तरह खतरे में डाल दिया है।

मोदी सरकार का किसान विरोधी चेहरा बेनकाब
मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी अफसोस जताया कि बजट ने मोदी सरकार के किसान विरोधी चेहरे को बेनकाब कर दिया। उन्होंने कहा कि यह मौजूदा मोदी सरकार का आखिरी बजट है लेकिन दावों के बावजूद किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कुछ नहीं किया गया। सरकार किसानों को फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य देने से भी भाग रही है जोकि बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बात है। वह धान की पराली की समस्या के हल के लिए केंद्र से किसानों को प्रति एकड़ 1500 रुपये की वित्तीय सहायता के साथ-साथ राज्य की तरफ से बराबर ग्रांट देने की पैरवी कर रहे हैं। वहीं केंद्र सरकार ने इस संबंध में कुछ नहीं किया।

प्री-बजट बैठकों में ये मांगें रखी थीं: मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने प्री-बजट बैठकों के दौरान लोगों की सुविधा के लिए अमृतसर और बठिंडा से दिल्ली तक वंदे भारत रेलगाड़ियां शुरू करने की जरूरत बताई थी लेकिन सिखों के पांच तख्तों को रेल मार्ग से जोड़ने के विचार के साथ-साथ इस मांग को भी पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

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