अप्रैल व मई में करवाए जा सकते हैं पीयू सीनेट चुनाव

Panchkula Bureauपंचकुला ब्‍यूरो Updated Thu, 14 Jan 2021 02:23 AM IST
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के सीनेट चुनाव अप्रैल व मई में हो सकते हैं। नई सीनेट के गठन के बाद ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपनाया जाएगा और उसके बाद सीनेट रिफॉर्म आदि का प्रस्ताव पास होगा। उसके बाद पीयू कैलेंडर आदि में भी बदलाव करने होंगे। हालांकि रिफॉर्म का रास्ता सीनेट के जरिए ही खुलेगा। जानकारों का यह भी कहना है कि पीयू प्रशासन का जवाब हाईकोर्ट में कमजोर पड़ रहा है, इसलिए हाईकोर्ट का निर्णय भी जल्द सामने आएगा।
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पीयू सीनेट के चुनाव अगस्त में करवाए जाने थे, लेकिन उसी दौरान दो बार स्थगित कर दिए गए। इसे लेकर हंगामा मचा और काफी समय तक प्रदर्शन चला। हालांकि सफलता नहीं मिल पाई और सीनेट का कार्यकाल 31 अक्तूबर को खत्म हो गया। उसके बाद सिंडिकेट का कार्यकाल भी बिना चुनाव के खत्म हो गया। पीयू के दोनों शासी निकाय नहीं रहे। उसके बाद मामला हाईकोर्ट में चला गया और पीयू प्रशासन से सीनेट चुनाव न करवाने को लेकर जवाब मांगा गया। सूत्रों का कहना है कि पीयू के पास कोई ठोस जवाब नहीं है। हालांकि कोशिश जवाब देने की पूरी हो रही है।

जानकारों का कहना है कि सीनेट चुनाव होंगे क्योंकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति पीयू की सीनेट ही लागू करेगी और रिफॉर्म पर भी यही फैसला लेगी। इसे लेकर पूर्व सीनेटर व पूर्व सिंडिकेट के कई सदस्यों में खुशी की लहर है। बताया जाता है कि सीनेट के चुनाव अप्रैल व मई में हो सकते हैं, क्योंकि विद्यार्थियों की परीक्षाएं फरवरी व मार्च माह तक चलेंगी। ऐसे में कर्मचारियों व शिक्षकों के पास चुनाव कराने के लिए समय नहीं रहेगा।
कुछ पूर्व सीनेटरों ने चुनाव को कमर कसी
कुछ पूर्व सीनेटरों का पता लगा कि सीनेट चुनाव की तैयारी चल रही है। इस पर जल्द निर्णय होने वाला है, तो उन्होंने चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। वे दूसरे शिक्षकों से संपर्क साध रहे हैं। सिंडिकेट के पुराने सदस्य भी इसी चक्कर में हैं कि सीनेट चुनाव हों और वे सिंडिकेट के सदस्य बनें। वह भी अपना प्रचार-प्रसार करने लगे हैं।
सीनेट के चुनाव के बाद होगा घमासान
यदि सीनेट के चुनाव फाइनल रूप से करवाने के आदेश हो जाते हैं तो सीनेट की बैठकों में घमासान होगा। सूत्रों का कहना है कि भाजपा बनाम कांग्रेस सदस्य होंगे। क्योंकि सीनेट चुनाव स्थगित करने के बाद तमाम सदस्यों ने संघर्ष किया है। ऐसे में वह अपना प्रभाव सीनेट में दिखाएंगे। इसी तरह सिंडिकेट का चुनाव भी एकतरफा हो सकता है। क्योंकि फिर लड़ाई प्रतिष्ठा से जुड़ी होगी।

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