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Chandigarh News: शोध में साबित... कोविड वैक्सीन की दो खुराक, वायरस के हर म्यूटेशन से बचाव

Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 27 Nov 2022 08:30 AM IST
Proved in research... two doses of covid vaccine, protection from every mutation of the virus
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चंडीगढ़। कोविड टीकाकरण की दो खुराक कोरोना महामारी के किसी भी स्वरूप से बचाव के लिए पर्याप्त है। इसे पीजीआई ने ट्रांसलेशन हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट फरीदाबाद के विज्ञानी के साथ मिलकर किए गए शोध में साबित कर दिया है। शोध प्रिंसिपल साइंटिस्ट इंस्टीट्यूट के डॉ. अमित अवस्थी को उनके इस शोध कार्य के लिए शनिवार को पीजीआई में वैक्सीन एक्सीलेंस अवार्ड प्रदान किया गया है। वह पीजीआई में आयोजित इम्यूनोकॉन 2022 में बतौर शोधकर्ता मौजूद थे।

डॉ. अमित ने बताया कि कोविड की पहली लहर के दौरान जब विश्वभर में महामारी से तेजी से मौत हो रही थी, उस समय इससे बचाव के लिए वैक्सीन का काम शुरू किया गया। उस समय वायरस के बारे में एक प्रतिशत भी जानकारी उपलब्ध नहीं थी। इसके लिए दो मॉड्यूल तैयार किए गए। पहला एनिमल एसीई 2 टीजी और दूसरा हेमस्टर्ड मॉडल। पहले में यह पाया गया कि संक्रमित होने पर बचाव न करने पर सात दिन के अंदर मौत हो रही है जबकि दूसरे मॉडल में हेमस्टर्ड को एबीएसएल 3 के मानक में रखा गया। यानि उसे जहां रखा गया वहां की हवा प्यूरीफायर होकर जाती है और निगेटिव प्रेशर होता है। फिर हेमस्टर्ड में कोरोना का वायरस डाला गया। उसके बाद 3, 6 और 8वें दिन उसमें संक्रमण का स्तर मापा गया। इसमें यह बात पता चली कि मानकों के अनुसार रहने पर सात दिन बाद एंटीबॉडी का निर्माण शुरू हो जाता है। 14वें दिन में संक्रमण कम हो जाता है।

बॉक्स
हेमस्टर्ड को दो वर्गों में बांटकर पाया परिणाम
वायरस से जुड़ी जानकारी मिलने के बाद उसके वैक्सीन पर काम शुरू किया गया। इसके तहत विश्व की पहली कोविड वैक्सीन जाइकोब डी का परीक्षण किया गया। हेमस्टर्ड को दो वर्गों में बांटा गया। दोनों वर्गों को संक्रमित किया गया। पहले वर्ग को 40 दिन बाद वैक्सीन दी गई जबकि दूसरे को नहीं। मानकों के अनुसार पहले वर्ग को 40 दिन बाद दूसरी खुराक भी लगाई गई जबकि पहले को नहीं। इसके बाद दोनों वर्गों में उसके 45 दिन बाद नाक के माध्यम से वारयस डाला गया। जिस वर्ग को दोनों खुराक दी गई थी उसमें संक्रमण का स्तर बेहद कम पाया गया जबकि जिन्हें वैक्सीन नहीं दी गई थी उनकी स्थिति बेहद गंभीर हो गई।
इनसेट-
स्वदेशी वैक्सीन की भी की जांच
इसके अगले चरण में डॉ. अमित की टीम ने भारत में बनाई गई प्रोटीन बेस्ड कोर्बिवैक्स वैक्सीन के परिणाम का भी परीक्षण किया। इसे भी एनीमल मॉडल पर जांच किया गया और पाया गया कि वैक्सीन की दो खुराक संक्रमण के बाद रिकवरी में बेहद कारगर है। डॉ. अमित ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान डेल्टा जैसे घातक म्यूटेशन के दौरान वैक्सीन के परिणाम की जानकारी देकर महामारी से बचाव में अहम भूमिका निभाई।
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