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Rain in Haryana: प्रदेश में लाखों एकड़ फसल हुई जलमग्न, सरकार ने खोला ई-फसल क्षतिपूर्ति पोर्टल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 26 Sep 2022 10:31 PM IST
सार

पिछले पांच दिनों में प्रदेशभर में तेज बारिश हुई है। इससे कपास, धान समेत सब्जी की फसलें खराब हुई हैं। इसके साथ ही लाखों एकड़ फसल में पानी जमा हो गया है। अगर समय पर पानी की निकासी नहीं हुई तो फसलों के खराब होना तय है।

जलमग्न गन्ने की फसल।
जलमग्न गन्ने की फसल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

पिछले पांच दिन में हरियाणा में हुई बेमौसमी बारिश से लाखों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। हरियाणा सरकार के विशेष गिरदावरी के आदेश के बाद अब राजस्व विभाग ने फसल का नुकसान जानने के लिए ई-फसल क्षतिपूर्ति पोर्टल लिंक लांच कर दिया है। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर किसान अपने मोबाइल नंबर और परिवार पहचान पत्र से लिंक कर सकते हैं और फसल खराब होने के 72 घंटे के अंदर खराब फसल की जानकारी और फोटो अपलोड कर सकते हैं। पोर्टल पर आई नुकसान की रिपोर्ट को पटवारियों को आगामी एक सप्ताह में फील्ड में जाकर भौतिक रूप से जांचना होगा और इसके बाद रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगे। 



इस संबंध में वित्तायुक्त एवं हरियाणा राजस्व आपदा प्रबंधन के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से सभी डीसी को पत्र जारी कर निर्देश जारी किए गए हैं। पोर्टल पर किसानों को जमीन का खसरा नंबर समेत फसल के बारे में पूरी जानकारी देनी होगी। फसल बीमा कवर है या नहीं और कितनी एकड़ में फसल कितने प्रतिशत तक खराब हुई है। इसमें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना और बीज विकास निगम प्रोग्राम में कवर होने वाले किसान शामिल नहीं होंगे। 


ये जारी हुए निर्देश
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि पोर्टल पर आने वाली तमाम शिकायतों की फील्ड में पटवारियों व कानूनगो द्वारा भौतिक जांच कराई जाए। किसानों द्वारा दी गई खराबे की जानकारी और फोटोग्राफ को पटवारियों को जांच करनी होगी। आगामी सात दिनों में पटवारियों को अपनी रिपोर्ट देगी होगी। इसके बाद सरकार फसल खराबे के नियमों के अनुसार प्रभावित किसानों को मुआवजा देगी।

कपास, धान और सब्जी की फसलें प्रभावित 
पिछले पांच दिनों में प्रदेशभर में तेज बारिश हुई है। इससे कपास, धान समेत सब्जी की फसलें खराब हुई हैं। इसके साथ ही लाखों एकड़ फसल में पानी जमा हो गया है। अगर समय पर पानी की निकासी नहीं हुई तो फसलों के खराब होना तय है। करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, रोहतक, सोनीपत, झज्जर और भिवानी समेत कई जिलों में लाखों एकड़ फसल में पानी जमा है। 

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