Who is Charanjit Singh Channi: कौन हैं चरणजीत सिंह चन्नी, कैप्टन अमरिंदर की जगह बनेंगे पंजाब के नए मुख्यमंत्री

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 19 Sep 2021 06:05 PM IST

सार

चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के नए मुख्यमंत्री होंगे। रविवार को कांग्रेस हाईकमान ने उनके नाम पर अपनी मुहर लगा दी है। 
चरणजीत सिंह चन्नी
चरणजीत सिंह चन्नी - फोटो : फाइल
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विस्तार

दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के नए मुख्यमंत्री होंगे। लंबे मंथन के बाद कांग्रेस हाईकमान ने चरणजीत सिंह चन्नी को विधायक दल का नेता चुन लिया है। कांग्रेस के पंजाब प्रभारी हरीश रावत ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। चरणजीत सिंह चन्नी चमकौर साहिब विधानसभा सीट से विधायक हैं और कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार में तकनीकी शिक्षा और औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री थे। इससे पहले वह 2015 से 2016 तक पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता थे। कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार में 16 मार्च 2017 को 47 साल की उम्र में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। चमकौर साहिब सीट से चन्नी तीसरी बार विधायक हैं।
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कुछ ऐसे तय किया पार्षद से मुख्यमंत्री तक का सफर
चरनजीत सिंह चन्नी का मोहाली के खरड़ से गहरा रिश्ता है। पढ़ाई-लिखाई के बाद उन्होंने खरड़ से ही अपना राजनीतिक जीवन एक पार्षद के रूप से शुरू किया था। खरड़ में उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद से खुशी का माहौल है। घर पर माहौल खुशनुमा है। सारे रिश्तेदार और जानकार परिवार को बधाई देने पहुंच रहे हैं।


चरनजीत सिंह चन्नी मूलरूप से खरड़ के गांव बजौली के रहने वाले हैं। हालांकि अब वह खरड़ शहर में रहते हैं। चरनजीत सिंह चन्नी के पिता हरसा सिंह का खरड़ में टेंट हाउस था। कॉलेज समय में चन्नी अपने पिता के टेंट हाउस में उनकी मदद करते थे। इसके बाद जब स्नातक किया तो इन्होंने एक पेट्रोल पंप घनौली में खोला। 




खरड़ नगर परिषद ने चन्नी ने पार्षद का चुनाव लड़कर अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत की थी और बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। तत्कालीन मंत्री हरनेक सिंह घंडूआ ने किसी अन्य को नगर परिषद प्रधान बन दिया लेकिन पांच साल बाद चन्नी प्रधान बने। वह दो बार नगर परिषद के अध्यक्ष रहे। इसके बाद चन्नी ने चमकौर साहिब विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का मन बनाया और कांग्रेस से टिकट की दावेदारी की लेकिन तब उन्हें टिकट नहीं मिली। निर्दलीय चरणजीत सिंह चन्नी ने चमकौर साहिब सीट से विधासनभा चुनाव जीत दर्जकर अपने आपको साबित किया। इसके बाद अकाली दल में शामिल हुए फिर पार्टी को अलविदा कहकर कांग्रेसी हो गए। वह इस सीट से तीन बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। 

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