वार्ता फिर विफल: अब करनाल लघु सचिवालय के सामने बेमियादी धरने का एलान, किसानों ने गाड़ा तंबू

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 08 Sep 2021 08:12 AM IST

सार

28 अगस्त को करनाल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में भाजपा की बैठक थी। बसताड़ा टोल प्लाजा पर धरना दे रहे किसान जब विरोध करने के लिए चले तो इस दौरान पुलिस से उनकी झड़प हो गई। इस दौरान पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज किया, जिससे कई किसान घायल हो गए। इसके बाद करनाल के ड्यूटी मजिस्ट्रेट आयुष सिन्हा की किसानों के सिर फोड़ने के आदेश देने की वीडियो वायरल होने से मामले ने और तूल पकड़ लिया। इसी मामले से गुस्साए किसानों ने किसान महापंचायत और लघु सचिवालय का घेराव किया है।
करनाल में धरने पर बैठे किसान।
करनाल में धरने पर बैठे किसान। - फोटो : PTI
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

करनाल में लघु सचिवालय के घेराव के दूसरे दिन मंगलवार को किसान नेताओं और अफसरों के बीच शुरू हुई वार्ता फिर विफल रही। दूसरे दिन भी करीब सवा तीन घंटे चली तीन दौर की इस वार्ता में सरकार और प्रशासन ने किसानों की मांगें मानने से इनकार कर दिया। जिसके बाद किसान नेताओं ने अब लघु सचिवालय के बाहर बेमियादी धरने का एलान कर दिया है। जिस तरह से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के अनिश्चितकालीन धरने चल रहे हैं, उसी तर्ज पर अब करनाल में भी नया मोर्चा जम गया है और किसानों ने अपना तंबू गाड़ लिया है।
विज्ञापन


वार्ता विफल होने के बाद किसान नेताओं ने धरना स्थल पर पहुंचकर निर्देश देते हुए कहा कि पंजाब, हरियाणा और उतरप्रदेश के किसान लगातार यहां लघु सचिवालय के समक्ष धरने में शामिल होंगे। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि दिल्ली सीमाओं पर धरनों से हमारा ध्यान भटकाने के लिए करनाल में ऐसा विवाद खड़ा करना सरकार की एक बड़ी साजिश का हिस्सा है, जिसमें किसान फंसने वाला नहीं है। इसलिए अब यहां भी दिल्ली की तरह किसानों का पक्का मोर्चा खोल दिया गया है। 



टिकैत ने कहा कि अब करनाल के इस धरने का आगामी फैसला भी संयुक्त किसान मोर्चा करेगा। किसानों को हिदायत देते हुए टिकैत ने कहा कि धरने के दौरान सुरक्षा में तैनात जवानों से भी दूरी बनाकर रखनी है, उनसे राम-राम करने तक ही सीमित रहना है। उनके साथ किसी भी तरह से टकराव की स्थिति नहीं बननी चाहिए।

तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने, एमएसपी की गारंटी देने के साथ-साथ करनाल में दिया जा रहा यह धरना तीन अन्य मांगों पर भी आधारित है। इनमें 28 अगस्त को करनाल के बसताड़ा टोल प्लाजा पर हुए लाठीचार्ज के बाद मृतक किसान सुशील काजल के आश्रितों को 25 लाख मुआवजा, पक्की नौकरी, चोटिल किसानों को 2-2 लाख रुपये मुआवजा, उनके क्षतिग्रस्त वाहनों का मुआवजा व वायरल हुई वीडियो में किसानों का सिर फोड़ने की बात करने वाले तत्कालीन एसडीएफ आयुष सिन्हा को बर्खास्त कर उनके खिलाफ केस दर्ज करने की मांग शामिल है। 

यहीं मांगें मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने प्रशासनिक अफसरों के समक्ष बैठक के दौरान रखी। जिस पर सहमति नहीं बनी। बैठक में प्रशासन ने एसडीएम संबंधी मामले की जांच करवाने का आश्वासन दिया, जिसे किसान नेताओं ने खारिज कर दिया। टिकैत ने कहा कि जांच का कोई औचित्य नहीं है, जब वायरल वीडियो में एसडीएम खुद सिर फोड़ने की बात कहते सुनाई दे रहे हैं। इसलिए एसडीएम को बर्खास्त कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

लघु सचिवालय में अफसरों-नागरिकों को जाने से नहीं रोकेंगे
किसान नेताओं ने यह भी फैसला लिया है कि बेमियादी धरने के दौरान अफसरों और नागरिकों को लघु सचिवालय में जाने से नहीं रोका जाएगा। टिकैत ने कहा कि हम जानते हैं कि आमजन लघु सचिवालय में अपने विभिन्न कार्यों के लिए आते-जाते हैं और हमारा मकसद जनता को परेशान करना नहीं है। लेकिन जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जाती, किसान यहां से नहीं हटेंगे। उधर, देरशाम तक लघु सचिवालय के समक्ष धरना जारी रहा।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00