कृषि कानूनों के खिलाफ नई रणनीति: अब दक्षिण भारतीय किसान भी लामबंद, देशव्यापी होगा आंदोलन का स्वरूप 

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 13 Oct 2021 11:46 PM IST

सार

किसानों के नए संयुक्त मंच में पंजाब के संयुक्त मोर्चा के अलावा जिन राज्यों के किसान संगठन शामिल हो रहे हैं, उनमें हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र के किसान नेता शामिल होंगे। यह संयुक्त मंच एक नीति के तहत आंदोलन की रूपरेखा तय करेगा।
किसान आंदोलन।
किसान आंदोलन। - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ एक वर्ष से भी अधिक समय से आंदोलनरत किसानों ने हार नहीं मानी है। अब केंद्र से कड़े रवैये का मुकाबला करने के लिए किसान संगठनों ने अपने आंदोलन को राष्ट्रव्यापी बनाए जाने और आंदोलन को दक्षिण भारतीय राज्यों तक फैलाने की रणनीति बना ली है। इसके तहत पंजाब के 32 किसान संगठनों के संयुक्त संघर्ष मोर्चा और अन्य राज्यों के किसानों का एक संयुक्त मंच गठित करने का फैसला लिया गया है।
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किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने बताया कि संयुक्त मोर्चा की बैठक में उक्त फैसला लेने के साथ ही यह भी तय किया गया है कि अब देशभर में हर महीने अलग-अलग तरह से व्यापक आंदोलन किए जाएंगे हालांकि इससे आम लोगों को होने वाली परेशानी के लिए खेद भी व्यक्त किया गया है। किसानों का संयुक्त मंच अपने आंदोलन के तहत अब हर महीने सड़क और रेल यातायात रोकने के अलावा विभिन्न तरीकों से आंदोलन की गूंज को केंद्र सरकार तक पहुंचाएगा। 


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किसानों के नए संयुक्त मंच में पंजाब के संयुक्त मोर्चा के अलावा जिन राज्यों के किसान संगठन शामिल हो रहे हैं, उनमें हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र के किसान नेता शामिल होंगे। यह संयुक्त मंच एक नीति के तहत आंदोलन की रूपरेखा तय करेगा।

संयुक्त मोर्चा की बैठक में यह भी फैसला लिया गया है कि मंच में शामिल उक्त सभी राज्यों के किसान संगठनों की हर हफ्ते बैठक होगी और हर महीने किए जाने वाले आंदोलन एक ही तारीख और एक ही समय पर दिल्ली समेत विभिन्न राज्यों में शुरू होंगे।

पहला संयुक्त विरोध प्रदर्शन यूपी में
संयुक्त मंच का पहला विरोध प्रदर्शन उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी कांड के विरोध में शुरू होगा, जिसकी तारीख का फैसला संयुक्त मंच की बैठक में लिया जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन में पंजाब के 32 संगठनों के संयुक्त संघर्ष मोर्चा के अलावा बाकी आठ राज्यों के किसान संगठन भी हिस्सा लेंगे। विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तय करने के लिए संयुक्त मंच की एक बैठक जल्द बुलाने का फैसला किया गया है।

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