कृषि विधेयक: 'किसानों को डर, कहीं गेहूं-धान की हालत गन्ने-आलू जैसी न हो जाए'

सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Updated Tue, 22 Sep 2020 01:58 AM IST
विज्ञापन
धरने पर बैठे किसान (फाइल फोटो)
धरने पर बैठे किसान (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
कृषि से जुड़े विधेयकों से सबसे अधिक चिंता किसानों को खुली मंडी को लेकर है। निजी कंपनियां व शुगर मिल गन्ना किसानों का करोड़ों रुपये दबाकर बैठी हैं, जबकि आलू को कई बार किसानों को सड़कों पर फेंकना पड़ता है। आलू की सरकारी खरीद नहीं है और गन्ने का भुगतान रोककर चीनी मिलें किसानों को परेशान करती हैं। इसलिए किसान गेहूं व धान की खेती को अधिक तवज्जो देते आए हैं। 
विज्ञापन

पंजाब में बीते साल 37 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती की गई थी जबकि हर साल किसान सालाना 110-120 लाख टन चावल की पैदावर करते हैं। इन दोनों फसलों की खरीद आज तक सरकारी एजेंसियां ही खरीदती आ रही हैं, जिस कारण किसान काफी सुरक्षित महसूस करते हैं। इसके अलावा पंजाब में मक्का, गन्ने और आलू की खेती होती है। 
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सूबे में मक्का की खेती 60 हजार हेक्टेयर और बासमती की 1.2 लाख हेक्टेयर और गन्ने की खेती 80 हजार हेक्टेयर में की जाती है। इसके अलावा  2015-16 में 22,62,404 टन आलू का उत्पादन जबकि 2018-19 में 1.03 लाख हेक्टेयर में आलू की फसल लगाई गई थी और 27 लाख मीट्रिक टन आलू की पैदावार हुई थी।
विज्ञापन
आगे पढ़ें

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X