आग में खाक हुआ परिवार: हरियाणा के यमुनानगर में कबाड़ गोदाम में लगी भीषण आग, तीन बच्चों समेत पिता की जलकर मौत

संवाद न्यूज एजेंसी, यमुनानगर (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Thu, 25 Nov 2021 12:14 PM IST

सार

हरियाणा के यमुनानगर में भीषण आग ने एक परिवार को निगल लिया। पिता और तीन बच्चों की जान चली गई है। मां अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ रही है। परिवार मूलरूप से बिहार के मधुबनी का रहने वाला था। 
कबाड़ गोदाम में आग लगने से चार की मौत
कबाड़ गोदाम में आग लगने से चार की मौत - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

हरियाणा के यमुनानगर में बड़ा हादसा हो गया है। यहां सिटी सेंटर रोड पर बने कबाड़ के गोदाम में बुधवार रात दो बजे अचानक भीषण आग लग गई। आग की लपटों में तीन बच्चे और पिता की जलकर मौत हो गई, जबकि मां झुलस गई है। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि परिवार को बाहर भागने तक का मौका नहीं मिला। यह परिवार कबाड़ गोदाम के ऊपर पहली मंजिल में रह रहा था। मरने वाले सभी प्रवासी मजदूर थे, जो इसी कबाड़ की दुकान पर काम करते थे।
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हादसे में नियामुद्दीन (37), उसकी 12 वर्षीय बेटी फिजा, बेटा चांद (08), तीन वर्षीय रेहान की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि उसकी पत्नी नसीमा (25) बुरी तरह से झुलस गईं। उसे सिविल अस्पताल में दाखिल कराया गया है। मूलरूप से बिहार के जिला मधुबन के गांव मिल्कमादीपुर निवासी नियामुद्दीन पत्नी सलमा व तीन बच्चों के साथ रहता था। उसके ही क्वार्टर में यह आग लगी। 




हादसे की सूचना मिलते ही पूरा प्रशासन मौके पर पहुंच गया। आग को बुझाने के लिए मौके पर दमकल विभाग की चार गाड़ियां पर बुलाई गईं। मगर इसके बाद भी आग नहीं बुझी। इसके बाद कई और गाड़ियां बुलाई गईं। कईं घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद सुबह 10 बजे आग पर काबू पाया गया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया है।

आग की सूचना मिलते ही मोहल्ले में मची अफरा-तफरी
आग लगने के बाद पूरे मोहल्ले में ही अफरा-तफरी मच गई। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग भी बाहर आ गए। इसकी सूचना दमकल को देने के साथ-साथ बचाव का प्रयास भी किया। कुछ परिवारों को बाहर निकाल लिया गया।



गोदाम के ऊपर बने हैं कमरे
सिटी सेंटर रोड निवासी नवीन का कबाड़ का गोदाम है। करीब 40 साल से यह गोदाम बना है। इस गोदाम के ऊपर ही उन्होंने मजदूरों के लिए क्वार्टर बना रखे हैं। 22 क्वार्टर गोदाम की छत पर बने हैं। जिनमें अलग-अलग जगह से आए मजदूर अपने परिवार के साथ रहते हैं। 

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