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प्रशांत किशोर को एक रुपये तनख्वाह के शगुन के साथ पंजाब में कांग्रेस ने फूंका चुनावी बिगुल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Mon, 01 Mar 2021 07:35 PM IST

सार

किसान आंदोलन की आंच ने भारतीय जनता पार्टी और उसकी सहयोगी रही अकाली दल को पंजाब में बुरी तरह से झुलसाया। फरवरी के महीने में हुए पंजाब निकाय चुनाव के नतीजे इस बात का गवाह हैं। इन चुनावों में कांग्रेस को प्रचंड जीत मिली। सात नगर निगमों में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। अब प्रशांत किशोर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के प्रधान सलाहकार बन गए हैें। वे मात्र एक रुपये तनख्वाह का शगुन लेंगे। जानते हैं आखिर क्या हैं उनके कांग्रेस से जुड़ने के मायने। समझिए इस गणित को..
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प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर - फोटो : Twitter

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विस्तार

बंगाल में ममता दीदी को सलाह देने के बाद अब प्रशांत किशोर पंजाब के मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार के रूप में नजर आएंगे। इसके साथ ही पंजाब में वर्ष 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए हलचल शुरू हो गई है। ऐसा नहीं है कि प्रशांत किशोर पहली बार पंजाब के चुनावों का सामना करेंगे। इससे पहले 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में उनकी कंपनी आईपीएसी अपनी अहम भूमिका निभा चुकी है। 
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पंजाब में विधानसभा की 117 सीटें हैं। 2017 में कांग्रेस इनमें से 77 सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब हुई थी। कांग्रेस को यह जीत दिलाने में प्रशांत किशोर ने अहम भूमिका निभाई थी। 2016 में कांग्रेस द्वारा पंजाब के अमरिंदर सिंह के अभियान में मदद करने के लिए प्रशांत को पंजाब विधानसभा चुनाव 2017 के लिए नियुक्त किया गया था। कांग्रेस के लिए लगातार दो विधानसभा चुनाव हारने के बाद पंजाब में चुनाव प्रचार एक चुनौती थी, जिसमें उन्होंने सफलता हासिल की थी। रणदीप सुरजेवाला और शंकर सिंह वाघेला जैसे कई कांग्रेसी नेताओं ने जीत में उनकी भूमिका को अहम बताया था।


यही कारण है कि आज जब उन्हें मुख्यमंत्री ने अपने साथ जोड़ा तो खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। कैप्टन ने ट्वीट किया है कि मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि प्रशांत किशोर प्रधान सलाहकार के रूप में मेरे साथ जुड़ गए हैं। पंजाब के लोगों की भलाई के लिए हम एक साथ काम करने के लिए तैयार हैं। उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक प्रशांत किशोर का वेतन एक रुपये होगा।


 



पंजाब में कांग्रेस किसी भी हाल में किले को बचाना चाहती है। उनकी इस उम्मीद को पंजाब निकाय चुनाव के परिणामों ने और बढ़ा दिया है। ऐसे में वो भारतीय जनता पार्टी, अकाली दल और आम आदमी पार्टी को किसी भी तरह का मौका देना नहीं चाहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशांत किशोर के साथ कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारने के लिए कांग्रेस ने अभी से कमर कस ली है।

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