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RTI में खुलासाः पंजाब यूनिवर्सिटी में 27 पार्किंग की भेंट चढ़ गई सात एकड़ की हरियाली

सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 11 Oct 2018 01:39 PM IST
पंजाब यूनिवर्सिटी में 27 पार्किंग
पंजाब यूनिवर्सिटी में 27 पार्किंग
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शिक्षण संस्थानों से हरियाली को बचाने की आवाज उठती है, लेकिन पंजाब विश्वविद्यालय में यह आवाज दबकर रह गई। इसका खुलासा आरटीआई के जरिये हुआ है। पीयू ने पिछले सात साल में सात एकड़ में हरियाली को काटकर 27 पार्किंग बना डालीं। इस साल कितने पौधे लगाए गए इसका आंकड़ा पीयू प्रशासन ने अभी सार्वजनिक नहीं किया है। आरटीआई के आधार पर पता चला है कि पीयू में दस एकड़ में पार्किंग बनी है। इसमें सात एकड़ में पक्की पार्किंग है जबकि तीन एकड़ में कच्ची।
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इन वर्षों में पार्किंग एक नंबर गेट के पास बनाई गई। इसके अलावा साउथ कैंपस के गेट नंबर एक व दो के पास सर्वाधिक ग्रीनरी थी। उसेे भी उजाड़कर पार्किंग बना दी गई। धनास की तरफ जाने वाले मार्ग पर भी पार्किंग बनाई गई। कई विभागों की पार्किंग भी पीयू ने बनाई। कितने पेड़ पार्किंग के समय काटे गए, यह आंकड़ा पीयू के पास भी नहीं है लेकिन सूत्र बताते हैं कि 600 से अधिक पेड़ों पर आरी चल चुकी है। इसके बदले में दस गुना पौधे लगने चाहिए थे लेकिन ऐसा भी नहीं किया गया। लगातार पौधरोपण का आंकड़ा कम होता चला गया।

ये पौधे लगाए हैं
पीयू प्रशासन ने इन सात सालों में महज 989 पौधे लगाए हैं। वर्ष 2015 में 190 पौधे लगाए गए। 2016 में 177, वर्ष 2017 में 115 पौधे लगाए गए। आंकड़ों के मुताबिक हर साल पौधे लगाने का ग्राफ गिरता गया।

पेड़ों को बचाने के लिए भूख हड़ताल
साउथ कैंपस के गेट नंबर एक व दो पर पार्किंग बनाने के लिए पेड़ों को काटने का काम शुरू किया था तो स्टूडेंट्स ने आंदोलन कर दिया था। लगभग एक सप्ताह तक भूख हड़ताल भी की गई। कई बार आंदोलन हुए लेकिन काम नहीं आए। लगातार ग्रीनरी कम होती जा रही है।

ये हैं आंकड़े
पीयू का कुल एरिया        542 एकड़
ग्रीन एरिया                   331 एकड़
कुल पेड़                      7720
सात साल में लगाए गए पेड़   989
पेड़ों की प्रजाति                55
बनाई गई पक्की पार्किंग       7 एकड़
कच्ची पार्किंग एरिया           3 एकड़

ये थे विकल्प
- पौधों को काटने की बजाय खाली पड़े मैदान में पार्किंग बनाई जा सकती थी।
- पेड़ों को बचाकर पार्किंग बनाई जा सकती थी।
- बाहरी वाहनों पर रोक लगाकर पार्किंग की संख्या कम की जा सकती थी।

पेड़ काटने के हैं सर्वाधिक नुकसान
पीयू के पर्यावरण विभाग के प्रोफेसर हरमिंदर पाल सिंह कहते हैं कि शहरीकरण के कारण पौधे काटे जा रहे हैं जो नहीं होना चाहिए। यदि 25 साल में कोई पेड़ तैयार हुआ है तो उसके बदले में दस पेड़ भी लगा देंगे तो उसकी भरपाई नहीं हो पाएगी। उसकी पत्तियों से निकलने वाला ऑक्सीजन, फल-फूल, छांव आदि खत्म होते जाते हैं।

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