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पंजाब यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति को लेकर पूर्व वीसी ग्रोवर फंसे, जानिए मामला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 05 Dec 2018 12:43 PM IST
Punjab University Formar VC Arun Grover
Punjab University Formar VC Arun Grover
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अमान्य पीएचडी होने के बाद भी पंजाब विश्वविद्यालय के पूर्व वीसी प्रो. एके ग्रोवर ने दो अभ्यर्थियों का चयन असिस्टेंट प्रोफेसर के पद कर दिया। इसका खुलासा सिंडिकेट की ओर से बनाई गई जांच कमेटी ने किया है। कई गंभीर बातें इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखी हैं। इससे पूर्व वीसी पूरी तरह फंस गए हैं। हालांकि उन पर कार्रवाई होगी या नहीं, इसका निर्णय 8 दिसंबर को होने वाली सिंडिकेट की बैठक में लिया जाएगा।
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सीएमजे यूनिवर्सिटी शिलांग, मेघालय से सात अभ्यर्थी 2015 में पीएचडी करके लौटे थे। तब उन्होंने यहां के डिग्री कॉलेजों में नौकरी के लिए अप्लाई किया। बताया जाता है कि 2014 में ही मेघालय सरकार ने इस विश्वविद्यालय से पीएचडी किए हुए स्टूडेंट्स की डिग्री अवैध घोषित कर दी थी। इसका पत्र बाकायदा वहां की सरकार ने पीयू को भेजा।

आरोप है कि पता होने के बाद भी यहां के डीएवी कॉलेज में दो अभ्यर्थियों का चयन असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कर दिया। उन्हें कंप्यूटर साइंस विभाग में तैनाती मिली। यह मामला 30 मार्च को सिंडिकेट की बैठक में उठा और मीटिंग में तीन सदस्यीय कमेटी जांच को बना दी गई। इसमें प्रो. अशोक गोयल, डॉ. प्रभजीत सिंह व प्रो. परविंदर सिंह शामिल रहे।

यह कमेटी इस प्रकरण की जांच को मेघालय गई। वहां की सरकार व संबंधित विश्वविद्यालय पहुंची। सभी तथ्य जुटाए और टीम वहां से लौटी। इस टीम ने रिपोर्ट वीसी को भेजी है। उधर, जांच टीम मेंबर डॉ. प्रभजीत सिंह ने कहा कि अभ्यर्थियों का चयन डीएवी में असिस्टेंट प्रोफेसर्स की पोस्ट पर किया गया था जो अवैध है, क्योंकि उनकी पीएचडी की डिग्रियां अवैध हैं।  

मेरे पास कोई अतिरिक्त भूमिका नहीं थी। पूरी प्रक्रिया डीसीडीसी द्वारा की गई थी। सिंडिकेट से कुछ छुपा नहीं है।
- प्रो. एके ग्रोवर, पूर्व वीसी

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