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चंडीगढ़ PGI की उपलब्धि: उत्तर भारत में पहली बार ऑडिटरी ब्रेनस्टेम इंप्लांट, बच्चे को सुनने-बोलने लायक बनाया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 30 Aug 2022 04:09 PM IST
सार

ऑडिटरी ब्रेनस्टेम इंप्लांट सुनने की शक्ति खो देने वाले लोगों को सुनने की शक्ति वापस लौटाने के लिए किया जाता है। यह ट्रीटमेंट उन्हीं लोगों के लिए है जो सुन नहीं सकते हैं।

सर्जरी करने वाली पीजीआई के डॉक्टरों की टीम।
सर्जरी करने वाली पीजीआई के डॉक्टरों की टीम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

चंडीगढ़ पीजीआई के ओटोलर्यनोलॉजी विभाग ने सुन और बोल नहीं पाने वाले ढाई साल के बच्चे की ऑडिटरी ब्रेनस्टेम इंप्लांट सर्जरी कर एक और उपलब्धि हासिल की है। पीजीआई का दावा है कि उत्तर भारत में पहली बार यह सर्जरी की गई है। इससे पहले चेन्नई में ही ऑडिटरी ब्रेनस्टेम इंप्लांट सर्जरी होती रही है। बच्चा सर्जरी के बाद बोलने और सुनने लगा है।



 विभाग के प्रमुख डॉ. नरेश पांडा ने बताया कि जिन बच्चों में जन्मजात कोक्लीय या कोक्लीयर नस नहीं होती है या काम नहीं करती है, उनमें यह सर्जरी करनी पड़ती है। विभाग पिछले 19 साल से कोक्लीय प्रत्यारोपण कार्यक्रम चला रहा है। पहली हमने चेन्नई के डॉक्टरों के नेतृत्व में ऑडिटरी ब्रेनस्टेम इंप्लांट सर्जरी की है।


ऑडिटरी ब्रेनस्टेम इंप्लांटेशन उन रोगियों में किया जाता है, जिनमें कोक्लीय और कोक्लीयर तंत्रिका या तो अनुपस्थित हैं या अच्छी तरह से काम नहीं कर रही हैं। वयस्कों में ऑडिटरी ब्रेनस्टेम इंप्लांट द्विपक्षीय ध्वनिक न्यूरोमा को हटाने के बाद किया जाता है, ऑडिटरी ब्रेनस्टेम इंप्लांट कोक्लीय और कोक्लीयर नर्व को बायपास करता है। इंप्लांट को ब्रेनस्टेम में रखा जाता है।

इन डॉक्टरों ने टीम रही शामिल
पीजीआई के ईएनटी विभाग के प्रमुख डॉ. नरेश पांडा, न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. प्रवीन, ऑडियोलाजी के डॉ. संजय मुंजाल, डॉ. पारुल सूद, एनीस्थीसिया विभाग की डॉ. निधि पांडा, डॉ. बबिता घई की ओर से यह सर्जरी चेन्नई के प्रो. मोहन कामेश्वरम, प्रो. एमसी वासुदेवन और प्रो. रजनीथ राजेसवरण के नेतृत्व में टेली कंसल्टेशन के माध्यम से की गई।

ऑडिटरी ब्रेनस्टेम इंप्लांट क्या है?
ऑडिटरी ब्रेनस्टेम इंप्लांट सुनने की शक्ति खो देने वाले लोगों को सुनने की शक्ति वापस लौटाने के लिए किया जाता है। यह ट्रीटमेंट उन्हीं लोगों के लिए है जो सुन नहीं सकते हैं। आमतौर पर यह एक बहुत छोटी ऑडिटरी नर्व या आंतरिक कान के न होने पर किया जाता है। ऑडिटरी ब्रेनस्टेम इंप्लांट सीधे ब्रेन के मार्ग में ऑडिटरी मार्ग को उत्तेजित कर आंतरिक कान और ऑडिटरी नर्व को दरकिनार करता है। ऑडिटरी ब्रेनस्टेम इंप्लांट मूलरूप से न्यूरोफा इब्रोमैटोसिस टाइप 2 के निदान वाले लोगों के लिए निकाला गया था। यह एक रेयर जेनेटिक स्थिति है, जो ट्यूमर को नसों पर बढ़ने का कारण बनती है।

ऑडिटरी ब्रेनस्टेम इंप्लांट के मुख्य रूप से तीन भाग हैं
  • ऑडिटरी ब्रेनस्टोम इंप्लांट में ध्वनियों को लेने के लिए कान के पीछे एक माइक्रोफोन और साउंड प्रोसेसर लगा होता है
  • इसमें माइक्रोफोन द्वारा ली गई जानकारी को प्रसारित करने के लिए एक डिकोडिंग चिप त्वचा के नीचे रखी होती है
  • वहीं इलेक्ट्रोड सीधे ब्रेनस्टेम से जुड़े होते हैं, जो उत्तेजित होने पर आपको ध्वनि के लिए एक्टिव कर देते हैं
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