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अमर उजाला, पिंड दियां गलियाः गांव दड़वा में समस्याओं का जाल

Panchkula bureauपंचकुला ब्‍यूरो Updated Mon, 17 Feb 2020 02:12 AM IST
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चंडीगढ़। दड़वा 200 वर्ष पुराना गांव है। 40 हजार की आबादी वाला दड़वा रेलवे स्टेशन से सटा है। हैरानी की बात है कि गांव सड़क, बिजली, सीवर, सफाई, स्टार्म वाटर लाइन, गलियां, स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। बता दें कि दड़वा को नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा का पुरस्कार मिल चुका है।
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गांव की फिरनी हालत ठीक है, लेकिन रेलवे रोड को बैंक के साथ लगती सड़क बदहाल है। यहां से विकास नगर की ओर जाने के लिए लोगों को बड़ी जद्दोजहद करना पड़ता है। ये सड़कें कब बनेंगी, इस बारे में किसी को भी पता नहीं। बारिश होने पर काफी परेशानी होती है।
यह कहना है लोगों का....
सीवर की समस्या गंभीर
सीवर की पाइप वर्षों पुरानी है। इसे बदलने की जरूरत है। 30 वर्ष से एक ही पाइप चला आ रहा है। पहले आबादी कम थी, अब बढ़ गई है। अक्सर गांव का सीवर ओवर फ्लो होता है।
-जगमोहन सिंह, गांव दड़वा
स्ट्रीट लाइट नहीं जलती
स्टेशन से जब गांव की ओर आते हैं तो सड़क के साथ ही गांव की गलियों में अंधेरा रहता है। स्ट्रीट लाइट नहीं जलती। शाम होते ही अंधेरा होता है। लाइट की व्यवस्था तो होनी चाहिए।
-अरुण कुमार, गांव दड़वा
गाड़ियों और रेहड़ियों से जाम
गांव के अंदर से शाम को निकलना मुश्किल होता है। जाम लगा रहता है। लोग गलियों और सड़कों पर गाड़ी और रेहड़ी लगा देते हैं। कोई रोकनेवाला नहीं है। सड़क पर रेहड़ी लगाकर माल बेचते हैं।
-विद्या दत्त पंत, गांव दड़वा
पानी की समस्या है गंभीर
गांव में पानी की गंभीर समस्या है। लो प्रेशर के अलावा एक घंटा बड़ी मुश्किल से पानी आता है। यह हम सभी के लिए संकट की घड़ी है। अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे। आबादी कम थी तो जरूरत पूरी हो जाती थी। अब नहीं।
-जीएस रावत, गांव दड़वा
पार्किंग की समस्या विकराल
गांव में पार्किंग की गंभीर समस्या है। वाहनों की संख्या काफी बढ़ गई है। बड़े-बड़े होटल बन गए हैं, लेकिन पार्किंग की सुविधा नहीं है। लोग सड़कों और गलियों में वाहन खड़ा कर देते हैं
-हजारा सिंह, गांव दड़वा।
लाल डोरा से बाहर बने मकान नियमित हों
लाल डोरा से बाहर बने मकानों को नियमित किया जाए। नगर निगम में शामिल होने के समय कहा गया था कि बाहर बने मकानों को नियमित किया जाएगा लेकिन अभी तक यह काम नहीं हुआ।
-गुरप्रीत सिंह हैप्पी, पूर्व सरपंच गांव दड़वा
तारों का जाल खतरनाक
गांव में बिजली की तारों का गुच्छा लटकता दिखाई देता है। कई बार स्पार्क होकर आग भी लग चुकी है। बिजली विभाग इस पर ध्यान दे। केबल को सही तरीके से रख रखाव हो ताकि दिकक्त न हो।
रोशल लाल, पूर्व पंच गांव दड़वा
एक जंज घर बनाया जाए
पानी की समस्या के साथ-साथ टूटी सड़कें भी समस्या है। स्ट्रीट लाइट नहीं जलती है। नगर निगम और प्रशासन इसे ठीक करे ताकि नागरिकों को सुविधा मिल सके। गांव के लोगों के लिए एक जंज घर बनाया जाए।
-एसएस सजवाण, गांव दड़वा
बिना मोटर के पानी नहीं चढ़ता
पानी की गंभीर समस्या से लोग परेशान हैं। मोटर के सहारे ही लोगों को पानी मिल रहा है। पिछले 20 साल से इस समस्या से गांव के लोग जूझ रहे हैं। बिजली का बिल भी घरों तक नहीं पहुंचाया जा रहा है।
-रामनाथ, गांव दड़वा
गंदे पानी की आपूर्ति
गढ़वाल कालोनी के कई घरों में गंदा पानी की आपूर्ति होती है। मकान नंबर कोई फिक्स नहीं है। इससे डाक विभाग के कर्मचारियों को काफी दिक्कत होती है। मकानों की सही तरीके से नंबरिंग जरूरी है।
-मनवर सिंह, गांव दड़वा
बिल आता है, पानी नहीं
बिल तो आता है, लेकिन पानी नहीं आता। पानी की समस्या से गांव के लोग वर्षों से जूझ रहे हैं, लेकिन इस पर कोई सुन नहीं रहा है। नगर निगम और प्रशासन इस पर ध्यान दे। यह बहुत ही जरूरी है।
-गुलाब सिंह, गांव दड़वा
घर घर में फैक्टरी चल रही है, प्रदूषण
कई घरों में फैक्टरी चल रही है। इससे प्रदूषण फैल रहा है। इन्हें रोकने वाला कोई तो होगा। आखिर यह स्थिति क्यों बनी। नमकीन और चिप्स की फैक्टरी से काफी परेशानी बढ़ रही है। पुलिस की पेट्रोलिंग होनी चाहिए।
-दयानंद कोठियाल, गांव दड़वा
लड़ाई पर उतारू हो जाते हैं
जाम की हालत ऐसी है कि साइकिल को भी निकलने की जगह नहीं मिलती। छोटे-छोटे बच्चे ओवर राइडिंग करते हैं। काफी तेज से मोटरसाइकिल चलाते हैं। रोकने पर लड़ाई करने लग जाते हैं।
-कमल सिंह, गांव दड़वा
मकान नियमित होंगे तो समस्याएं खत्म होंगी
प्रशासन को चाहिए कि गांव में लाल डोरा से बाहर बने मकानों को नियमित करे। मकानों के नियमित होने से सभी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। प्रशासन इस मांग को जल्द पूरा करे।
पूनम वर्मा, गांव दड़वा
कच्ची गलियां पक्की हों
गांव में लाल डोरा से बाहर बने मकानों को नियमित किए जाने के साथ ही कच्ची गलियों को पक्का किया जाना बहुत ही जरूरी है। बारिश में काफी परेशानी होती है। इससे हम गांव के लोगों को छुटकारा मिले।
-प्रिया, गांव दड़वा
सीवर की समस्या परेशान करने वाली
सीवर जाम से काफी परेशानी होती है। नगर निगम इस पर ध्यान दे। स्टार्म वाटर की लाइन में भी पानी जमा रहता है। स्टार्म वाटर की लाइन केवल बरसाती पानी की निकासी के लिए है।
कुलवंत कौर, गांव दड़वा
निगम में शामिल होने के बाद बढ़ी दिक्कतें
गांव जब ग्राम पंचायत के अंदर था तो लोगों को काफी सुविधा थी। नगर निगम में शामिल होने के बाद पता ही नहीं चलता कि अपनी समस्या किस बताएं जो हल करे। कोई सुनने को तैयार ही नहीं है।
-सरोजनी शर्मा, गांव दड़वा
गांव में गंदगी का अंबार लगा
नगर निगम में शामिल होने के बाद सफाई की व्यवस्था ठीक नहीं है। इसे तुरंत सुधारना चाहिए। पहले सरपंच को बताते थे तो सभी समस्याएं हल हो जाया करती थी। अब काफी दिक्कत हो रही है।
-ओमवती, गांव दड़वा
गांव में मिठाइयों की काफी दुकानें, जांच करे प्रशासन
नगर निगम या प्रशासन यहां पर बनी मिठाइयों की दुकानों की समय समय पर जांच करे। कहीं मिलावटी तो नहीं है। प्रशासन को समय समय पर छापेमारी करनी चाहिए ताकि लोगों की सेहत से खिलवाड़ न हो।
-कुलविंदर सिंह, गांव दड़वा
गांव में पब्लिक टायलेट नहीं
गांव में बाहर के आदमी आ जाएं तो उनके लिए काफी परेशानी होती है। गांव में कोई भी पब्लिक टायलेट नहीं है। लावारिस पशु और कुत्ते काफी परेशानी पैदा कर रहे हैं। लाल डोरा से बाहर बने मकानों में रहने वालों को पानी का मीटर लगाना मुश्किल हो रहा है।
-केवल कृष्ण, गांव दड़वा
सत्कार बुजु़र्गां दा...
1950 में बना था रेलवे स्टेशन : नसीब सिंह
गांव के बुजुर्ग नसीब सिंह (90) का कहना है कि 1950 में रेलवे स्टेशन का निर्माण हुआ। पहले दौर में गांव मौलीजागरां, रायपुर कलां, मक्खन माजरा और रायपुर खुर्द के साथ दड़वा पंचायत का गठन हुआ था। 1973 में गांव की पंचायत बनी। पहले सरपंच बने लक्ष्मण सिंह। उस समय गांव में 25 या 26 घर थे। कुल आबादी छह सौ और वोट मात्र 150 थे। इस गांव की पंचायत को किसी समय सरकार ने रेडियो मुहैया कराया था। 2018 में पंचायतें समाप्त कर दी गईं। अब गांव को नगर निगम में शामिल कर लिया गया है। बरात बैलगाड़ी पर जाते थे। आने जाने के साधन नहीं थे। कुराली तक मेला देखने के लिए पैदल ही जाते थे।
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गांव का इतिहास...
इस स्थान पर जंगल था। एक हजार बीघा के मौजे पर दड़वा गांव बसा। सबसे पुराना धार्मिक स्थान लाला वाला पीर है। उसके बाद मंदिर और गुरुद्वारा बने। गांव के जद्दी लोग बहुत ही कम हैं, जबकि बाहर से आए लोगों की आबादी काफी है। 1960 में गांव में 25 घर थे। कोई भी दुकान नहीं थी। नमक मिर्च के लिए भी मनीमाजरा जाना पड़ता था।
अब यह हाल है
लाल डोरे के अंदर करीब सात एकड़ रकबा में करीब 175 मकान हैं, जबकि लाल डोरा से बाहर बड़ी संख्या में मकान हैं। 100 गोदाम बन गए हैं। यही नहीं, 50 से अधिक होटल भी बन गए है। गांव में संपर्क सेंटर, पंचायत, डिस्पेंसरी, मार्केट और मुख्य धार्मिक स्थान हैं।
गांव की आबादी 35000
मकान 2000
मतदाता 10000
लाल डोरा के अंदर बने मकान 175
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