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हरियाणाः अवैध बैंक खातों पर होगी कार्रवाई, कड़े होंगे खाता खोलने के नियम

यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 09 Aug 2018 09:40 AM IST
सांकेतिक तस्वीर
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हरियाणा सरकार के सरकारी विभागों और स्वायत्त संस्थानों का अब कोई भी अवैध खाता बैंकों में नहीं होगा। ऑनलाइन बजट एलोकेशन मानिटरिंग एंड एनालिसिस सिस्टम शुरू होने के बाद एक से अधिक खाते किसी विभाग के सरकार की मंजूरी बिना होने पर संबंधित सक्षम अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा सरकार बैंकों में विभागों और स्वायत्त संस्थानों के खाते खोलने के नियम और कड़े करने जा रही है। छोटे बैंकों में कोई खाता नहीं खोला जाएगा। सरकार पैसा डूबने का कोई रिस्क नहीं लेना चाहती।
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 इसके साथ ही केंद्रीय परियोजनाओं के खाते केंद्र सरकार से मंजूरी लेने के बाद ही राज्य सरकार के खातों में मर्ज किए जाएंगे। वहीं बैंकों में अगर किसी भी विभाग की अलग बैंक खाते में एफडी है तो उसे भी तोड़ने से फिलहाल परहेज किया जाएगा। सरकार एफडी टूटने से ब्याज में होने वाला नुकसान नहीं उठाना चाहती। अब हर विभाग का प्री और पोस्ट ऑडिट भी होगा। 

इससे पता चल सकेगा कि कितना बजट समयबद्ध तरीके से खर्च हुआ है। हरियाणा सरकार विधानसभा के मानसून सत्र से पहले बैंक खाते खोलने के नियम भी और कड़े करने जा रही है। इसके लिए बकायदा निर्देशिका जारी की जाएगी। वित्त विभाग सभी विभागों, निकायों, बोर्डों और स्वायत संस्थाओं के खातों की मैपिंग जल्दी पूरी करेगा ताकि यह बता चल सके कि कितनी राशि बिना उपयोग के खातों में बरसों से पड़ी हुई है। 

ज्यादा ब्याज देने वाले बैंकों में खुलेंगे खाते 
वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि अभी बहुत से छोटे-छोटे खातों की मैपिंग होनी है। उनमें से अगर खाते अवैध निकलते हैं तो कार्रवाई की जाएगी। अगर किसी विभाग के खाते का ब्याज किसी अधिकारी की जेब में जा रहा है तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराएंगे। प्रदेश में बैंकों की 4827 शाखाएं हैं, सभी में जमा सरकारी राशि की पाई-पाई का हिसाब जुटा रहे हैं। बैंकों की सरकार के साथ संबद्घता भी की जा रही है।

 इसके बाद बिड्स निकाली जाएंगी, जो बैंक सबसे अधिक ब्याज देगा, उसमें ही सरकारी खाते खुलेंगे। सरकार राज्य सहकारी बैंकों को भी प्रोत्साहित करेगी ताकि उनकी वित्तीय स्थिति सुधारी जा सके। वित्त विभाग के प्रधान सचिव टीवीएसएन प्रसाद ने बताया कि सरकारी विभागों को मिलने वाला बजट ट्रेजरी में रहता है, जबकि स्वायत्त संस्थानों को सरकार अनुदान देती है, जिसे वह अपने संसाधनों से जुटाए धन के साथ मिलाकर खर्च करते हैं। इसमें यूनिवर्सिटी, सार्वजनिक उपक्रम, बोर्ड व केंद्र से बजट शेयर पाने वाले संस्थान शामिल हैं। 

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