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आर्थिक सर्वे 2019: बढ़नी चाहिए नौकरियां, न्यूनतम आय और रिटायरमेंट की उम्र

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 04 Jul 2019 04:57 PM IST
economic survey 2019
economic survey 2019 - फोटो : PIB
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संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वे में इस बार फोकस नौकरियों की संख्या बढ़ाने और श्रम कानून में सुधार करने पर बल दिया गया है। इसके साथ ही रिटायरमेंट की उम्र और न्यूनतन वेतन की सीमा को भी बढ़ाने के लिए कहा गया है। 

राजस्थान का दिया उदाहरण

श्रम कानून में सुधार होने से काफी लोगों को नौकरियां मिल सकती है। राजस्थान का उदाहरण देते हुए आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन  ने कहा कि ऐसा पूरे देश में किया जा सकता है। सर्वे में कहा गया कि लेबर, पूंजी और उत्पादकता को देखते हुए कहा जा सकता है कि श्रम कानून में सुधार से उद्योग जगत को बढ़त और रोजगार बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
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 जिन राज्यों में अभी तक श्रम कानून में किसी तरह का कोई सुधार नहीं किया गया है, वहां पर नौकरियां बढ़ाने को लेकर के दिक्कतें देखी जा रही हैं। इस वजह से कारोबारी भी पैसा लगाने से डर रहे हैं। 

न्यूनतम आय में हो बढ़ोतरी

आर्थिक सर्वेक्षण में न्यूनतम आय को बढ़ाने के लिए बात कही गई है। इसका कहना है कि न्यूनतम मजदूरी या फिर आय को बढ़ाने से गरीब लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। 

महिलाओं को मिले समान वेतन

सर्वे में महिलाओं को भी पुरुषों के समान वेतन देने की सिफारिश की गई है। वेतन या फिर मजदूरी बढ़ने से लोगों की खपत में बढ़ोतरी तो होगी, इसके साथ ही यह मध्यम वर्ग के लिए भी लाभकारी होगा। सर्वे में कहा गया है कि केंद्र सरकार को पूरे देश के लिए इसकी घोषणा करनी चाहिए ताकि इसका फायदा पूरे देश में लोगों को मिल सके। 

बढ़नी चाहिए रिटायरमेंट की उम्र

सर्वे में रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का भी प्रस्ताव दिया गया है। कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने सुझाव दिया है कि 2021-41 की अवधि में श्रम बल की हिस्सेदारी के रूझानों के हिसाब से सरकार को अतिरिक्त रोजगार के अवसर सृजित करने होंगे, ताकि श्रम बल में सलाना हो रही वृद्धि के हिसाब से रोजगार भी उपलब्ध कराए जा सके। इसलिए रिटायरमेंट की उम्र को बढ़ा दिया जाए, ताकि आने वाले दिनों में कई नीतिगत कठिनाईयों को कम किया जा सके।  

न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए मानदंड

मजदूरी विधेयक के बारे में कोड में न्यूनतम मजदूरी तय करने के दो कारकों यानी (i) कौशल युक्त श्रेणी, जिसमें अकुशल, अर्द्ध कुशल, कुशल और अत्याधिक कुशल लोग होंगे; और (ii) भौगोलिक क्षेत्र, अथवा अन्यथा दोनों पर विचार किया जाना चाहिए। इस महत्वपूर्ण परिवर्तन से देश में न्यूनतम मजदूरी लेने वाले लोगों की संख्या में पर्याप्त कमी आएगी।

कवरेज

मजदूरी विधेयक पर प्रस्तावित कोड में सभी क्षेत्रों में रोजगारों/श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी की उपयुक्तता का विस्तार किया जाए और इसमें संगठित तथा असंगठित दोनों क्षेत्रों को शामिल किया जाए।

नियमित रूप से सुधार और प्रौद्योगिकी की भूमिका

न्यूनतम मजदूरी का नियमित रूप से और अधिक तेजी से तालमेल करने के लिए एक प्रकिेया विकसित की जानी चाहिए। केन्द्र में एक राष्ट्रीय स्तर का डैश बोर्ड बनाया जा सकता है, जिसकी पहुंच राज्य सरकारों तक हो, जबकि राज्य न्यूनतम मजदूरी के संबंध में अधिसूचनाओं को नियमित रूप से अपडेट कर सकते हैं। 

यह पोर्टल कॉमन सर्विस सेंटरों (सीएससी), ग्रामीण हाटों आदि में अवश्य उपलब्ध हो, जिसमें आवश्यक जनसंचार कवरेज हो, ताकि श्रमिकों को अपने सौदेबाजी के कौशल की पूरी जानकारी रहे और उसकी निर्णय करने की शक्ति मजबूत हो।आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि एक प्रभावी न्यूनतम मजदूरी प्रणाली की स्थापना एक तात्कालिक आवश्यकता है, जिसका विकास के विविध आयामों पर लाभकारी प्रभाव पड़ेगा।          

 

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