जीएसटी के तीन साल : करदाता बढ़े और बढ़ी जटिलताएं पर कर संग्रह नहीं बढ़ा

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Updated Thu, 02 Jul 2020 04:38 AM IST
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जीएसटी - फोटो : SELF

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एकल कर व्यवस्था के तौर पर बुधवार को जीएसटी लागू हुए तीन साल बीत गए। लेकिन यह अपने उद्देश्यों में पूरी तरह सफल नहीं हुआ। व्यापारी जहां इसकी जटिलता से परेशान हैं, तो सरकार को भी अपेक्षित कर संग्रह नहीं होने से निराशा है।
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1 जुलाई, 2017 को 17 तरह के टैक्स को मिलाकर जीएसटी कानून लागू करते समय सरकार ने इसे दूसरी आजादी बताया था।
उम्मीद थी कि इससे टैक्स चोरी रुकेगी, करदाताओं की संख्या बढ़ेगी और महंगाई में गिरावट के साथ अर्थव्यवस्था में भी इजाफा होगा। सरकार ने उम्मीद भी जताई थी कि हर महीने 1.5 लाख करोड़ का जीएसटी संग्रह होगा, लेकिन अभी तक 1 लाख करोड़ के जीएसटी संग्रह में भी निरंतरता नहीं आ सकी है।
पहले उपभोक्ताओं को वैट 14.5 फीसदी, उत्पाद शुक्ल 12.5 फीसदी के साथ कुल 31 फीसदी तक टैक्स देना पड़ता था। साथ ही कई रिटर्न भी भरने पड़ते थे और कई विभागों की जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। अब इन सबसे तो छुटकारा मिल गया है।
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सरल नहीं बन सकी प्रक्रिया

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