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ICMF Inauguration: राष्ट्रपति ने वैज्ञानिक समुदाय से कहा- सामाजिक जिम्मेदारी का रास्ता अपनाएं

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विवेक दास Updated Tue, 27 Sep 2022 04:42 PM IST
सार

ICMF Inauguration: कार्यक्रम के दौरान बाेलते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि इस ऐतिहासिक मौके पर मैं अपने सम्मानित पूर्ववर्ती डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का स्मरण कर रही हूं। ऐसे तो हम हम उन्हें 'भारत के मिसाइल मैन' के रूप में जानते हैं, पर उनके जीवन का एक और पहलू था जिस पर मैं कुछ प्रकाश डालना चाहती हूं। उन्होंने लगातार सामाजिक समावेश के साथ-साथ तकनीकी विकास का मार्ग भी अपनाया था। 

आईसीएमएफ के उद्घाटन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
आईसीएमएफ के उद्घाटन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू - फोटो : Social Media
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विस्तार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को वैज्ञानिक समुदाय से सामाजिक जिम्मेदारी के मार्ग पर चलने और ‘स्वदेशीकरण की भावना’ को आत्मसात करने का आह्वान किया है। इस दौरान उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह सुनिश्चित करना सभी की संयुक्त जिम्मेदारी होनी चाहिए कि 2047 का भारत अधिक समृद्ध और मजबूत राष्ट्र हो। 

राष्ट्रपति ने बेंगलुरु में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की एकीकृत क्रायोजेनिक इंजन निर्माण सुविधा (इंटिग्रेटेड क्रायोजेनिक इंजन मैन्यूफक्चरिंग फैसिलिटी, ICMF) का उद्घाटन करने और जोनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (दक्षिण क्षेत्र) की आधारशिला रखने रखने के दौरान ये बातें कही हैं।

कार्यक्रम के दौरान बाेलते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि इस ऐतिहासिक मौके पर मैं अपने सम्मानित पूर्ववर्ती डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का स्मरण कर रही हूं। ऐसे तो हम हम उन्हें 'भारत के मिसाइल मैन' के रूप में जानते हैं, पर उनके जीवन का एक और पहलू था जिस पर मैं कुछ प्रकाश डालना चाहती हूं। उन्होंने लगातार सामाजिक समावेश के साथ-साथ तकनीकी विकास का मार्ग भी अपनाया था। 

इस दौरान राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि विज्ञान एक अभूतपूर्व क्रांति ला सकता है और जनता के जीवन को छू सकता है। जैसे डॉ. कलाम ने भी 'कलाम-राजू स्टेंट' को डिजाइन करके जनता के जीवन को छुआ था। उन्होंने कहा कि यह एक स्वदेशी कोरोनरी स्टेंट था जिससे हजारों रोगियों को मदद मिली क्योंके यह स्टेंट आयातित स्टेंट की तुलना में सस्ती थी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाईटेक उपकरणों से लैस प्लांट का किया उद्घाटन

देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 4500 वर्गमीटर में फैले और 70 हाईटेक उपकरणों से लैस इस संयंत्र का मंगलवार को उद्घाटन किया। इस संयंत्र में भारतीय रॉकेटों के क्रायोजेनिक (CE20) और सेमी क्रायोजेनिक (SE2000) इंजनों का निर्माण और टेस्टिंग की सुविधाएं मौजूद हैं।   

वर्ष 2013 में एचएएल और इसरो के बीच हुआ था करार

बता दें कि वर्ष 2013 में एचएएल के एयरोस्पेस डिवीजन में क्रायोजेनिक इंजन मॉड्यूल के निर्माण की सुविधा स्थापित करने के लिए इसरो के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया था। इसके बाद इसमें 208 करोड़ रुपये के निवेश के साथ आईसीएमएफ की स्थापना के लिए 2016 में संशोधन किया गया।

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2023 से शुरू जाएगा मॉड्यूल का निर्माण 

एचएएल की बेंगलुरु स्थित मुख्यालय की ओर से सोमवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि रॉकेट इंजन्स के निर्माण और असेंबलिंग के लिए सभी जरूरी उपकरण स्थापित कर दिए गए हैं। इस संयंत्र में मार्च 2023 से माड्यूल तैयार होने शुरू हो जाएंगे। बता दें कि हिंदुस्तान के एयरोस्पेस डिविजन में पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी), जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV MK-II) और GSLV MK-III के लिक्विड परोपेलेंट टैंक व लॉन्च व्हीकल स्ट्रक्चर का निर्माण किया जाता है। 

क्रायोजेनिक इंजन के निर्माण में चुनिंदा देशों को ही हासिल है महारत 

एचएएल की ओर से जारी बयान में यह भी कहा गया है कि कंपनी बेंगलुरु स्थित संयंत्र में इसरो को एक छत के नीचे ही पूरी रॉकेट इंजन मैन्युफैक्चरिंग की सुविधाएं मुहैया कराएगी। उसके अनुसार दुनिया भर में लॉन्च व्हीकल्स में बड़े पैमाने पर क्रायोजेनिक इंजन्स का इस्तेमाल होता है। क्रायोजेनिक इंजन्स की जटिलता को देखते हुए अमेरिका, फ्रांस, जापान चीन और रूस जैसे कुछ बड़े देश ही इसके निर्माण की तकनीक में महारत रखते हैं।

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