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बजट 2019: बचा है सिर्फ एक दिन, वित्त मंत्री से यह है आस

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 04 Jul 2019 05:10 PM IST
Budget 2019 Expectations: to be presented on 5 july by Nirmala Sitharaman
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पांच जुलाई को देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण साल 2019-20 का बजट पेश करेंगी और इससे ठीक पहले वे आर्थिक सर्वेक्षण लेकर आएंगी। बजट से सरकार की अर्थव्यवस्था को लेकर विजन का पता चलता है और इसीलिए इसपर सबकी नजरें रहेंगी। जहां फरवरी में अंतिरिम बजट में हुई घोषणाओं को भी अंतिम रूप में पेश किया जाएगा। 

सरकार के लिए बड़ी चुनौती

स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी कार्वी के सीईओ राजीव सिंह का कहना है कि, जैसा कि हमें पता है कि बजट बनाने का काम पहले ही शुरू हो चुका है और अर्थव्यवस्था को सुस्ती के दौर से दोबारा पटरी पर लाना नई सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। वैश्विक अर्थव्यवस्था भी कठिन दौर से गुजर रही है, व्यापार युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक है और इसीलिए सरकार के लिए चुनौती बड़ी है। 

अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए सरकार के पास दो रास्ते

सरकार और बैंकिंग रेगुलेटर दोनों को मिलकर मौजूदा लिक्विडिटी की किल्लत से निपटने की जरूरत है। अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए सरकार सैद्धान्तिक रूप से दो रास्ते अपना सकती है। पहला इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाया जाए और दूसरा सरकारी बैंकों को रिकैपिटलाइज किया जाए। साथ ही खपत बढ़ाने और आयकर दाताओं और MSME सेक्टर को अतिरिक्त राहत देने से भी इस दिशा में मदद मिलेगी। 

कॉरपोरेट टैक्स पर हो सकती है घोषणा

कॉरपोरेट टैक्स की बात करें तो बजट में इसकी 25 फीसदी की थ्रेसहोल्ड लिमिट बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल जिनका टर्नओवर 250 करोड़ रुपये से कम है, उनपर 25 फीसदी कॉरपोरेट टैक्स लागू है, इस लिमिट को बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये तक किया जा सकता है। हालांकि सरकार ने स्टार्टअप्स को एंजेल टैक्स नियमों में ढील देकर कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। 

इक्विटी कल्चर को दिया जा सकता है बढ़ावा 

हमारा मानना है कि पिछले साल पेश किए गए लांग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (LTCG) के बारे में दोबारा सोचने की जरूरत है। लोगों के निवेश और ऊंची बचत को फाइनेंस के लिए भारत में लांग टर्म इक्विटी कैपिटल की जरूरत है। आम तौर पर कंपनियां कर्ज के रूप में पूंजी जुटाती हैं, पूंजी को बढ़ने के लिए वक्त की दरकार होती है। हालांकि कंपनियां शेयर, कर्ज या हाइब्रिड इंस्ट्रूमेंट से फाइनेंस कर सकती हैं। हमें लगता है कि एलटीसीजी को कतरकर देश मे इक्विटी कल्चर को बढ़ावा दिया जा सकता है। साथ ही जब एलटीसीजी है तो सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी सीटीटी को भी हटाने और डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन नियमों को भी आसान बनाने की जरूरत है। 
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