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सरकार का प्लान, निजी क्षेत्र के 40 विशेषज्ञ बनेंगे केंद्र में अफसर

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 12 Jun 2019 06:06 PM IST
dopt plans to induct 40 private domain expert personal as deputy secretary
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केंद्र सरकार ने एक नया प्लान बनाया है, जिसके तहत निजी क्षेत्र के 40 विशेषज्ञों को ब्यूरोक्रेसी में शामिल किया जाएगा। यह लोग केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में काम करेंगे। फिलहाल कार्मिक मंत्रालय इसका प्रस्ताव तैयार कर रहा है। 

आईएएस अधिकारी बनते हैं निदेशक, उप सचिव

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अभी तक इस पद पर केवल ग्रुप ए वाले आईएएस अधिकारियों या फिर केंद्रीय सेवा से प्रमोट किए गए अधिकारियों की नियुक्ति होती है। कार्मिक मंत्रालय के सचिव सी. चंद्रमौली ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों से इसके बारे में प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा है। 

40 विशेषज्ञों की होगी नियुक्ति

फिलहाल ऐसे 40 विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी। इनको फिक्सड टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर रखा जाएगा। नीति आयोग भी ऐसे विशेषज्ञों को उप सचिव से लेकर के संयुक्त सचिव के पद पर रखेगी। फिलहाल सरकार ऐसे लोगों को सलाहकार के पद पर नियुक्त कर रही है। 

जल्द जारी होगा विज्ञापन

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) इस बारे में जल्द ही एक विज्ञापन को जारी करेगा। इससे पहले अप्रैल में नौ व्यक्तियों को संयुक्त सचिव के पद पर नियुक्त किया था। संयुक्त सचिव पर ज्यादातर आईएएस, आईपीएस या फिर अन्य प्रमुख सेवाओं के लोगों को नियुक्त किया जाता है। 

इतने समय के लिए होगी नियुक्ति

इनकी नियुक्ति तीन साल के लिए होगी और अगर अच्छा प्रदर्शन हुआ तो पांच साल तक के लिए इनकी नियुक्ति की जा सकती है। इनका वेतन केंद्र सरकार के अंतर्गत ज्वाइंट या फिर डिप्टी सचिव वाला होगा। सारी सुविधा उसी अनुरूप ही मिलेगी।
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इन्हें सर्विस रूल की तरह काम करना होगा और दूसरी सुविधाएं भी उसी अनुरूप मिलेंगी। मालूम हो कि किसी मंत्रालय या विभाग में संयुक्त सचिव का पद काफी अहम होता है और तमाम बड़े नीतियों को अंतिम रूप देने में या उसके अमल में इनका अहम योगदान होता है। 

2005 से लंबित था प्रस्ताव

ब्यूरोक्रेसी में लैटरल एंट्री का पहला प्रस्ताव 2005 में ही आया था, जब प्रशासनिक सुधार पर पहली रिपोर्ट आई थी। लेकिन तब इसे सिरे से खारिज कर दिया गया। फिर 2010 में दूसरी प्रशासनिक सुधार रिपोर्ट में भी इसकी अनुशंसा की गई। लेकिन पहली गंभीर पहल 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद हुई। पीएम मोदी ने 2016 में इसकी संभावना तलाशने के लिए एक समिति बनाई, जिसने अपनी रिपोर्ट में इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ने की अनुशंसा की। 

सूत्रों के अनुसार ब्यूरोक्रेसी के अंदर इस प्रस्ताव पर विरोध और आशंका दोनों रही थी, जिस कारण इसे लागू करने में इतनी देरी हुई। अंतत: पीएम मोदी के हस्तक्षेप के बाद मूल प्रस्ताव में आंशिक बदलाव कर इसे लागू कर दिया गया। हालांकि पहले प्रस्ताव के अनुसार सचिव स्तर के पद पर भी लैटरल एंट्री की अनुशंसा की गई थी।

सरकार का मानना है कि लैटरल एंट्री आईएएस अधिकारियों की कमी को पूरा करने का भी प्रभावी जरिया बनेगा। 

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