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बिहार

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2020

बिहार: सिविल सर्जन ने झोलाछाप डॉक्टरों को कोरोना इलाज में किया शामिल, सरकार ने की कार्रवाई

बिहार सरकार ने सिवान के सिविल सर्जन डा अशेष कुमार को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए जिले के सभी प्रखंडों में झोलाछाप चिकित्सकों को चिन्हित करते हुए उनसे इलाज के लिए सहमति पत्र प्राप्त कर प्रशिक्षण देने के संबंध में आदेश निर्गत करने पर निलंबित कर दिया है।

विभाग द्वारा इस संबंध में बुधवार को जारी एक आदेश के अनुसार, डा अशेष द्वारा इस आदेश के निर्गमन के पूर्व न तो विभाग से अनुमति ली गई और ना ही विभाग को इसकी सूचना दी गई। 

डा अशेष ने कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए सिवान जिला के सभी प्रखंडों में झोलाछाप चिकित्सकों को चिन्हित करते हुए उनसे इलाज के वास्ते सहमति पत्र प्राप्त कर प्रशिक्षण देने के संबंध में जिलान्तर्गत सभी उपाधीक्षक एवं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को अपने क्षेत्रों में संचालित निजी अस्पताल एवं झोलाछाप चिकित्सकों की सूची मांगी थी।

आदेश के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस आशय का पत्र सिवान सिविल सर्जन के स्तर से निर्गत करने से कोविड-19 संकमण से रोकथाम के लिए विभाग एवं राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे सभी प्रयास कमजोर हुए प्रतीत होते हैं। इस पत्र के सोशल मीडिया पर वायरल होने से विभाग को आलोचना झेलनी पड़ी।
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बिहार: तब्लीगी जमात के समर्थकों ने किया हमला, पथराव में चार पुलिसकर्मी घायल

बिहार के मधुबनी जिला के अंधराथाडी थाने के गिदडगंज गांव में बुधवार को तब्लीगी जमात के समर्थकों ने पुलिस पर हमला कर दिया। इससे चार पुलिस कर्मी घायल हो गए। दरअसल, ये ग्रामीण जन लॉकडाउन का उल्लंघन कर दीनी मज्लिस आयोजित कर रहे थे। पुलिस के रोकने पर ग्रामीणों ने पथराव कर दिया।

स्थानीय पुलिस अधीक्षक सत्य प्रकाश ने बुधवार को बताया कि यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि उक्त मज्लिस में शामिल हुए लोग क्या दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज के कार्यक्रम में शामिल होकर लौटे थे या नहीं। उन्होंने बताया कि मंगलवार देर रात पुलिसकर्मियों पर पथराव करने वालों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने अपने ट्विटर हैंडल पर दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज के कार्यक्रम में शामिल लोगों से अपील की है कि वे हेल्पलाइन नंबर पर फोन करें या नजदीकी सरकारी अस्पतालों में जाकर अपना स्वास्थ्य परीक्षण करा लें।

बता दें कि बिहार में अब तक 81 लोगों की पहचान की गई है, जो दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में मरकज कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उनमें से पटना और बक्सर जिलों में कुल 30 लोगों की पहचान कर उनकी जांच की जा रही है।
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निजामुद्दीन मरकज से आए 30 लोगों का बिहार में पता चला, 18 मार्च के बाद आए सभी लोगों का अब होगा कोरोना टेस्ट

कोरोना वायरस के पिछले कुछ घंटों में तेजी से मामले सामने आए हैं। केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से हर छोटी-बड़ी घटनाओं पर नजरें रखी जा रही हैं। हालांकि, इस बीच दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज की घटना ने प्रशासन और राज्य सरकारों के होश उड़ा दिए हैं। बिहार में भी रविवार को 99 लोगों के सैंपल लिए गए थे। इनमें से 24 लोग कोरोना वायरस के टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए। बिहार स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव संजय कुमार ने कहा है कि हमें 81 लोगों की एक सूची मिली है, जो मरकज सभा (निजामुद्दीन, दिल्ली) में शामिल थे। यहां से भाग कर पटना आए 17 और बक्सर आए 13 लोगों का पता लगाया जा चुका है। उन्होंने आगे कहा कि जल्द ही दूसरे लोगों का भी पता लगा लिया जाएगा।

इससे पहले संजय कुमार ने बताया कि बिहार में बुधवार की सुबह तक Covid-19 के 23 मामले सामने आए हैं। राज्य सरकार की तरफ से फैसला लिया गया है कि उन सभी लोगों का कोरोना टेस्ट किया जाएगा, जो 18 मार्च के बाद बाहर से आए हैं। बिहार सरकार की तरफ से यह फैसला इसलिए लिया गया है, क्योंकि जिन लोगों में पहले कोई भी लक्षण नहीं थे, अब टेस्ट में वो भी पॉजिटिव पाए गए हैं।

 बता दें कि कोरोना वायरस महामारी से अब तक भारत में 38 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, देशभर में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के 1637 मामले सामने आए हैं। 
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लॉकडाउन में बिहार के बाहर फंसे लोगों को सरकार देगी 1,000 रुपये, ऐसे करें अप्लाई

कोरोना वायरस फैलने के बाद देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई है। इसके बाद दिल्ली जैसे शहर से कई लोगों ने घरों के लिए पलायन किए। कई लोग पैदल भी अपने घरों की ओर रवाना हुए। लॉकडाउन के बाद केंद्र और राज्य सरकार की ओर से हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए और लोगों के खाने के लिए अलग-अलग जगहों पर इंतजाम किए गए। लॉकडाउन में बिहार के बाहर फंसे बिहार के लोगों के लिए बिहार सरकार ने भी कुछ जरूरी कदम उठाए हैं जिनमें लोगों के खाते में 1,000 हजार रुपये देने जैसी कदम शामिल है। अब सवाल यह है कि इसके लिए अप्लाई कैसे करें, चलिए हम आपको बताते हैं...

बिहार के बाहर फंसे लोगों को कैसे मिलेंगे 1,000 रुपये
  1. सबसे पहले आपको बिहार सरकार की आपदा प्रबंधन वेबसाइट पर जाना है। वेबसाइट पर जाने के लिए यहां क्लिक करें।
  2. इसके बाद बिहार कोरोना तत्काल सहायता मोबाइल एप के बैनर पर क्लिक करें।
  3. इसके बाद आपके फोन में एक APK फाइल डाउनलोड होगा जिस पर क्लिक करने के बाद एप डाउनलोड होगा।
  4. इसके बाद मोबाइल नंबर, आधार नंबर और बैंक डीटेल के साथ आपको एक फॉर्म भरना होगा।
  5. इसके बाद आधार कार्ड की फोटो और सेल्फी अपलोड करना होगा। 
  6. इसके बाद मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा और रजिस्ट्रेशन हो जाएगा।
  7. रजिस्ट्रेशन के बाद सरकार आपके खाते में पैसा ट्रांसफर कर देगी।
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नीतीश कुमार (फाइल फोटो) नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

बिहार में दो लाख प्रवासी मजदूरों का बनेगा जॉब कार्ड, सरकार देगी रोजगार

बिहार सरकार ने दिल्ली, मुंबई आदि महानगरों से अपना काम छोड़कर बिहार लौटने वाले बेरोजगार मजदूरों के रोजगार के लिए काम शुरू कर दिया है। इन मजदूरों को अब नौकरी के लिए ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। सरकार राज्य में बाहर से आए करीब दो लाख प्रवासी मजदूरों का जॉब कार्ड बनवाएगी।

राज्य के ग्रामीण विकास विभाग ने पहले चरण में इन सभी मजदूरों को मनरेगा जॉब कार्ड देने का फैसला किया है। खास बात यह है कि सभी मजदूरों का ऑन स्पॉट जॉब कार्ड बनेगा। राज्य के सीमावर्ती जिलों में फंसे और अपने जिले के स्कूलों में ठहरे इन मजदूरों का प्राथमिकता के आधार पर मनरेगा कार्ड बनाया जाएगा।

इससे इन मजदूरों की नौकरी खोजने और पैसा कमाने की परेशानी का निदान एक हद तक हो जाएगा। जॉब कार्ड बनवाने के लिए इनको भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी, कार्ड इनके ठहराव स्थल पर ही बनाया जाएगा। 

मनरेगा के अफसर और पंचायत रोजगार सेवक इनके पास जाएंगे और सभी का जॉब कार्ड वहीं बनाएंगे। पहचान का काम पंचायत के मुखिया करेंगे और पहचान स्थापित होते ही जॉब कार्ड बना दिया जाएगा।

सरकार की कोशिश है कि सभी जिलों में एवं खासकर सीवान, गोपालगंज आदि सीमावर्ती जिलों में ठहरे मजदूरों का जॉब कार्ड इसी लॉकडाउन के दौरान बन जाए, ताकि लॉकडाउन खत्म होने पर इन लोगों को मनरेगा के तहत रोजगार मिल पाए।

विभाग ने सभी मजदूरों से सामाजिक दूरी के आधार पर काम लेने का फैसला किया है। जॉब कार्ड बनाने का निर्देश जल्दी सभी डीएम को भेजा जाएगा। केंद्र की ओर से मनरेगा फंड की मंजूरी मिल गई है।

इसके लिए केंद्र सरकार ने 700 करोड़ रुपये दिए हैं। इन मजदूरों का सर्वाधिक उपयोग जल-जीवन व हरियाली अभियान में किया जाएगा। सभी को जॉब कार्ड के तहत मजदूरी का भुगतान किया जाएगा।
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बिहार में फिर चमकी बुखार की दस्तक, मुजफ्फरपुर के अस्पताल में भर्ती हुए छह बच्चे

देश में फैले कोरोना वायरस महामारी के बीच बिहार में एक बार फिर से एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (चमकी बुखार) ने दस्तक दी है। इस इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के कारण इस साल अब तक मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल ( एसकेएमसीएच) में छह बच्चों को भर्ती कराया गया है। इनमें से तीन का अभी भी इलाज चल रहा है, दो को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और एक बच्चे की मौत हो गई है।
 


एसकेएमसीएच में पिछले साल भी चमकी बुखार का प्रकोप देखने को मिला था। अकेले इस अस्पताल में चमकी बुखार से करीब 150 बच्चों की मौत हो गई थी और पूरे बिहार में इस बीमारी की वजह से तकरीबन 200 बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

राज्य सरकार ने इस बीमारी से निपटने के लिए टीकाकरण अभियान की शुरुआत की थी। खास कर मुजफ्फरपुर में बच्चों का टीकाकरण किया गया था। लेकिन इस साल भी इस बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती हो रहे बच्चे, सरकार के टीकाकरण पर सवाल खड़े कर रहे हैं।  
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लालू प्रसाद यादव को झटका, पैरोल पर नहीं निकल पाएंगे जेल से बाहर

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के पैरोल पर जेल से बाहर निकलने की उम्मीदों को झटका लगा है। झारखंड के जेलों में कोरोना संक्रमण न फैले इसके लिए उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में तय किया गया कि आर्थिक आपराधिक और सात साल से ज्यादा सजा वालों को पैरोल नहीं दी जाएगी।

वहीं, गंभीर आपराधिक मामलों को छोड़ सात साल से कम सजा वाले कैदियों की पैरोल का विरोध सरकार अदालत में नहीं करेगी। उन सभी मामलों में संबंधित कोर्ट ही फैसला करेगा। इस बैठक के बाद लालू प्रसाद के पैरोल पर चल रही बहस थम गई। क्योंकि लालू यादव को आर्थिक अपराध का आरोपी होने के कारण पैरोल नहीं मिल पाएगा।

बैठक में हाईकोर्ट के जस्टिस एससी मिश्रा, मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, जेल आईजी शशि रंजन व डालसा के सचिव मौजूद थे। झारखंड के जेल आईजी शशि रंजन ने कहा कि कोरोना को लेकर राज्य के जेलों में भीड़ को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सात साल से कम सजा वाले कैदियों को पैरोल पर छोड़ा जाए। ताकि इस संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

झारखंड के केंद्रीय काराओं की क्षमता 14 हजार 114 है, जिसमे वर्तमान में 18742 कैदी रह रहे हैं। जेल आईजी ने बताया कि केंद्रीय कारा से कैदियों को मंडल व उपकाराओं में शिफ्ट किया जाएगा। हालांकि इस दौरान कैदियों की अदालतें नहीं बदलेंगी।
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कोरोना के चलते लालू यादव को राहत मिलने के आसार, जेल से हो सकते हैं रिहा

लालू प्रसाद यादव
देश में कोरोना वायरस संक्रमण के बीच जेल में बंद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को राहत मिल सकती है। लालू प्रसाद यादव लंबे समय से जेल में बंद हैं। हालांकि, कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए उन्हें राहत मिल सकती है। सूत्रों की मानें तो लालू यादव जेल से बाहर आ सकते हैं, सरकार उन्हें पैरोल देने पर विचार कर रही है।

रिपोर्ट्स की मानें तो लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत पैरोल दिया जा सकता है। बता दें कि कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जेल प्रशासन को सजायाफ्ता कैदियों को पैरोल देने के मामले में फैसला सुनाया था।

बता दें कि लालू यादव की तबीयत पिछले कुछ समय से ठीक नहीं चल रही है। यही कारण है कि वह रिम्स के पेइंग वार्ड में भर्ती हैं। इससे पहले आठ सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने उनके इलाज की समीक्षा की थी, जहां यह तय हुआ कि लालू प्रसाद यादव को फिलहाल एम्स अस्पताल भेजने की जरूरत नहीं है। इस दौरान लालू प्रसाद यादव के किडनी की जांच के लिए एम्स से एक नेफ्रोलॉजिस्ट बुलाया जाएगा। ऐसे में अगर नेफ्रोलॉजिस्ट उन्हें इलाज के लिए रिम्स से बाहर भेजने को कहता है, तब उन्हें भेजने पर फैसला लिया जा सकता है। 

बता दें कि कोरोना वायरस से देश भर में अब तक 4421 लोग प्रभावित हैं। वहीं, इस महामारी की वजह से देशभर में अब तक 114 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, 325 लोग ऐसे हैं जो इस बीमारी से पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं।
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कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में होगा पंचायतों का इस्तेमाल, छोटे इलाकों को मिलेगा फायदा

कोरोना वायरस को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन से सारे कारोबार बंद हो चुके हैं। ऐसे में इसका बड़ा असर मजदूर और गरीब तबके पर देखने को मिल रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार की तरफ से दिए जा रहे राहत पैकेज में कई सुविधाएं हैं, लेकिन कई गरीब परिवार ऐसे हैं जिनके पास राशन कार्ड नहीं हैं। ऐसे लोगों की मदद के लिए बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जिन 30 लाख लोगों के राशन कार्ड के आवेदन पहले रद्द कर दिए गए थे, अब उनकी फिर से जांच की जाएगी। इसके अलावा कोविड-19 से सुरक्षा के लिए सुशील मोदी ने पंचायतों को पांचवे वित्त आयोग की अनुदान राशि खर्च करने को कहा है। 

सुशील मोदी ने कहा कि पंचायतें पांचवे वित्त आयोग से मिली अनुदान राशि से नागरिकों, कर्मचारियों और आइसोलेशन वार्ड में रह रहे लोगों को मास्क, सैनिटाइजर, साबुन, गलब्स जैसी चीजों को मुहैया कराने के लिए खर्च कर सकेंगी। उन्होंने आगे कहा कि इस राशि से गांव या छोटे शहरों में सैनिटाइजेशन करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही कोरोना वायरस को रोकने के लिए कई उपाय किए जा सकेंगे। इनमें ब्लिचिंग पाउडर और अन्य चीजों का छिड़काव शामिल है। सुशील मोदी ने कहा कि ग्राम पंचायतों के अनुदान मद में 9 लाख रुपये, पंचायत समितियों में 20 लाख और जिला परिषद के अनुदान मद में 2 करोड़ तक की राशि रखी हुई है। 

उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने इस दौरान कहा कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए इलाज से ज्यादा बचाव जरूरी और कारगर साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन करने से मुश्किलें तो हुईं हैं, लेकिन इसके चलते कोरोना वायरस से होने वाली मौतों को कम रखने में बड़ी कामयाबी मिली है। 

सुशील मोदी ने कोरोना वायरस महामारी को लेकर सोमवार को टेली कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्वास्थ मंत्री मंगल पांडेय और उनके साथ 600 से अधिक भाजपा मंडल अध्यक्षों से बात की। इस दौरान कोरोना की सारी जानकारी और उससे बचाव के लिए सभी लोगों को ‘आरोग्य सेतु एप’ को डाउनलोड करने की बात कही गई। इस, एप के जरिए अगर कोई भी व्यक्ति कोरोना पॉजीटिव मरीज के पास जाता है तो उन्हें अलर्ट मिल जाएगा। 
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बिहारः राज्यपाल, मुख्यमंत्री ने संक्रमण समाप्त करने में एकजुटता के लिए दीप जलाए

बिहार के राज्यपाल फागू चौहान और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोरोना वायरस को समाप्त करने के लिए एकजुटता और दृढ़संकल्प जताने के लिए रविवार की रात दीप जलाए।

राज्यपाल फागू चौहान ने राजभवन में रविवार रात नौ बजे नौ मिनट तक दीप जलाकर कोरोना-संकट को समाप्त करने के लिए जारी संघर्ष की सफलता के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अपील के आलोक में कोरोना-संकट के अंधकार से निबटने के लिए रोशनी जलाकर सभी लोगों ने जिस राष्ट्रीय-सामाजिक एकता और दृढ़संकल्प को अभिव्यक्त किया है, उससे यह एहसास मजबूत हुआ है कि भारत किसी भी प्रकार की चुनौती से निबटने में तत्पर और सक्षम है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सरकारी आवास एक अणे मार्ग में दीप जला कर कोरोना संक्रमण के विरूद्ध अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की।

उन्होंने कहा कि इससे हमारी दृढ़ इच्छाशक्ति और मजबूत हुई है। हमें पूरा विश्वास है कि सम्पूर्ण देशवासियों की एकजुटता से हम सब जल्द ही कोरोना संक्रमण से मुक्ति पाने में सफल होंगे। बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी व उनकी पत्नी ने भी एकजुटता प्रकट करने के लिए दीप जलाया।

सुशील मोदी ने कहा कि बिहार के लोगों ने रात नौ बजे दीए या कैंडल जला कर जिस उत्साह से प्रधानमंत्री के प्रकाश अभियान का समर्थन किया, उसके लिए वे सभी वर्ग का कोटि-कोटि अभिनंदन करते हैं।

बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राजद की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री राबडी देवी और उनके बडे पुत्र तेजप्रताप यादव जलता हुआ लालटेन ले कर खड़े हुए। यह उनकी पार्टी का चिह्न भी है।
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बिहार से बाहर फंसे मजदूरों के लिए नीतीश सरकार ने जारी किए सवा 10 करोड़ रुपये

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रदेश के बाहर लॉकडाउन में फंसे राज्य के मजदूरों एवं जरूरतमंद 103579 लोगों के खातों में 10 करोड़ 35 लाख 79 हजार रुपये की राशि सोमवार को अंतरित की।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बताया कि एक हजार रुपये की दर से प्रदेश के लोगों को सहायता राशि दी गई और आज ही इस योजना का शुभारंभ किया गया। उन्होंने बताया कि आज योजना का शुभारंभ होते ही बिहार के बाहर फंसे 103579 लोगों के खाते में 10 करोड़ 35 लाख 79 हजार रुपये की राशि अंतरित की गई। मुख्यमंत्री ने माउस क्लिक कर योजना का किया शुभारंभ किया।

बिहार के बाहर अन्य राज्यों में फंसे बिहार के प्रति लोगों को 1000 रुपये उनके बैंक खाते में भेजने की योजना की शुरुआत हुई है। इसके लिए अब तक दो लाख 84 हजार 674 आवेदन प्राप्त हुए हैं। सीएम ने इन आवेदनों की जांच के बाद अन्य लोगों के खाते में जल्द ही राशि भेजने का निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।

नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार के बाहर दिल्ली और दूसरे शहरों में लोगों की मदद के लिए कैंप चलाए जा रहे हैं। दिल्ली में दस जगहों पर कैंप बनाकर लोगों को भोजन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने अफसरों से कहा कि इन जगहों की लगातार निगरानी करते रहें, ताकि वहां जिस चीज की जरूरत हो, उसे तत्काल उपलब्ध कराया जा सके।
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कोरोना वायरस: बिहार में एक नया मामला, संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 32 हुई

बिहार में भी कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि सरकार की कोशिशों की वजह से प्रदेश में स्थिति नियंत्रण में है। भागलपुर जिले में कोरोना वायरस संक्रमण के एक अन्य मामले की पुष्टि होने के बाद प्रदेश में इस रोग से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है। वहीं इससे मुंगेर निवासी एक मरीज की 21 मार्च को मौत हो गई थी।

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) संजय कुमार ने शनिवार को बताया कि भागलपुर के नौगछिया निवासी एक व्यक्ति के कोरोना वायरस संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि 65 वर्षीय उक्त व्यक्ति पिछले 18 मार्च को ब्रिटेन से अपने घर लौटे थे।

बिहार में अबतक मुंगेर जिला में 7, सिवान में 6, पटना एवं गया में में 5-5, गोपालगंज में 3, नालंदा में 2, लखीसराय, बेगूसराय, सारण और भागलपुर में एक-एक व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। बिहार में अब तक तक कोरोना वायरस के 2292 संदिग्ध नमूने की जांच की जा चुकी है जिसमें से अब तक 2257 निगेटिव पाए गए हैं ।

गौरतलब है कि कतर से लौटे मुंगेर निवासी एक मरीज जिसकी 21 मार्च को पटना एम्स में मौत हो गई थी, के संपर्क में बीते दिनों 64 व्यक्ति आए थे जिनमें से 55 के नमूने जांच के लिए आरएमआरआई में भेजे गए थे। इसमें से अबतक 11 कोरोना वायरस संकमित पाए गए हैं। बिहार में अबतक दो कोरोना संक्रमित मरीज ठीक भी हुए हैं जिन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है।
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बिहार: लॉकडाउन के दौरान दुर्व्यवहार और शराब पीने के आरोप में चार पुलिसकर्मी बर्खास्त

बिहार सरकार ने लॉकडाउन  के दौरान वरीय अधिकारी से आपत्तिजनक व्यवहार करने और शराब सेवन करने के आरोप में चार पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

पुलिस मुख्यालय से शुक्रवार को प्राप्त जानकारी के अनुसार 28 मार्च को औरंगाबाद जिला स्थित तिवारी बिगहा बस स्टैण्ड रफीगंज के पास अंचलाधिकारी अवधेश कुमार सिंह के साथ सिपाही दिलीप कुमार द्वारा आपत्तिजनक व्यवहार किए जाने की सूचना पर रफीगंज प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं थानाध्यक्ष घटनास्थल पर पहुंचे।

इसी बीच उनके द्वारा चरवाहा विद्यालय स्थित बिहार सैन्य पुलिस कैम्प से साथी जवानों को बुलाकर उपस्थित अंचलाधिकारी, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी एवं थानाध्यक्ष के साथ भी उदण्डतापूर्ण दुर्व्यहार किया गया।

घटना में शामिल जवानों में से तीन जवान राकेश कुमार, पप्पु कुमार और सरोज कुमार शराब के नशे की स्थिति में पाए ग, जिसकी पुष्टि चिकित्सीय जांच से हुई। तीनों सिपाहियों के विरुद्ध बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद :संशोधित: अधिनियम-2018 के अन्तर्गत मामला दर्ज कर न्यायिक हिरासत में भेजा दिया गया है।
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