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Bihar: 'न्यायाधीश' बना तो जेल गया, निकला तो ED 'निदेशक' बना! पटना के इस शख्स के फर्जीवाड़े की रोचक कथा पढ़िए
Fri, 01 May 2026 11:10 AM IST
Aditya Anand
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: Aditya Anand
Updated Fri, 01 May 2026 11:10 AM IST
सार
Bihar News: प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक का कॉल आया तो डीएम पहले सोचने लगे। फिर प्राथमिकी दर्ज कराई तो यह वही शख्स निकला, जिसने पिछली दफा बिहार का तत्कालीन डीजीपी के पास न्यायाधीश बनकर एक आईपीएस की पैरवी की थी।
अभिषेक अग्रवाल।
- फोटो : अमर उजाला
2022 में पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश के नाम से तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को फोन करके झांसा देने वाला अभिषेक अग्रवाल फिर से सुर्खियों में है। चार साल बाद उसे बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स की टीम ने पटना के कोतवाली थाना इलाके से गिरफ्तार किया है। इस बार आरोप लगा है कि अभिषेक लंबे समय से प्रवर्तन निदेशालय का फर्जी अधिकारी बनकर पटना समेत कई जिलों के लोगों को फर्जी कॉल कर ठगी कर रहा था। वह अपना शिकार सरकार कर्मचारियों को भी बना रहा था। इस मामले को लेकर 28 अप्रैल को भोजपुर के नवादा थाना में एक प्राथमिकी दर्ज की गई।
27 अप्रैल को डीएम को फर्जी ईडी अधिकारी बनकर किया था कॉल
पुलिस ने वैज्ञानिक अनुसंधान किया तो कॉल करने वाले का टॉवर लोकेशन पटना के नागेश्वर कॉलोनी का मिला। इसके बाद भोजपुर पुलिस ने एसटीएफ की मदद से छापेमारी की तो आरेपी अभिषेक अग्रवाल पकड़ा गया। एसटीएफ ने उसे नवादा थाने की पुलिस को सुपुर्द कर दिया है। उसके खिलाफ आर्थिक अपराध इका, पटना के खाजेकलां में भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस की मानें तो अभिषेक अग्रवाल फर्जी अधिकारी बनकर प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को कॉल करता था। 27 अप्रैल को उसने जब डीएम तनय सुल्तानिया को फर्जी ईडी अधिकारी बनकर कॉल किया तो डीएम कार्यालय की ओर से नवादा थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई। इसके बाद पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच में जुटी और आरोपी अभिषेक अग्रवाल को गिरफ्तार किया।
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2022 में पटना हाईकोर्ट के जज के नाम से तत्कालीन डीजीपी को किया था कॉल
वर्ष 2022 में टाइल्स व्यवसायी अभिषेक अग्रवाल ने पटना हाई कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस संजय करोल के नाम से तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को कॉल किया था। उसने एक केस में गया के पूर्व एसएसपी आदित्य कुमार के हित में फैसला देने का दबाव बनाया था। एसके सिंघल के आदेश पर अभिषेक अग्रवाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 353, 387, 149, 420, 467, 468, 120 (बी) तथा आई टी एक्ट की धारा 66 (सी), 66 (डी) के अंतर्गत आर्थिक अपराध थाना (पटना) कांड संख्या 33/2022 दर्ज किया गया था। आर्थिक अपराध इकाई भी इसकी जांच कर रही थी। जांच में पता चला कि अभिषेक के संबंध के बिहार के कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के साथ। वह आसानी से अधिकारियों के साथ घुल मिल जाता था। उसकी कई तस्वीरे भी अधिकारियों के साथ सामने आई। डीजीपी को जज बनकर कॉल करने के आरोप में वह जेल भी गया था। इसके बाद कोर्ट ने उसे जमानत दे दी।
27 अप्रैल को डीएम को फर्जी ईडी अधिकारी बनकर किया था कॉल
पुलिस ने वैज्ञानिक अनुसंधान किया तो कॉल करने वाले का टॉवर लोकेशन पटना के नागेश्वर कॉलोनी का मिला। इसके बाद भोजपुर पुलिस ने एसटीएफ की मदद से छापेमारी की तो आरेपी अभिषेक अग्रवाल पकड़ा गया। एसटीएफ ने उसे नवादा थाने की पुलिस को सुपुर्द कर दिया है। उसके खिलाफ आर्थिक अपराध इका, पटना के खाजेकलां में भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस की मानें तो अभिषेक अग्रवाल फर्जी अधिकारी बनकर प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को कॉल करता था। 27 अप्रैल को उसने जब डीएम तनय सुल्तानिया को फर्जी ईडी अधिकारी बनकर कॉल किया तो डीएम कार्यालय की ओर से नवादा थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई। इसके बाद पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच में जुटी और आरोपी अभिषेक अग्रवाल को गिरफ्तार किया।
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2022 में पटना हाईकोर्ट के जज के नाम से तत्कालीन डीजीपी को किया था कॉल
वर्ष 2022 में टाइल्स व्यवसायी अभिषेक अग्रवाल ने पटना हाई कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस संजय करोल के नाम से तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को कॉल किया था। उसने एक केस में गया के पूर्व एसएसपी आदित्य कुमार के हित में फैसला देने का दबाव बनाया था। एसके सिंघल के आदेश पर अभिषेक अग्रवाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 353, 387, 149, 420, 467, 468, 120 (बी) तथा आई टी एक्ट की धारा 66 (सी), 66 (डी) के अंतर्गत आर्थिक अपराध थाना (पटना) कांड संख्या 33/2022 दर्ज किया गया था। आर्थिक अपराध इकाई भी इसकी जांच कर रही थी। जांच में पता चला कि अभिषेक के संबंध के बिहार के कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के साथ। वह आसानी से अधिकारियों के साथ घुल मिल जाता था। उसकी कई तस्वीरे भी अधिकारियों के साथ सामने आई। डीजीपी को जज बनकर कॉल करने के आरोप में वह जेल भी गया था। इसके बाद कोर्ट ने उसे जमानत दे दी।
विस्तार
2022 में पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश के नाम से तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को फोन करके झांसा देने वाला अभिषेक अग्रवाल फिर से सुर्खियों में है। चार साल बाद उसे बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स की टीम ने पटना के कोतवाली थाना इलाके से गिरफ्तार किया है। इस बार आरोप लगा है कि अभिषेक लंबे समय से प्रवर्तन निदेशालय का फर्जी अधिकारी बनकर पटना समेत कई जिलों के लोगों को फर्जी कॉल कर ठगी कर रहा था। वह अपना शिकार सरकार कर्मचारियों को भी बना रहा था। इस मामले को लेकर 28 अप्रैल को भोजपुर के नवादा थाना में एक प्राथमिकी दर्ज की गई।
27 अप्रैल को डीएम को फर्जी ईडी अधिकारी बनकर किया था कॉल
पुलिस ने वैज्ञानिक अनुसंधान किया तो कॉल करने वाले का टॉवर लोकेशन पटना के नागेश्वर कॉलोनी का मिला। इसके बाद भोजपुर पुलिस ने एसटीएफ की मदद से छापेमारी की तो आरेपी अभिषेक अग्रवाल पकड़ा गया। एसटीएफ ने उसे नवादा थाने की पुलिस को सुपुर्द कर दिया है। उसके खिलाफ आर्थिक अपराध इका, पटना के खाजेकलां में भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस की मानें तो अभिषेक अग्रवाल फर्जी अधिकारी बनकर प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को कॉल करता था। 27 अप्रैल को उसने जब डीएम तनय सुल्तानिया को फर्जी ईडी अधिकारी बनकर कॉल किया तो डीएम कार्यालय की ओर से नवादा थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई। इसके बाद पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच में जुटी और आरोपी अभिषेक अग्रवाल को गिरफ्तार किया।
2022 में पटना हाईकोर्ट के जज के नाम से तत्कालीन डीजीपी को किया था कॉल
वर्ष 2022 में टाइल्स व्यवसायी अभिषेक अग्रवाल ने पटना हाई कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस संजय करोल के नाम से तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को कॉल किया था। उसने एक केस में गया के पूर्व एसएसपी आदित्य कुमार के हित में फैसला देने का दबाव बनाया था। एसके सिंघल के आदेश पर अभिषेक अग्रवाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 353, 387, 149, 420, 467, 468, 120 (बी) तथा आई टी एक्ट की धारा 66 (सी), 66 (डी) के अंतर्गत आर्थिक अपराध थाना (पटना) कांड संख्या 33/2022 दर्ज किया गया था। आर्थिक अपराध इकाई भी इसकी जांच कर रही थी। जांच में पता चला कि अभिषेक के संबंध के बिहार के कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के साथ। वह आसानी से अधिकारियों के साथ घुल मिल जाता था। उसकी कई तस्वीरे भी अधिकारियों के साथ सामने आई। डीजीपी को जज बनकर कॉल करने के आरोप में वह जेल भी गया था। इसके बाद कोर्ट ने उसे जमानत दे दी।