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Bihar News : एआई समिट में सीएम के बयान पर रोहिणी ने किया पलटवार; कहा- डंडे से नहीं, न्याय से आता है सुशासन

Sun, 24 May 2026 05:00 AM IST
Krishan Ballabh Narayan न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Krishan Ballabh Narayan Updated Sun, 24 May 2026 05:00 AM IST
सार

Bihar : पटना में आयोजित एआई समिट 2026 के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एक बयान पर राजद नेता रोहिणी आचार्य ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री और बिहार सरकार को घेरा है।

RJD party Rohini acharya targeted CM samrat chaudhary statement at bihar AI Summit Bihar News
सीएम सम्राट चौधरी और रोहिणी आचार्या - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

    बिहार की सियासत में सुशासन की परिभाषा को लेकर वार-पलटवार का दौर शुरू हो गया है। पटना में आयोजित एआई समिट 2026 के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा दिए गए एक बयान पर राष्ट्रीय जनता दल की नेता रोहिणी आचार्य ने तीखा पलटवार किया है। रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और बिहार सरकार को घेरा है। 


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    आज पटना के ऊर्जा भवन में सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से एआई समिट 2026 का आयोजन किया गया था। इस खास कार्यक्रम का उद्घाटन सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया, जबकि विभागीय मंत्री नीतीश मिश्रा भी इस मौके पर मौजूद रहे। समिट में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के विकास में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका और नई तकनीकों के इस्तेमाल पर खुलकर बात की। हालांकि, अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सुशासन और व्यवस्था को लेकर एक ऐसी बात कह दी, जिसपर रोहिणी आचार्या ने आपत्ति जताई है।
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    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान पर तंज कसते हुए लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को संबोधित करते हुए लिखा है कि सरकार ने सुशासन की पूरी परिभाषा को ही छोटा कर दिया है। रोहिणी ने लिखा है कि मुख्यमंत्री जी, सुशासन का रास्ता सिर्फ पुलिस के भरोसे तय नहीं किया जा सकता। सुशासन डंडे से नहीं, बल्कि शासन के न्याय और जवाबदेही से आता है। जहां हर समस्या का समाधान सिर्फ पुलिस हो, उसे सुशासन नहीं बल्कि डर का शासन कहा जाता है।
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    रोहिणी ने लिखा है कि मुख्यमंत्री जी ... आपने तो सुशासन की पूरी परिभाषा एवं अवधारणा ही बदल और सीमित कर दी ..मुख्यमंत्री जी .. सुशासन का रास्ता सिर्फ पुलिस नहीं है। सुशासन का रास्ता पुलिस के भरोसे से नहीं तय किया जा सकता है, सुशासन जनता के विश्वास से हासिल होता है। जहाँ हर समस्या का जवाब और समाधान पुलिस हो, वो सुशासन नहीं डर का शासन होता है। सुशासन डंडे से नहीं, शासन के न्याय और जवाबदेही से आता है।
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    रोहिणी ने लिखा है कि मुख्यमंत्री जी .. पुलिस व्यवस्था का हिस्सा है, सुशासन का एकमात्र विकल्प नहीं। सुशासन में कानून के साथ इंसाफ भी दिखना चाहिए। सुशासन सिर्फ पुलिसिया हथकंडों, दमन और जातिगत भेद भरे मुठभेड़ों से नहीं आता बल्कि व्यवस्था में सार्थक सुधारने लाने से आता है। मुख्यमंत्री जी .. जब जनता पुलिसिया दमन के डर से सवाल पूछने से डरे, तो उसे सुशासन नहीं कहा जा सकता। सुशासन का मतलब भय नहीं, शासन पर आम जनता का भरोसा होना चाहिए।


    रोहिणी ने आगे लिखा है कि मुख्यमंत्री जी .. भ्रष्टाचार मुक्त विकास के प्रयास, पर्याप्त रोजगार और माकूल व लीक प्रूफ शिक्षा - व्यवस्था के बिना सिर्फ पुलिसिया व्यवस्था के भरोसे सुशासन की हरेक अवधारणा आधी - अधूरी है। मुख्यमंत्री जी ... सुशासन वहाँ होता है जहाँ अपने भविष्य को संवारने के प्रयास में सरकार से सवाल पूछता युवा एवं छात्र वर्ग खुद को पुलिसिया लाठी से बिना डरे सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे। मुख्यमंत्री जी .. आपके शासनकाल में युवाओं पर लाठियां बरसायी जाती हैं , उन पर पुलिसिया जुल्म होता है , झूठे मुकदमे थोप कर उनकी जायज आवाज़ को दबाया जाता है , ये कैसा सुशासन है ? मुख्यमंत्री जी .. वाजिब हक़ के लिए उठी आवाज को दबाना , सुशासन नहीं लोकतंत्र को कमजोर करना है।

    रोहिणी ने अंत में लिखा है कि मुख्यमंत्री जी .. सुशासन शासन की पारदर्शिता, जनहित में शासन के विवेकपूर्ण निर्णय और शासक की संवेदनशीलता से चरितार्थ होता, पुलिस को बेलगाम होने की खुली छूट दे कर न तो जनता का भरोसा जीता जा सकता है और ना ही सही मायनों में सुशासन बहाल किया जा सकता है, सिर्फ पुलिसिया सख्ती से राज्य नहीं चलता है। मुख्यमंत्री जी .. जहाँ जनता परेशान हो और सत्ता पुलिस के भरोसे सुशासन लाने को आश्वस्त हो, वहाँ सुशासन का दावा सदैव सवालों के घेरे में ही रहता है l

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